Various Editions of Nainital Samachar
अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2013
- आशल-कुशल : मई -2013-1
- सांस्कृतिक पदयात्रा से जानीं नंधौर क्षेत्र की तकलीफें
- एक सीधे पहाड़ी के नुकीले सपने .11
- कानून तो हैं, पालन नहीं होता
- ‘गढ़वाली’ को याद करते हुए की सिविल नाफरमानी की घोषणा
- दो शब्द श्रद्धांजलि के भी नहीं थे उनके लिये !
- वन विभाग की शह पर होती है तस्करी
- राजजात 2013: कई चुनौतियाँ होंगी हमारे सामने
- वनाग्नि रोकने के लिये चीड़ का सफाया जरूरी है
- कभी दामिनी…कभी गुडि़या
- चिट्ठी-पत्री : ऐसे कैसे सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था….
- सम्पादकीय : अखिलेश का गुस्सा!
- कोकाकोला का विरोध
अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2013
- ये लंगड़ी नगरपालिकायें!!!
- आँकड़ों के दलदल से उभरता उत्तराखंड–1
- बहुपयोगी बाल कहानियाँ
- भ्रम फैला रही हैं यूजीसी व प्रदेश सरकार की वेबसाइटें
- सम्पादकीय : मोदी और मीडिया
- उद्योग शुक्ला को सजा
- नगरपालिका अल्मोड़ा में भ्रष्टाचार
- सत्ता व पूँजी के गठजोड़ को तोड़ उमेश के आदर्शों को साकार करना होगा
- स्वस्ती श्री : गाइड और पर्यटक
- शंकर दादा! तुम कहाँ हो…
- याद आते रहेंगे शैलेश मटियानी
- माटी सं मंच तक: लोक संस्कृति के संरक्षण की सार्थक पहल
- मुनस्यारी में स्कीइंग की संभावनायें
- अल्मोड़ा में मार्क टली का व्याख्यान
- आशल-कुशल : 15 से 30 अप्रेल 2013
- असफल योजना है मनरेगा
अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2013
- एक सीधे पहाड़ी के नुकीले सपने .10
- आशल-कुशल : 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2013
- एक जनयात्रा उत्तराखंड की बेहतरी के लिये
- शिक्षामित्रों की स्थाई नियुक्ति के नाम पर गुमराह कर रही हैं सरकारें
- ग्रीन बोनस की अनदेखी
- ‘भगत सिंह कि जड़ें लोक के भीतर थीं’
- प्रो. बंग को श्रद्धाजलि
- रंवाई पर शोध-दस्तावेज का विमोचन
- सम्पादकीय : संजय दत्त क्षमादान या आत्मसमर्पण?
- ऐसे तो वनराज विहीन हो जायेंगे जंगल
- कैसे रुकेगा यह सिलसिला!!
अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . समापन किस्त
- अभिनय का ककहरा अमिताभ ने शेरवुड में सीखा
- अन्तर्राष्ट्रीय दबाव और कंपनियों के लालच के बरक्स परियोजनायें
- डाक्टर साहब के जाने के बाद…
- उत्तराखण्ड में गुमशुदा पर्यटन की तलाश
- कन्या भ्रूण हत्या में सीमान्त जिला पिथौरागढ़ भी पीछे नहीं है
- ‘वे देवता मर गये’ के परिप्रेक्ष्य में हल्द्वानी
- प्राप्ति स्वीकार :हिमाद्री को देखा’
- छोटा मुँह छोटी बात किल्लत की रोटी बनाम जि़ल्लत की रोटी है
- पशुबलि का दकियानूसी चेहरा
- सम्पादकीय : राजनीति का एक कुरूप चेहरा
- उत्तराखंड को कैड़ाओं से बचाओ
- टिहरी उपचुनाव: जीता कोई नहीं हारा मीडिया
- यायावर की डायरी
अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 20
- बच्चों का ख्याल रखें
- समस्यायें ही समस्यायें हैं सीमांत के इन गाँवों में
- खतरे के मुहाने पर गुप्तकाशी
- आपदा ने कपकोट के जख्म फिर हरे किए
- इन अभागों की किस्मत में सिर्फ आश्वासन हैं
- नन्दादेवी मेले की झलकियाँ
- शिक्षकों की कमी से जूझते इंटर कॉलेज
- फूलों की खेती सूख रही है
- सम्पादकीय : जुदा राहें गड़बड़ाता सच….
