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    Rajesh joshi May 17, 2010 at 1:46 PM |

    इस मार्ग को बनाने में सरकार कि क्या परेशानी है,यह बात समझ से परे है जबकि उत्तराखण्ड राज्य के गठन के बाद यह मार्ग राज्य की जीवन रेखा साबित हो सकता है। राजनेता और प्रशासन अपनी गैर जिम्मेदारियों का खामियाजा आम जनता के उपर क्यों थोपते है। अगर कार्बेट प्रशासन अपनी नपुंसकता के कारंण पार्क में बाघों को नही बचा पा रहा है तो इसके लिए बफ़र जोन में रहने वाले लोग तो जिम्मेदार नही। आज एक रेन्ज अधिकारी कम से कम एक लाख रूपये महीने कमाता है पर किसी बाघ या गुलदार को बचाने के लिए रेन्ज में एक पिंजरा उपलब्ध नही होता तो कभी डाक्टर नही मिलता। हर वन अधिकारी की हल्द्वानी/देहरादून में कोठियां जरुर बनती जा रही हैं पर इसके बफ़र जोन और आस पास रहने वाली आम जनता इनके तुगलकी आदेशों से त्रस्त है। वन्य जीवों/जीवन पर सभी तरफ़ से मार पड़ रही है ऎसे में यह कब तक सुरक्षित रह पायेगा यह भी अनिश्चित है।

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    Risky Pathak February 8, 2012 at 4:29 PM |

    Any updates on this road???

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