सरयू नदी में बनाई जा रही जल विद्युत परियोजना के विरोध में मल्ला दानपुर में आमरण अनशन पर बैठे छः आन्दोलनकारियों को पुलिस ने उठा कर जिला अस्पताल, बागेश्वर में भर्ती करवा दिया है। लेकिन उनका अनशन अस्पताल में भी जारी है। उधर सौंग में भी चार लोग अनशन पर बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपना घर-गाँव बचाने के लिये अन्तिम दम तक संघर्ष करेंगे। इस बीच भगतसिंह कोश्यारी से उनकी बातचीत बेनतीजा रही। इससे भाजपा कार्यकर्ता पशोपेश में हैं।
प्रदेश की बुनियादी समस्यायें दूर करने में असफल रहे पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने ‘ऊर्जा प्रदेश’ का झाँसा अवश्य दिया और उनके चुनाव क्षेत्र में पड़ने वाले इस क्षेत्र के निवासियों को अपनी किस्मत का पता तब चला, जब उत्तर भारत हाइड्रो कॉरपोरेशन नामक कम्पनी के कर्मचारी लाव-लश्कर के साथ सरयू घाटी का पानी सुरंग के रास्ते दूसरी जगह छोड़ कर बिजली बनाने आ धमके। फलेंडा (टिहरी) से लेकर चाँई गाँव (चमोली) तक की घटनाओं से वाकिफ मल्ला दानपुर के निवासियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। सूड़िंग गाँव के ग्राम प्रधान मोहन सिंह टाकुली का कहना है कि यह क्षेत्र भूगर्भीय दृष्टि से अत्यन्त संवेदनशील थ्रस्ट जोन में आता है। बरसात में यहाँ प्रायः तबाही होती रहती है। 1957 में ग्राम चौड़ा-सूड़िंग में हुए भूस्खलन में 47 लोगों की जानें गईं, मवेशी मरे और बहुत सी कृषि भूमि नष्ट हुई। 1983-84 में रिखाड़ी में हुए भूस्खलन में सात लोग दब कर मरे और लाखों की सम्पत्ति नष्ट हुई। 2004 में चूड़िया गधेरे में बादल फटने से तीन लोगों की मृत्यु हुई। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरंग खोदना सामूहिक तबाही को निमंत्रण देना है।
मगर उत्तर भारत हाइड्रो कॉरपोरेशन ने ऐसी आपत्तियों को दरकिनार कर मुनार से सूड़िंग गाँव होते हुए सलिंग-रीठाबगड़ तक (तीन फेज में) तीन जगह पावर हाउस बना कर सुरंग से उनमें पानी पहुँचाने की अपनी योजना पर काम शुरू कर दिया है। कंपनी द्वारा व्यापक खुदान करने के बाद ही ग्रामीण संघर्ष में उतरे हैं। स्थानीय युवक राजेन्द्र टाकुली बताते हैं कि परियोजना का प्रभाव इस बरसात में प्रत्यक्ष दिखा। योजना के पाईप ही नहीं बहे, सूपी के लिये बन रही मोटर सड़क भी पूरी तरह ध्वस्त हो गई। रिखाड़ी गाँव में कई मकान ध्वस्त हुए। कम्पनी ने सैकड़ों हरे पेड़ भी काटे।
मुनार के सामने सरयू पाबू मांसी ग्राम सभा है। ऊपर तलाई, सूपी, गाँव हैं। यहाँ से लाहुर 7 किमी. दूर है। खच्चरवाहक माधो सिंह कहते हैं, साहब, यह परियोजना तबाह कर देगी। मुनार गाँव के थान सिंह टाकुली कहते हैं कि हमारे मकान के नीचे से टनल लाईन की सर्वे हुई है। इसकी जद में 22 परिवारों की जमीन आयेगी। वन पंचायत सूड़िंग के 70 वर्षीय सरपंच महेन्द्र सिंह मटियानी के अनुसार वे भावी पीढ़ी की खुशहाली के लिये आन्दोलन में शिरकत कर रहे हैं। हर बरसात में यहाँ जमीन बैठ रही है, जलस्रोत सूख रहे हैं व मकानों में दरारें पड़ गई हैं। इस बीच परियोजना का विरोध होने पर कम्पनी ने कुछ भू वैज्ञानिकों को बुलाया। लेकिन फेज वन प्रोजेक्ट स्थल पर आये इन विशेषज्ञों ने भी ग्रामीणों को बताया कि यह पूरा क्षेत्र कमजोर है और यही रिपोर्ट वे आई.आई.टी., रुड़की को भी देंगे। सलिंग में 40 मवासे, भैंसखाली में 25 तथा नदी पार मेहलचौरा में 75 मवासे रहते हैं। ग्रामसभा के सलिंग से तुमड़िया- मुनार तक सड़क साढ़े तीन मीटर तक बैठ चुकी है। 1998 में भैंसखोली में जबर्दस्त भूस्खलन से जगह-जगह दरारें पड़ी थीं। अब मुनार से सौंग होते हुए सलिंग गाँव के पास टनल का पानी खेतों के ऊपर से पाइपों द्वारा ले जाने की योजना है, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे हैं।
भाजपा कार्यकर्ता और संघर्ष समिति के दुर्गासिंह धानिक बताते हैं कि लम्बे पत्र व्यवहार, प्रदर्शन और क्रमिक अनशन के बाद ही 7 जनवरी से आमरण अनशन शुरू किया गया है। रामसेतु और अयोध्या के राम मन्दिर के लिये चिन्तित भाजपा के वरिष्ठ नेता यहाँ सरयू के संगम पर बने शिवालय, मन्दिर और श्मशान घाट को कंपनी द्वारा नष्ट कर दिये जाने के बावजूद होंठ सिये बैठे हैं। आन्दोलनकारियों से भगत सिंह कोश्यारी यहाँ तक कह गये कि परियोजना तो हर हाल में बनेगी ही। तिमलाबगड़ में चल रहे आन्दोलन को तोड़ने में कोश्यारी सफल भी हो गये। समझौते के अनुसार इस क्षेत्र के विकास के लिये कम्पनी द्वारा 20 लाख रुपया दिया जायेगा। मगर सौंग में आमरण अनशन में बैठे लोगों को 12 जनवरी की रात उठा लिये जाने के बावजूद पाँच अन्य व्यक्ति आमरण अनशन में बैठ गये। इस बीच उत्तरायणी के कारण जनपद में सर्वत्र व्यस्तता है। लेकिन ग्रामीण जुटे रहे तो 16 जनवरी के बाद आन्दोलन में तेजी आने की सम्भावना है।