- छोटा मुँह छोटी बात : उन्मुक्त को उत्तराखंड से परीक्षा देनी चाहिये थी…
- फिर बैंक ऑफ बड़ौदा के षड़यंत्र में फँस गया है नैनीताल बैंक
- कब तक मरते रहेंगे लोग ?
- अलविदा डॉक्टर साहब!
- प्राप्ति स्वीकार : ’चल तुमड़ी बाटै-बाट’
- चिट्ठी पत्री : मंत्रमुग्ध और बालमिठाई के जन्मदाता कौन?
- शिक्षक तय नहीं कर पाये स्थानान्तरण का मामला
- ‘महिला हिंसा की जड़ें समाज में हैं’
- नैनीताल स्वच्छता दिवस का पाँचवा साल
- ‘सत्य की मशाल’ नैनीताल में
- रचना दिवस कार्यक्रम सम्पन्न
अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2012
- स्वस्ती श्री : शराब और उत्तराखंड
- चुरायी गई मूर्तियों को बेचना आसान नहीं होगा
- छोटा मुँह छोटी बात : कैसी शपथ कैसी प्रतिज्ञा!!
- सम्पादकीय : बरसात उत्तराखंड में उम्मीद से ज्यादा आतंक!
- आशल-कुशल : 15 सितंबर से 30 सितंबर 2012
- चलिये शूल में पड़ी सरयू नदी के किनारे टहलें……
- ठीक नहीं हैं सीमांत के हालचाल
- महेन्द्र मटियानी को श्रद्धांजलि दी
- देवभूमि में लगातार असुरक्षित हो रही हैं महिलायें
- सिर्फ एक पहाड़ नहीं है हिमालय
- असमंजस में हैं विस्थापित
- पाठशाला या पाकशाला ?
- छात्रवृत्ति में घोटाले से गुस्सा
- नगर पंचायत नहीं चाहते पोखरी के लोग
- ‘धारा पाँच’ के चक्कर में फँसी श्रीनगर परियोजना
- बेखौफ हैं खनन के तस्कर
- नहीं मिला वन्य जीवों द्वारा किये गये नुकसान का मुआवजा
- क्या चुनने को बचा इस बेशर्म राजनीति में ?
- अभी बेजार है उत्तरकाशी
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 18
अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 18
- कागजों में चल रहा है कृषि विज्ञान केन्द्र जाखधार
- कम्पनी परियोजना प्रभावितों में फूट डाल रही है
- तीन मुख्यमंत्रियों वाले जनपद जिला अस्पताल के बुरे हाल
- बगावत के बीच घिसटती सरकार
- आशल-कुशल : अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2012
- 10,000 की जनसंख्या प्रभावित है
- उत्तरकाशी वासियों का दर्द कोई नहीं सुन रहा है
- हालाते अब और दस्तावेज : कुछ नयी कुछ पुरानी -2
- इस बार गिर्दा को श्रीनगर में याद किया गया
- कहाँ जायें विज्ञान के छात्र
- छोटा मुँह छोटी बात: चुप्पी तोड़ो,बोलो
- सम्पादकीय : अराजकता का एक नया दौर
- मेरे लिये वह गिर्दा नहीं, ठसकदार ‘नानू मम्मा’ था
- हमारा कॉलम : समाचार का 36वें वर्ष में प्रवेश…..
अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 17
- रहस्यमय है पवन की मौत
- इस तरह खाली हो रहे हैं गाँव
- समाचार की यात्रा के बहाने जाने दूरस्थ ग्रामीणों के दुःख-सुख
- लड़कियों का पढ़ पाना तो असंभव है इन हालातों में
- हरेला तो बर्बाद हो रही प्रकृति को सँवारने का प्रयास होना चाहिये
- आशल-कुशल : 01 अगस्त से 14 अगस्त 2012
- आरक्षण को लेकर आग
- ‘प्रथम’ आसान करेगा विज्ञान शिक्षा
- राजस्व पुलिस के खस्ताहाल
- गन्ना किसानों को अनदेखा कर रही है सरकार
- अब शिक्षा के प्रसार में जुट गये हैं बाबा धर्मानंद
- गर्व से बोलो कि हम पहाड़ी हैं
- छोटा मुँह छोटी बात : रोटी से खेलता बोलता आदमी
- गोष्ठियों के रूप में सामने आ रहा है परियोजनाओं का सच
- सम्पादकीय : मीडिया का मंडन और अन्ना की गलतफहमी
- सच्चाई के लिये जूझ रहा है एक वकील
- पर्यटन के भेडि़या धँसान ने टाइगर रिजर्व में हड़कंप मचाया
अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2012
- यात्राओं पर नियंत्रण जरूरी है
- परियोजनाओं की नहीं, विकास के तरीकों की बात करें
- सरला बहन की याद
- यह गुंडागर्दी कहाँ ले जायेगी ?
