हँसती-मुस्कुराती अपनी बालसुलभ शरारतों से सबको आनंदित करती थी-प्रीति। पढ़ाई के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने के लिए नौकरी करती और साथ ही परिवार के सदस्यों का पूरा ख्याल रखने की कोशिश भी करती। वह आधुनिक सदी की धर और नौकरी में सामंजस्य स्थापित करने वाली महिलाओं का प्रतिरूप थी। 19 अक्टूबर की रात कुंठित मानसिकता से ग्रस्त वहशी दरिन्दों के हवश की शिकार बन गई। शाम 6 बजे घर लौटते वक्त वहशियाने तरीके से बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर दी गई। उसकी निर्वस्त्र लाश उसी के घर के पास गन्ने के खेत में पड़ी मिली। उसकी लाश पर पड़े निशान व घाव उसके साथ हुए अप्राकृतिक यौनाचार व दरिंदगी की दास्तां कह सिसक रहे थे।
लालकुआ क्षेत्र के पदमपुर देवलिया गांव निवासी प्रीति शर्मा हल्द्वानी स्थित जेटकिंग कम्प्यूटर इंस्टीट्यूट में काउंसलर के पद पर कार्यरत थी। 19 नवंबर की शाम रोज की तरह वापस घर लौट रही थी। लेकिन वह घर न पहुंच सकी। रोजाना शाम 7 बजे तक घर पहुँचने वाली प्रीति जब नहीं पहुंची तो उसकी बहन ने उसे फोन मिलाया। पर फोन पर बात न हो सकी। कुछ देर बाद मिलाने पर उसका फोन नॉट रीचेबल हो गया और थोड़ी देर बाद स्विच ऑफ हो गया। इससे परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिजनों ने रातभर लगभग सभी संभावित जगहों पर उसकी तलाश की पर कोई सफलता न मिली। अगले दिन सूफी भगवानपुर में गन्ने के खेत में प्रीति की विकृत अवस्था में निर्वस्त्र लाश मिली। उसके पूरे शरीर पर गहरी खरोंचें थी। उसके चेहरे, पेट व वक्षस्थल पर लात-घूसों से पिटाई किये जाने के निशान थे। होंठ सूजे व कटे हुए थे, जिनसे खूँन बह रहा था। उसकी लाश के पास उसका सामान जूते, पर्स, पैसे, पॉलीथिन आदि करीने से रखा हुआ था। उसके गुप्तांग में पेन घुसाया गया था। उसके गले को उसके ही पर्स की बेल्ट से कस कर बांधा गया था। पहली ही दृष्टि में उसके साथ कई लोगों द्वारा नृशंस व अप्राकृतिक यौनाचार कर हत्या किया जाना लग रहा था।
उसकी लाश देखकर गांव के लोग व परिजन ठगे से रह गये। इतनी मासूम लड़की के साथ इतना बर्बर व्यवहार लोगों को उद्वेलित कर गया। इसी बीच पुलिस पहुँच गई। डॉग स्वकयड को लाया गया, जो पास स्थित टाइल फैक्ट्री के कर्मचारी कंपाउंड में जा कर ठिठक गया। सभी का संदेह टाइल फैक्ट्री पर केंद्रित हो गया। मगर पुलिस ने इसे हल्के में लिया। लेकिन पुलिस ने प्रीति के साथ गैंगरेप होने के बाद हत्या की आशंका स्वीकार की।
रात ढलते-ढलते प्रीति की हत्या की खबर इलाके में फैल गई और आक्रोश बढ़ता गया। प्रीति के परिजन व गांववासी पुलिस व प्रशासन की हीलाहवाली से काफी क्षुब्ध थे। अगले दिन 21 नवंबर को आक्रोशित लोगों ने प्रीति के शव को बरेली-हल्द्वानी हाइवे पर रख कर जाम लगा दिया। मोतीनगर चौराहे पर हजारों लोग जिसमें बड़ी संख्या में महिलायें थी, प्रीति के हत्यारों को तत्काल गिरफ्तार कर कड़ी सजा देने की मांग कर रहे थे। पाँच घंटे के प्रदर्शन के बाद उन्हें 24 घंटे में हत्यारों की गिरफ्तारी करने का आश्वासन मिला। तब जाम खुला और प्रीति का अंतिम संस्कार हुआ। 