पिथौरागढ़ प्यासा है। शहर को घाट, भैंलोत, ठुलीगाड़, रई से पेयजल आपूर्ति होती है। वर्तमान में पिथौरागढ़ को 11.5 एम.एल.डी. रोजाना की जरूरत की तुलना में 3.5 एम.एल.डी. ही पानी मिल पा रहा है। पिछले वर्ष 4 घाट में, 2 मटेला में व 2 गुरना में, कुल 8 नये पंप लगाये गये। एक पंप की कीमत 25-30 लाख थी। मगर इतनी भारी भरकम राशि खर्च करने के बाद भी इन दिनों लोगांे को तीसरे दिन पानी मिल रहा है। इस बीच जल संस्थान के अधीक्षण अभियन्ता डी.के. मिश्रा तथा अधिशासी अभियन्ता ए.के. सक्सेना का स्थानान्तरण हो चुका है और संविदा में तैनात सहायक अभियन्ता विनय जोशी को उनके पद से हटा दिया गया है। लेकिन हालात जस के तस हैं। टैंकर के पहुँचते ही लोग टूट पडते हैं। पानी न होने से कुछ लोग होटलांे में खाना खाने को मजबूर है तो कुछ ने हफ्तों से नहाया नहीं है।
एक ओर पानी का रोना तो दूसरी ओर ऐसा अंधड़, जिसे देखकर हर कोई दहशत खा गया। मगर एक जून को तीसरे पहर आये इस अंधड़ ने दो मासूमों की जिंदगी छीन ली। 9 लोग घायल हो गये। नगर के गांधी चौक में अंधड़ के चलते एक होटल की छत से गिरे टिनों की चपेट में आये बारबर नासिर सलमानी के 12 वर्षीय पुत्र वसीर सलमानी और लुन्ठूड़ा निवासी सुरेश कुमार के पुत्र शिवम कुमार 15 वर्ष की मौत हो गयी। इस घटना के बाद पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गयी है। जिन्दगी और मौत के बीच झूल रहे मासूम शिवम कुमार जब का इलाज पहले जिला चिकित्सालय में और फिर एक स्थानीय नर्सिंग होम में चला। फिर हालात बिगड़ने पर उसे बाहर के लिये रैफर कर दिया गया। इसी दौरान उसने दम तोड़ दिया। यदि पिथौरागढ़में ट्रामा सेन्टर होता, बेस चिकित्सालय बन गया होता, न्यूरोसर्जन व अन्य विशेषज्ञ डॉक्टर जिला चिकित्सालय में तैनात होते तो शायद शिवम की जान बचायी जा सकती थी।