- पहाड़ों के लिये काल बन गई हैं जेसीबी मशीनें
- कर्मी की दुर्घटना से हमने कोई सबक नहीं सीखा
- चिट्ठी पत्री: हल्द्वानी की दुर्दशा, कौन जिम्मेवार…?
- छोटा मुँह छोटी बात :रिश्ता नाड़े और पेटीकोट/पाजामे के बीच…..
- बारिश के भीतर बारिश है
- सर्वशक्तिशाली और सर्वव्यापी हैं तराई-भाबर के गलेदार
- आशल-कुशल : 15 जुलाई से 31 जुलाई 2012
- बी.एम.शाह उद्यान में वृक्षारोपण से नाराज हैं संस्कृतिकर्मी
- संपादकीय : विष-वमन में "मैं पीछे क्यों रहूँ" मानसिकता
- गंगा से
- हरेले की चिट्ठी मेघ के नाम
अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 16
- ‘राजस्व पुलिस’ का लोकार्पण
- अल्मोड़ा में सरकारी शैक्षणिक संस्थाओं की दुर्दषा
- खामिया विलुप्त हो रहा है
- शुरू में क्यों नहीं रोकते ?
- रुद्रपुर में पत्रकारिता संगोष्ठी
- छोटे परिवेश की बड़ी रचना के अंतर्विरोध
- गैस न हुई, लॉटरी खुलना हो गया
- विजय जड़धारी को सम्मान
- जंगल जल रहे हैं और कहीं कोई बंसी बजा रहा है !
- देहरादून में ही पानी उपयोग करने लायक नहीं है
- आशल-कुशल : अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2012
- प्रताप शिखर: आँखिरी पाँत का योद्धा
- पिंडरगंगा को अविरल बहने दो
- कैसे बन्द हो मालामाल करने वाली शराब ?
- चिट्ठी–पत्री: 25 साल नैनीताल, शेरदा मास पुलर और आज के धाँसू पत्रकार
- छोटा मुँह छोटी बात: स्माइलिंग बुद्धा से स्मेलिंग़ बुड्ढा तक….
- कवि बनने के लिए साक्षात्कार
- सम्पादकीय : उत्तराखंड में उन्माद का माहौल
- डकैती का पर्दाफाश….मगर कब तक खैर मनायेंगे ?
- चुनावी प्रलोभन है पट्टे की राजाज्ञा
- चुप्प !! मुँह मत खोलो…
अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 15
- शेरदा ‘अनपढ़ ’: सहज लोक अभिव्यक्तियों के बडे़ कवि
- दिनोंदिन खतरनाक हो रही है चारधाम यात्रा
- अंधड़ भी, प्यास भी
- किरन मंडल को याद रखेगा बंगाली समुदाय
- कुनल्ता स्कूल: पहाड़ की शिक्षा का आईना
- बहुत याद आते हैं रमेश दा
- कब बनेगा हॉस्टल ?
- गंगा में पाप धोने जैसा पाखण्ड है वृक्षारोपण
- आशल-कुशल : 15 जून से 30 जून 2012
- हल्द्वानी की नसों में बहता ज़हर
- अल्मोड़ा आकाशवाणी की जान थे सैयद अख़्तर रिज़वी
- पशुबलि रुकी तो सही
- प्राप्ति स्वीकार : ’उत्तराखण्ड के शिल्पकार’
- छोटा मुँह छोटी बात: गैस,पानी और मुख्यमंत्री का दौरा
- चिट्ठी -पत्री: वैब पत्रकारिता के लिये पुरस्कार?
- सम्पादकीय : एक निंदनीय कदम
- औपचारिकता भर नहीं था शीतलाखेत का पर्यावरण दिवस
- ये साल तो बीते…अब अगले पच्चीस साल ?
अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 14
- अंग्रेजी नाटक का पहला मंचन
- खाने-कमाने के लिये रद्द किया तबादला कानून
- वे भुला दिये गये हैं
- इस बार: डॉ. नवीन जुयाल पुरुस्कृत
- शराब इधर शराब उधर
- निर्मल पंडित को क्यों भूले ?
- आशल-कुशल
- ‘अब जनता बनायेगी बिजली’
- उन दिनों वे नाचते-गाते किताबें बेचते थे
- कैसे इतनी जल्दी चले गये !
- बाल सुलभ भोलापन और विराट व्यक्तित्व
- दुदबोलि के महान कवि
- उन्होंने जिन्दगी की पाठशाला में पढ़ा
- एवरेस्ट को साफ किया धर्मशक्तू ने
- चिट्ठी–पत्री: लचर डाक व्यवस्था और पुरानी कविता
- प्राप्ति स्वीकार
- माले का राज्य सम्मेलन
- “अरे यायावर रहेगा याद”
- छोटा मुँह छोटी बात :अंग्रेजों से हमें सीखना चाहिए था मगर….
- सम्पादकीय : यह राजनीति आमूल बदली जाये….
- गैरसैण और बाँधों के बहाने पैर जमा रहे हैं बहुगुणा
- अब कुमाउनी कविता में ‘मास अपील’ कौन लायेगा ?
- खनन : विनाश भी, रोजगार भी
अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 13
- बस सेवा न होने से जीपों की चाँदी
- पर्यटन को तरसता पिथौरागढ़
- नैनीताल में मंटो को याद किया
- यह नैनीताल का सीजन है प्यारे…
- रोडवेज में कमीशनखोरी
- आखिर क्यों नहीं बुझती प्यास ?
- चुपचाप चली गईं ललिता जी
- सरकार का मुँह जोह रही हैं कबूतरी देवी
- पिथौरागढ़ः सोते सूख रहे हैं
- उत्तराखण्ड के सभी शिल्पी निर्विवाद रूप से अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं
- जमीन वापस लेने की जद्दोजहद
- आशल-कुशल :15 मई से 31 मई 2012
- चकबन्दी बहुत जरूरी है
- हैलीकॉप्टर कंपनियों की दादागिरी
- चिणुक: भ्रष्टाचार: कौन है इसका जिम्मेदार
- चिट्ठी पत्री : एकपक्षीय या ऊपरी तौर पर एक सतही आकलन ठीक नहीं
- ‘ये आकाशवाणी का लखनऊ केन्द्र है, अब आप…’
- छोटा मुँह छोटी बात : ‘मित्र पुलिस’ से ‘दाज्यू/बैणी पुलिस’ तक
- सम्पादकीय : आज के तेज और बेचैन जीवन में खुल कर हँसने की उम्मीद
- गैरसैंण में कैबिनेट होने से संभावनाओं के द्वार खुलेंगे
- ये विनाशकारी स्टोन क्रशर !
- कह दो कि सरकार नहीं बिकी
अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 12
- फ्रांस के न्यूक्लियर वॉचडॉग के प्रमुख बरनार्ड बिगो के नाम खुला पत्र
- स्याल्दे का बिखौती मेला
- प्रेम हिंदवान का ढोल आशा जगाता है
- आशल-कुशल–1 मई से 14 मई 2012
- ट्यूबवैल तो तब चलेंगे, जब जमीन के गर्भ में पानी होगा
- डांगी गाँव के बेटे भी अपने न हुए
- पर्यटन की अपार संभावनाओं से भरा है जिला चंपावत
- अब ग्लेशियरों की शामत
- सुधार केन्द्रों की अव्यवस्था का बदसूरत अक्स है डीडीहाट जेल
- ओह! यह मुख्यमंत्री नाटक
- कैसा विकास चाहते हो उत्तराखण्ड ?
- वे एक बार फिर उजड़ेंगे
- चिणुक: भ्रष्टाचार: कौन है इसका जिम्मेदार
- चिट्ठी–पत्री : पर्यावरण-दोहन, सबका तरीका अपना अपना
- छोटा मुँह छोटी बात : क्या उसे भारत रत्न मिलेगा जो….