24 घंटे बीतने के बाद भी पुलिस कोई सुराग नहीं ढूंढ सकी। ग्रामीण फिर से धरने पर बैठ गये। इसी दिन डीजीपी ने घटनास्थल का जायजा लिया और जाँच एसटीएफ को सौंप दी। तीन दिन बीत जाने के बाद तथा उधमसिंह नगर पुलिस, हल्द्वानी पुलिस व एसटीएफ जैसे तमाम बलों के जाँच में लगने के बाद भी कोई सुराग न मिलने से गुस्साये ग्रामीणों ने 23 नवंबर को फिर से बरेली रोड पर जाम कर दिया और सभा बुला ली गयी। यहाँ पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए पूरे गांव को छावनी में बदल दिया। सभा उग्र थी और न्याय पाने को आतुर थी। भाजपा-कांग्रेस के छुटभय्ये नेताओं ने सभा को भटकाने के प्रयास शुरू कर दिये। ऐसे संवेदनशील मौके का मखौल उड़ाते हुए कुछ लंपट अनर्गल बयानबाजी करने लगे। इसी बीच एक पुलिस अधिकारी की गाड़ी जबरदस्ती सड़क पर बैठी महिलाओं पर चढ़ते हुए आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी। विरोध करने पर पुलिस ने जाम लगा रहीं महिलाओं व ग्रामीणों पर लाठीचार्ज करना शुरू कर दिया तथा खदेड़ने की कोशिश करने लगी। न्याय मांगती और सच्चाई जानने की चाहत वाली जनता एक बार फिर राज्य दमन की शिकार हुई। पुलिसिया दमन झेलने के बाद ग्रामीणों ने साहस का परिचय देते हुए कॉमरेड बहादुर सिंह जंगी के नेतृत्व में 35 सदस्यीय ‘प्रीति हत्याकांड विरोधी संघर्ष समिति’ का गठन कर दिया। इसमें प्रीति के परिजन भी शामिल हैं। समिति ने जाम से लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए हत्यारों की गिरफ्तारी न हो जाने तक चौराहे पर अगले दिन से धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। पुलिस द्वारा की जा रही जाँच की कार्यशैली में तमाम झोल व ढीला-ढाला रवैया ग्रामीणों में लगातार संदेह पैदा कर रहा था। इसी बीच पुलिस की जाँच चार लोगों पर केंद्रित होना बताई गई, जिसमें चार रसूखदार लोगों के शामिल होने की चर्चा थी।
घटना के आठ दिन बीत जाने पर तथा तमाम आश्वासनों के बाद भी जब अपराधियों का पुलिस पता नहीं चला सकी और कोई ठोस जानकारी नहीं जुटा पायी तो संघर्ष समिति के आहवान पर हजारों लोगों का हुजूम 27 नवंबर को सड़कों पर न्याय मांगने उतर पड़ा। जुलूस की शक्ल में हजारों लोग, जिनमें बड़ी संख्या में महिलायें थी, मोतीनगर से हल्द्वानी पहुँचे और वहाँ विशाल सभा का आयोजन किया। सभा में शासन-प्रशासन के संवेदनहीन रवैये की जमकर आलोचना हुई और प्रीति के हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग तीखी हुई। सभा स्थल पर डीएम को आना पड़ा। उन्होंने रटा-रटाया जवाब दिया कि जाँच चल रही है। हत्यारे जल्द पकड़े जायेंगे। इससे असंतुष्ट जनता न्याय पाने के लिये जुटी रही।
अंततः घटना के दसवें दिन सुबह से ही खबर तैरने लगी कि प्रीति हत्याकांड का खुलासा होने वाला है। आज हत्यारों के असली चेहरे सामने आ जायेंगे। देर शाम खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि प्रीति को एकतरफा प्रेम करने वाले भास्कर जोशी ने ही उसे मौत के घाट उतार दिया। बकुलिया (मोटाहल्दू) निवासी भास्कर डंपर का काम करता है। पुलिस व प्रेस के सामने अपने विरोधाभाषी बयानों के साथ उसने प्रीति को मारने की बात स्वीकार की। उसने बताया कि पंचायत घर के पास उसने प्रीति को रोककर बात करना चाही, जिसका प्रीति ने विरोध किया और उसे पत्थर मार दिया। जिस पर उसने प्रीति को गूल में डुबो दिया, जहाँ वह बेहोश हो गई। वो उसे गन्ने के खेत में ले गया। तब तक प्रीति अर्ध बेहोशी की हालत में बचाओ…बचाओं चिल्लाने लगी तो उसने उसका गला व मुँह दबा दिया तथा उसके पर्स की बेल्ट से उसका गला घोंट दिया। भास्कर ने बताया कि वो शराब पिये हुए था। घटना को अंजाम देने के बाद वह फिर पास के ढाबे में गया जहां उसने फिर शराब पी। बाद में अपने घर जाकर सो गया। दूसरे दिन अपने परिजनों के साथ गरुड़ चला गया।
