‘रोल गों कि सोल धार, कां हाट कां बजार’। यह पिथौरागढ़-अल्मोड़ा सीमा पर के बाशिंदों में प्रचलित लोकोक्ति है। हाट माने गंगोलीहाट और बाजार माने पिथौरागढ़। सड़कों के न होने के दौर में जो पैदल रास्ते थे उनमें ही एक महत्वपूर्ण रास्ता वर्तमान के अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ जिलों को जोड़ता है। यही रास्ता पुराने समय में भारत-नेपाल और भारत-तिब्बत का भी पैदल मार्ग था। इस रास्ते में सरयू नदी से गंगोलीहाट की ओर चढ़ते हुए ही ‘रोल’ की ये सोलह धार (चढ़ाइयाँ) पड़ती हैं।
इस बार इन चढ़ाइयों के ऊँचे-खड़े पहाड़ पिछले तीन महीनों से हो रही बरसात के चलते स्खलित होने लगे हैं। ‘हनेरा लग्गा रोल’ गांव में पिछले दिनों जमीन से अचानक फूट पड़े पानी से जगह-जगह भूस्खलन होने लगा है। इनमें सबसे लम्बे, तकरीबन एक किमी के भूस्खलन की चपेट में घास चर रही एक गाय, एक बैल और सत्रह बकरियाँ आ गईं। मलबे में दबी एक ही बकरी जिंदा निकाली जा सकी। मलवे से तकरीबन 15-20 नाली रोपाई वाले धान के खेत भी तबाह हो गए।
जगह-जगह पानी फूटने से गांव में भूस्खलन अगले दिन भी जारी रहा। भूस्खलन होता देख लोग औरों को सतर्क रहने के लिए जोर जोर से आवाजें लगाते हैं। इन आवाजों से घरों के भीतर के लोग दौड़ते हुए बाहर आ जा रहे हैं। पूरे गांव में भूस्खलन की दहशत है। स्थानीय तहसीलदार ने घटनास्थल का दौरा कर बताया कि असुरक्षित लोगों को गांव ही के स्कूल में जा कर रहने की सलाह दी गई है। लेकिन ग्रामीणों का शिकायत है कि उनके जानवर और सामान के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं की जा रही है।