- सम्पादकीय : क्रिकेट का उभार अर्थात अन्य खेलों का उजड़ना
- परियोजनाओं के समर्थन के बहाने चल रहा है बड़ा खेल
- हस्तलिखित पत्रिका से राष्ट्रीय बाल पत्रिका का सफर
- आश्वासनों से स्थगित हुआ आंदोलन
- मैं इस सरकार से न्याय की उम्मीद नहीं करती
अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 11
- पिथौरागढ़ में गन्दगी
- काष्ठ कला के भटकते यायावर चुनेर
- योजना आयोग की उस दफ्न फाइल को निकालो
- चुपचाप कहाँ खो गया डीना अस्पताल ?
- आशल-कुशल : 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2012
- गाँवों की सेहत का आधार है ग्राम स्वच्छता समितियाँ
- तो अन्ततः सफल हुआ शीतकालीन अभियान
- अराजकता ही अराजकता है कुमाऊँ विश्वविद्यालय में
- तिरुपति से हटा केदारनाथ में शुरु
- बीते जमाने की चीजे हैं जाँदरी-उरख्याली
- बाबा तारकनाथ धाम चैती मेला
- असहाय महिला पुलिसकर्मी
- कहाँ गये उत्तराखण्ड के बुनियादी मुद्दे ?
- शिव दत्त पांडे को सब जानते हैं
- बिखरी लड़ाइयों को समेटने की जरूरत है
- इस बार : विमल नेगी और हयात सिंह रावत पुरुस्कृत
- चिणुक: भ्रष्टाचार: कौन है इसका जिम्मेदार
- चिट्ठी–पत्री : हरीश रावत ऐसा क्या कर देंगे जो वो आज तक नहीं कर सके?
- सम्पादकीय : कच्छा-बंडी बनाने वाले हमें कंगाल बना कर चलते बनें और हम ….
- बड़े बाँध नही, स्थायी विकास चाहिये
- मुजफ्फरनगर – तुमने सब महसूस किया रतन सिंह
- मुजफ्फरनगर- बहुत करीब सरक आये हो तुम
- हमारी स्मृति में मुजफ्फरनगर कांड !
अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 10
- मरणासन्न भाषाओं को बचायें
- मुन्ना भाइयों से मेडिकल कालेज हुआ बीमार
- काफल को लेकर प्रयोग
- मानवता के विकास के लिये वैज्ञानिक मानसिकता जरूरी है
- बहुत बड़ा शून्य छोड़ गया है डॉ. डी. डी. शर्मा का निधन
- आशल-कुशल : 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2012
- इसलिये जरूरी है कि विमान कम्पनी बचे …..
- परेशान जनता को बहला रहा है वन विभाग
- जन संघर्षों से सीधा जुड़ा इस बार का उमेश डोभाल समारोह
- समाचार की होली के पच्चीस साल
- राजनीतिक अस्थिरता के कारण मुद्दे पीछे छूट रहे हैं
- आपदा उनके लिये अय्याशी बनी
- चिट्ठी–पत्री : शराब विरोधी पाठक और मुर्गा-दारु प्रेमी पत्रकार ..
- स्वस्ती श्री: छात्र संघ भवन यानि जुआरियों का अड्डा….
- चिणुक: जीवन का अपना अपना लक्ष्य
- सम्पादकीय : क्यों न सीधे जनरलों को ही खरीद डालें?
- जल विद्युत परियोजनाओं का दंश झेल रही है मंदाकिनी घाटी
- कोप भवन में सरकार
- एक और पुल गया !
अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2012
- शराब को इस नजरिये से भी देखिये
- सम्पूर्ण सांस्कृतिक केन्द्र की जरूरत
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 9
- समस्याओं से घिरा इण्टर कॉलेज दौलाघट
- युवा पत्रकारों ने मनाया महिला दिवस
- हमने उन्हें जासूस समझा था…
- पहाड़ के निष्कलुष, मगर फौलादी बेटे थे विद्यासागर नौटियाल
- मान्यता है कि आपदा से बचाते हैं विश्वकर्मा
- तैयार रहें बढ़ते पयर्टन के लिये
- ऐसे तो नहीं हो पायेगी खाद्य सुरक्षा
- उत्तराखण्ड का सपना फिर ध्वस्त हुआ
- विकल्पहीनता की जीतें हैं ये सब
- दूर की कौड़ी है ‘विकल्प’
- चिणुक : होशियार दीपू की चालाकी
- आमे की डाई मा घुघुती नी बासा
- चिट्ठी–पत्री : राज्य आंदोलनकारी का सर्टिफिकेट,खुदा खैर करे
- सम्पादकीय : जोड़-तोड़ की फितरत और किस्मत
- नैनीताल आपका है, जैसे चाहें रखें…
- खोदा पहाड़ निकले बहुगुणा
- जमीन बेचने को वे हजारों पेड़ काट सकते हैं
अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2012
- स्पार्टाकस थे विद्यासागर नौटियाल
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 8
- ग्रामीण भारत – महाधोखे के जाल में
- आशल-कुशल : 15 फरवरी से 29फरवरी 2012
- चल बसन्त : कवि और बसन्त
- एक माह आठ दिन चलती है थरूवाटी होली
- कुनल्ता की होली का अलग है मिजाज
- शराब ने बिगाड़ा होली का रंग
- सत्तर साल पूर्व दिल्ली की वह होली याद आती है
- होली आते ही मन में चुलमुलाट पड़ जाती है!
- होली अंक के लिए सप्रेम
- पनघट पर छयल चलो बरछी
- सौल कठौल : हमार भगतदाक् स्मृति जी रौ लाख सौ बरीस
- बगरो बसंत है
- …. उड़त गुलाल लाल भये बादल…….
- पद संचालन की दृष्टि से खास है काली कुमाऊँ की होली
- एक विशिष्ठ परम्परा का जन सामान्य में रुपान्तरण
- सुअरों के आतंक से उजड़ रहे हैं गाँव
- चिणुक : परोपकार : एक कविता
- अथ पौड़ी कथा.12
- सम्पादकीय : लट्ठमार ही सही पर बात तो सही है….
- कस होलो उत्तराखंड यानी गिर्दा की याद
- कंकरीट जंगल बना पिथौरागढ़
- या ब्रज देश निगोड़ा
अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 7
- तो मैंने भी एक चुनाव लड़ डाला…
- फौज से नई तकनीक लाते हैं तिरुवा
- आशल-कुशल
- डायरी का भी एक रुतबा था !
- पेड़ काटो, जुर्माना दो, मकान बनाओ
- नव संवतसर का ‘थर्टी फर्स्ट’
- अब देवसारी प्रोजेक्ट से गुस्सा
- यूँही चुपचाप चले गये नवीन नौटियाल
- मुफलिसी उनके लिये जीवन मूल्य बन गई
- भक्त दर्शन को क्यों भूल गये हैं हम ?
- अब शुरू हो गया ‘राइट टू रिजेक्ट’
- लोक गंगा के विशेषांक का विमोचन
- चिणुक : ‘बेटा-बेटी’ में फर्क
- चिट्ठी–पत्री: अखबार और संन्यास लेने की उम्र में शादी की घोषणा…
- स्वस्ती श्री: सपनों का उत्तराखंड और शौचालय
- सम्पादकीय : पोर्न देखना कोई अपराध नहीं है लेकिन……
- न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी
- आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण खतरे की घंटी
- खुदा खैर करे इन चुनावों से
अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2012
- शतायु हुए कर्मठ जी
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 6
- क्या करेंगे डाकघर के कमीशन एजेंट ?
- फार्मसिस्टों को तुगलकी फर्मान
- आशल-कुशल : 1 फरवरी से 14 फरवरी 2012
- मतदान के बाद और भी डरे हैं पौड़ीवासी
- हम भारत के लोग
- चिट्ठी -पत्री
- प्राप्ति स्वीकार : अमेरिका में मेरे दो वर्ष
- विश्व बैंक के अजेंडे में है भष्टाचार के खिलाफ आंदोलन
- पेड न्यूज से पिट रहे हैं प्रत्याशी
- भूतहवेली से कैसे भागा भूत ?
- सम्पादकीय : कांग्रेस किसी भी तरह कम साम्प्रदायिक नहीं है!!
- कथकै उतरैणी
- ई.वी.एम. में बन्द गणतंत्र
- भारत– एक कविता
अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 5
- कहाँ गये विकल्प का वादा करने वाले ?