इस खुलासे से पुलिस टीम के अलावा कोई भी संतुष्ट नहीं था। घटना को अंजाम देने वाला आरोपी भास्कर जिस निर्भीकता से जवाब दे रहा था उससे लग रहा था कि उसे अपने किये का कोई मलाल नहीं है और न अपने अंजाम की चिंता। उसके लहजे से पेशेवर अपराधी होना प्रतीत हो रहा था जबकि पुलिस उसे पेशेवर अपराधी नहीं मानती।
प्रीति के पिता ने इस खुलासे को पुलिसिया कहानी करार दिया। उन्होंने कहा कि ये कहानी किसी के गले नहीं उतर सकती। क्योंकि इस कहानी में कई सवाल अनुत्तरित छोड़ दिये गये हैं। उन्होंने असली हत्यारों को न पकड़े जाने पर आत्मदाह की धमकी तक दे डाली।
गौरतलब है कि पुलिस की कहानी में प्रीति के साथ हुए दुर्वव्यवहार की बात कहीं नहीं थी। सवाल उठता है कि यदि भास्कर प्रीति से प्रेम करता था तो क्या कोई अपने प्रेम की इतनी नृशंस हत्या कर सकता है ? माना कि हत्या गैरइरादतन हो गई तो उसके मृत शरीर को नग्न कर उससे खिलवाड़ व दुव्र्यवहार क्यों किया ? जिस जगह पर घटना होने की बात कही जा रही है वो आबादी वाला क्षेत्र है साथ ही वहाँ हत्या होने का कोई सबूत नहीं मिला है। पंचायत घर से गन्ने के खेत की दूरी लगभग पौन किमी. है। ऐसे में अकेला शराब पिये व्यक्ति एक लड़की को कैसे घसीट कर ले गया ? मौके पर मिला प्रीति का सामान व कपड़े गूल में डूबने के बाद भी सूखे कैसे थे ? ऐसी विभत्स घटना को एक अकेला व्यक्ति कैसे अंजाम दे सकता है ? ऐसे ही तमाम सवाल हैं जो हर व्यक्ति के दिमाग में कौंध रहे हैं।
यह सवाल न सिर्फ पुलिस प्रशासन-शासन की असली अपराधियों को बचाने की कोशिशों की कलई खोल रहे हैं, बल्कि उस पुरुषवादी मानसिकता की कलई भी खोल रहे हैं, जो आज भी महिलाओं को दोयम दर्जे व उपभोग की वस्तु मानती है। महिलाओं के बढ़ते कदमों को अपने पैरों तले कुचलना चाहती हैं। नारी सशक्तिकरण व स्वतंत्रता के जुमलों के बीच महिलाओं को घर की चारदिवारी के अंदर कैद करना चाहती हैं। जिन्हें आज भी महिलाओं को स्वाभिमान के साथ जीना अखरता है। कुल मिलाकर चंद लोगों के अलावा प्रीति की हत्या के लिये समाज में आधुनिकता की आड़ में छिपी पुरुषवादी कुंठित मानसिकता भी जिम्मेदार है जो महिलाओं को आज भी समानता का अधिकार देने से झिझकती है।
आज तक न जाने कितनी प्रीति इस मानसिकता की शिकार हो अपनी अस्मिता व जीवन खो चुकी हैं, जिनका दर्द शायद रात के अंधेरे में ही गुम कर दिया गया। लेकिन प्रीति के लिये न्याय मांगती सैकड़ों महिलायें व जनता तथा साहस के साथ रोज घर से बाहर निकलती महिलाओं ने भी इस चुनौती को स्वीकार करते हुए ऐलान किया है कि अब कोई भी प्रीति का हत्यारा बच नहीं सकता। उसे सजा जरूर मिलेगी। चाहे शासन-प्रशासन भी उनके साथ क्यों न हो।
इसी ऐलान के साथ घटना के खुलासे के बाद भी संघर्ष समिति और महिलाओं का आंदोलन जारी है। असली हत्यारों को गिरफ्तार करवाने के लिये न्याय पाने के लिये संघर्ष समिति ने दो दिसम्बर को हल्द्वानी बंद का ऐलान किया है। प्रीति को न्याय दिलाने की जंग अभी जारी है।