नीरज कुमार जोशी
भाई साहब यह गोभी कहाँ की है ? रूसी की तो नही ? यार, तुम तो हमेशा नहीं कहकर यही सब्जी थमा देते हो….। इस तरह की बहस अक्सर दुकानदार व ग्राहक में हो जाती है। कारण, नैनीताल शहर की सीवर लाईनों का निकास स्थल रूसी गाँव में जो है। लेकिन जल्दी ही यह नजारा बदलने वाला है।
बढ़ रही आबादी ने नैनी झील की स्वच्छता भी प्रभावित की है। घरों से निकलने वाली सीवर लाईनों के पानी का नालो से होते हुए झील में मिलने के कारण सैकड़ों लोग पथरी, अल्सर व पेट संबंधी बीमारियों से पीडि़त हैं। वर्ष 2003 में राष्ट्रीय झील प्रबंधन एवं संरक्षण विभाग ने इस सीवर से झील को बचाने तथा रूसी गाँव के कृषकों को होने वाली परेशानी को रोकने के लिए एक सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट योजना आरंभ की। झील विकास प्राधिकरण नैनीताल इस योजना की नोडल कंपनी है व उत्तराखण्ड पेयजल निगम नैनीताल कार्यदायी संस्था है। इस प्लान्ट पर कार्य वर्ष 2007 में आरम्भ हुआ। योजना की लागत 1,023 लाख रुपया है जिसमें नगर पालिका, जल निगम व वन विभाग नैनीताल की सहभागिता है। प्लान्ट 2 हेक्टेयर भूमि पर बनाया जा रहा है, जिसे वन विभाग नैनीताल से लगभग 17 लाख की धनराशि मे लिया गया है।
उत्तराखण्ड पेयजल निगम (निर्माण खण्ड) के अधिशासी अभियन्ता अशोक सक्सेना नैनीताल बताते हैं कि सीवर के पानी में बायो कैमिकल डिमाण्ड की मात्रा (बी.ओ.डी) 150-300 प्रतिशत तक होती है। बी.ओ.डी मिथेन गैस व हाइड्रोकार्बनों का मिश्रण होता है। ऑक्सीजन की अत्यधिक कमी होने के कारण यह पानी कृषि योग्य नहीं होता है। कृषि के लिए प्रयोग में आने वाले पानी में बी.डी.ओ की अधिकतम मात्रा 100 प्रतिशत तक ही होनी चाहिए व पेयजल में 30 प्रतिशत से अधिक नही होनी चाहिए। वे इस योजना को बहुउद्देशीय बताते हुए कहते हैं इस तरह की योजनाएँ पहले भी अन्य राज्यों में भी सफल रही हैं लेकिन नैनीताल जनपद की यह योजना हर पक्ष के साथ हैं। नैनीताल शहर के साथ-साथ रूसी गाँव के हजारों लोग इस योजना से लाभान्वित होंगे।