इसे मात्र सहयोग कहें या भाग्य का लेख कि अभी आम जन की अभिव्यक्ति कहे जाने वाले गिर्दा की चिता ठण्डी भी नहीं हो पाई थी कि 22 अगस्त की रात पूर्व मंत्री प्रताप भैय्या के देहान्त की खबर ने सबको स्तब्ध कर दिया।
सात साल के शरारती प्रताप (जन्म: 30 दिसम्बर 1932, ग्राम च्यूरीगाड़) के दूध के दाँत भी अभी ठीक से नहीं टूटे थे कि वे आजादी के आंदोलन में शामिल हो गये। तब किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन पिछड़े पहाड़ी ओखलकांडा ब्लॉक का यह बालक उत्तर प्रदेश की विधान सभा में सबसे कम उम्र का विधायक और फिर कम उम्र में मंत्री बन गया। हालाँकि बचपन से ही राजनीति के प्रति उनके जुनून को देखते हुए मंत्री पद उनके लिये प्रत्याशित ही था। अपने स्कूली दिनों से ही उन्होंने राजनीति में गहरी रुचि लेना आरम्भ कर दिया था। वे जहाँ खड़े हो जाते, उनके पीछे जन सैलाब उमड़ पड़ता था।
बहुआयामी प्रतिभा के धनी प्रताप भैय्या राजनीतिज्ञ ही नहीं विधिवेत्ता एवं शिक्षाविद भी थे। अधिवक्ता के रूप में उन्होंने सरोवर नगरी में सैकड़ों विधिवेत्ताओं को बुलाकर सैकड़ों विधि गोष्ठियों का आयोजन किया। उनकी विधि-गोष्ठियों में वकीलों के अतिरिक्त उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तियों से लेकर सिविल क्षेत्र के मुनसिफ तक भाग लेते थे। ‘भैय्या जी’ नाम उनके गुरु, महान समाजवादी आचार्य नरेन्द्र देव ने दिया था। नरेन्द्र देव के नाम पर ही भैय्या जी ने शैक्षिक निधि का गठन किया। इसके तहत वर्तमान में यूपी तथा उत्तराखण्ड में सैकड़ों विद्यालय चल रहे हैं, जिनमें सरोवर नगरी का भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय व खटीमा का थारू इण्टर कॉलेज प्रमुख हैं।
अपनी धुन के पक्के भैय्या जी जब कोई गोष्ठी करते तो उन्हें भाग लेने वाले वक्ताओं तथा श्रोताओं की संख्या से भी कोई सरोकार नहीं होता था। कभी चन्द ही वक्ता और श्रोता होते थे। एक बार उनके सहित केवल 5 श्रोता ही एक गोष्ठी में उपस्थित थे, जिनमें उनके पुत्र के अतिरिक्त केवल उनके जूनियर ही थे। उन्होंने पाँच पाण्डव कह कर गोष्ठी करा डाली। वह अपनी कामयाबी का श्रेय अपनी पत्नी बीना जी को बराबर देते थे। पत्नी बीना जी की मृत्यु के बाद उन पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन राष्ट्रपति भवन में कराया। इसके अतिरिक्त पत्नी के संस्मरणों पर आधारित उनकी जीवन गाथा पर एक छोटी फिल्म के सम्पादन का कार्य भी किया। भैय्या जी ने कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने के अतिरिक्त जाति प्रथा के विरुद्ध सामाजिक लड़ाई भी लड़ी। विपुल प्रतिभा के धनी प्रताप भैय्या की ख्याति उत्तराखण्ड के बाहर सम्पूर्ण भारत तक फैली थी। देश के कई राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों से उनके निजी रिश्ते रहे।