विगत वर्ष की अतिवृष्टि की तबाही देख चुके लोग इस बार मानसून आने के समय से ही आतंकित हैं। लेकिन प्रकृति जो कुछ करेगी, वह तो करेगी ही सरकार-प्रशासन ने अभी से अपना रूप दिखा दिया है। पिथौरागढ़ जनपद में जगह-जगह पैदल मार्ग तक अवरुद्ध होने से जनजीवन अस्तव्यस्त है। समय पर खाद्यान्न न मिलने से लोग कष्टकारी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। मोटर मार्ग की तो मत ही पूछिये, संचार सेवा भी बार-बार ठप्प हो जाती है। कभी-कभी तो जनपद का संपर्क पूरे देश-दुनियाँ से ही कट जाता है। ऐसे ही एक मौके पर विगत वर्ष किसी इलेक्ट्रानिक चैनल ने सीमान्त क्षेत्र मुनस्यारी में तबाही की खबर प्रसारित कर सनसनी फैला दी थी। बदकिस्मती से बीएसएनएल को भी उसी वक्त खराब होना था। उसने तकनीकी खराबी बता कर अपना पल्ला झाड़ लिया। पर शुक्रिया हो प्राइवेट संचार कंपनियों का- कम से कम अब अफवाह के समय तो सजग रहा जायेगा और लोग अपने परिजनों को लेकर चिंतित नहीं होंगे।
इधर सड़कों को सुचारु रखने के लिए जिम्मेदार लोक निर्माण विभाग अभियन्ताओं की कमी से जूझ रहा है। इससे जनपद के मोटर मार्ग बाधित रहते हैं। जनपद में कुल 1,252 किमी सड़कें हैं। इनमें 190 किमी. राज्य मार्ग, 168 किमी. प्रमुख जिला मार्ग, 119 किमी. अन्य जिला मार्ग, 707 किमी. ग्रामीण मार्ग व 68 किमी. हल्का वाहन मार्ग शामिल है। समस्त सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदार लोनिवि के चार खण्डों में अधिशासी अभियन्ता के दो व अवर अभियन्ता के 25 पद रिक्त चल रहे हैं। प्रान्तीय खण्ड डीडीहाट व अस्थाई खण्ड बेरीनाग में अधिशासी अभियन्ता के पद रिक्त होने से प्रान्तीय खण्ड डीडीहाट का प्रान्तीय खण्ड पिथौरागढ़ व अस्थाई खण्ड बेरीनाग का निर्माण खण्ड अस्कोट के अधिशासी अभियन्ता के पास अतिरिक्त प्रभार है। अवर अभियन्ताओं के स्वीकृत 50 पदों के सापेक्ष 25 ही तैनात हैं। इनमें 10 अभियन्ता संविदा में तैनात हैं। प्रान्तीय खण्ड में अवर अभियन्ता स्वीकृत 14 पदों के सापेक्ष 8 (3 संविदा), अस्थाई खण्ड बेरीनाग में 12 के सापेक्ष 7 (3 संविदा), प्रान्तीय खण्ड डीडीहाट में 12 के सापेक्ष 4 (2 संविदा), तथा निर्माण खण्ड अस्कोट में 12 के सापेक्ष 5 (2 संविदा) कार्यरत हैं।
अभियन्ताओं की कमी से सामान्य कार्यो के साथ दैवीय आपदा के तात्कालिक कार्य मानक व गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय सीमा के भीतर पूर्ण करना जटिल समस्या बना हुआ है। विषम भौगौलिक परिस्थिति, सामरिक महत्व व अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से जुड़े डीडीहाट व अस्कोट खण्डों में कार्य करना बहुत बड़ी चुनौती है। अस्कोट खण्ड में कैलास मानसरोवर व छोटा कैलास पड़ते हैं तो डीडीहाट खण्ड में मुनस्यारी- मलारी, मिलम- रालम- सीपू सहित पर्वतारोहण व पथारोहण के विभिन्न पैदल पथ आते हैं। आईटीबीपी और एसएसबी के जवान इन्हीं दो खण्डों के पैदल पथों से सीमाओं की चौकसी करते हैं। उपकरणों का अभाव भी विभाग के लिए समस्या बना हुआ है। चारों खण्डों में कुल मिला कर 5 चेन डोजर, 5 टाटा जेडी, 1 व्हील डोजर, 2 रोबोट व 4 टिप्पर ही उपलब्ध हैं। समस्या तब पैदा होती है जब बरसात से एक ही खण्ड में कई सड़कंे बाधित हो जाती हैं। उस वक्त मशीनों की किल्लत का एहसास होता है। विवशता में विभाग को सीमा सड़क संगठन और निजी उपकरणों पर काफी आश्रित रहना पड़ता है। इसके साथ कभी तेल तो कभी मशीन चालक की समस्या भी लगभग जुड़ी रहती है। यदि लोनिवि वर्षाकाल से पूर्व ही ठोस कार्य योजना बना कर कार्य करे तो इन समस्याओं का निराकरण संभव है।