- आशल-कुशल : 15 जनवरी से 31 जनवरी 2012
- आये चुनाव… गये चुनाव…
- शिक्षा के निजीकरण व बाजारीकरण के खिलाफ एक अभियान
- राजेन्द्र रावत ‘राजू’ की दूसरी पुण्यतिथि सम्पन्न
- पायलट बाबा का अतिक्रमण तोड़ा
- महिला मतदाता निर्णायक होंगी पिथौरागढ़ जनपद में
- पौड़ी जिले पर दोहरी मार
- बंगाली विस्थापितों ने दस्तक दी
- पहाड़ से भाग रहे हैं नेता
- चिणुक : कुछ रेखाचित्र …..
- प्राप्ति स्वीकार :चमकता रहेगा स्वीली घाम
- चाँचरी धमाको के बहाने लोक की चर्चा
- सम्पादकीय : क्रिकेट को बाजार का धर्म बना देने का परिणाम !!
- चुनाव आयोग को उत्तराखण्ड की परवाह नहीं
- यदि आप वोट न देना चाहें
- गङ् नाण
अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2012
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी – 4
- बागेश्वर में बरसा प्रशासन का डंडा
- हमें बधाई तो दीजिये !
- मुआवजे को तरसते लोग
- गिर्दा के बाद: गिर्दा की याद–नैनीताल 2011
- यह कैसा मिशन 2012 है ?
- आशल – कुशल
- उन दिनों हमने एक समानान्तर दुनिया के सपने रचे
- मेरे सारे गुरुओं में सबसे अलग थे….
- अथ पौड़ी कथा.11 , आन्दोलनों की धरती-3
- भगत दा ! मेरे हमदम मेरे दोस्त
- भगत दा का रचना कर्म…
- हमारा मीडिया क्यों जन विरोधी है ?
- वे हमें समर्थ देखना चाहते थे
- चुनाव 2012 में मुस्लिम व दलित
- सल्ट में भू माफिया
- बच्चों का कॉलम : चिणुक : मुझे अंग्रेजी में बात करना गंदा लगता है
- नव वर्ष की शुभकामनायें 2012: कुछ कवितायें
- किताबों के बारे में: ‘नागा कथा ’: हरीशचन्द्र चन्दोला
- चिट्ठी–पत्री :भगतदा का जाना और उत्कृष्ट पत्रकारिता
- स्वस्ती श्री :मनू महारानी की ज्यादतियाँ……
- सम्पादकीय: उत्तराखंड निवासियों के मुँह पर करारा थप्पड़
- खलबली वाला साल रहा 2011
- क्या होगा इन अभ्यर्थियों का
अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2011
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी- 3
- विधायक की तो दुल्हन आई, मगर…..
- गंगा में खनन पर सरकार झुकी
- अनोखी है जौनसार की दीवाली
- वन कानून का एक और शिकार है कपकोट का महाविद्यालय
- आशल–कुशल : 15 से 31 दिसंबर 2011
- भवाली अल्मोड़ा राजमार्ग का विकल्प है कोसी के उस पार सड़क बनाना
- हरिद्वार लिंक के पहिये जाम क्यों ?
- खतरे की जद में गरीबों का सुरक्षा कवच
- बाल कृष्ण को राहत
- हफ्ते भर रही गढ़वाली संस्कृति की धूम
- सम्पादकीय: अन्ना हजारे लैफ्ट-राइट साथ-साथ!
- सचमुच मित्र हो सकती है राजस्व पुलिस
अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011
- एन.जी.ओ. से मुक्त होना चाहते हैं मनरेगाकर्मी
- बच्चों का कॉलम : चिणुक: मुझे सबसे खराब लगता है
- तराई में संगठित अपराध के रूप में उभरता भूमाफिया
- ये बेचारे संविदा शिक्षक
- जमीन की समस्या को और अधिक न उलझायें
- उमेश डोभाल ट्रस्ट ने धरनीधर चन्दोला को याद किया
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी . 2
- निरीह पशुओं के रक्त से लाल होने से बची बूंखाल की धरती
- बस भी करो कि लड़की का नया नाम नहीं है
- आशल–कुशल : 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011
- अब तेज होगी दलित मुद्दों की लड़ाई
- पूंजीवाद के अंत की आहट
- संकोच में आशा कार्यकर्ती
- गोरखा राइफल्स के 125 साल
- बाघ और आदमी की समरसता की कवायद
- बच्चों का कॉलम : चिणुक
- बोल कि लब आजाद हैं तेरे …
- चिट्ठी–पत्री : हर शाख में उल्लू बैठा है। न जाने उत्तराखण्ड का क्या होगा
- सम्पादकीय: कॉपोरेट साम्राज्यवाद के हित सींचोगे तो दुष्चक्र खत्म कैसे होगा ?
- उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारी दूसरा प्रान्तीय अधिवेशन
- कब बनेगा अस्पताल ?
- स्वस्ती श्री : नैनीताल नगर की समस्यायें
- ग्राम प्रहरियों का सरकारी शोषण
- नैनीताल पर रहम करो
- अभी असमंजस में है उत्तराखण्ड क्रांति दल
- कहाँ गया धूमाकोट को आदर्श बनाने का वादा
अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011
- रामप्रसाद घिल्डियाल ‘पहाड़ी’ को याद किया
- कब तक पिटेंगे पत्रकार ?
- सर्दियों से इस तरह जूझें…
- अच्छे प्रशासन का इनाम: 11 साल 21 ट्रांस्फर
- संस्कृति संरक्षण के सामने प्रश्नचिन्ह है मोलूदास की मौत
- दर्शकों तक कैसे पहुँचें ?
- कई यादगार फिल्में देखीं इस बार
- महिलायें ही शराब बनाने लगीं तो कौन बचायेगा पहाड़ को ?
- वे विद्यालय को आनन्दालय बनाना जानते थे
- एक साल हुआ विवेकानंद जी को गये
- कांग्रेस की बुनियाद का पत्थर था वह!
- बच्चों का कॉलम : चिणुक
- पहले घर की भाषा तो बने कुमाउनी !
- कुमाऊँ के भीतर झाँकने की खिड़की
- प्राप्ति स्वीकार : ‘स्मृति विशेष: धर्मसिंह रावत’
- सम्पादकीय : इस राज्य बनने का मतलब ही क्या रहा?
- बागेश्वर: दबंग हुआ प्रशासन
- ये कैसे भाषा मंत्री हैं ?
- स्वयंसेवकों पर निर्भरता महंगी पड़ी गायत्री महाकुम्भ में
- घामतपवे भाबर से साइबर युग में फटक मारता हल्द्वानी–1
अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2011
- आशल–कुशल : 1 नवम्बर से 14 नवम्बर 2011
- निठल्ली दीवाली में खबरों की जुगाली
- बच्चे कितना कुछ जानते हैं
- प्रभावशाली था ‘तुगलक’ का मंचन
- उत्तर प्रदेश की विधायक को ‘पेड न्यूज’ की कीमत चुकानी पड़ी
- स्मृति शेष: केवल कृष्ण ढल, हरिदत्त भट्ट ‘शैलेश’ एवं राधाकृष्ण वैष्णव
- स्वस्ती श्री : हमें सहानूभूति नहीं प्यार चाहिये
- सम्पादकीय : माफिया का खेल और माननीय न्यायालय
- नासमझी में परम्परागत कृषि को नष्ट कर रही है सरकार
- रोजगार का केन्द्र बने टिहरी झील
- सुअर के मांस से तबाही
अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011
- अपनी जड़ों से जुड़ने का माध्यम है कंडाली महोत्सव
- आशल–कुशल : 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011
- फलेन्डा जल विद्युत परियोजना : उच्च न्यायालय ने अपनाया सख्त रुख
- अर्द्धसैनिक बलों के साथ भेदभाव
- देवदार प्रकरण में लिप्त अधिकारियों को बचाने की कोशिश
- भ्रष्टाचार के खिलाफ कनवेंशन
- बाल प्रहरी की कार्यशाला
- सिर्फ नाम जपने के लिये नहीं हैं गांधी
- जमीन जाने के डर से आशंकित हैं किसान
- भूकम्प नहीं, कथित विकास व भ्रष्टाचार विनाशकारी है
- ये वीरान होते पुस्तकालय
- स्मृति शेष : ताउम्र औद्यानिकी के लिये समर्पित रहे उमेश चन्द्र साह
- अतिवृष्टि से निपटने के लिये तैयारी जरूरी
- सम्पादकीय : मीडिया और एन.जी.ओ. देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं!
- नवोदित उत्तराखंड के लिये अच्छा संकेत नहीं रुद्रपुर दंगे
- विधायकों की गुंडागर्दी
- खंडूरी जी पहुँचे ‘ससुराल’
- प्रजनन केन्द्र बना कस्तूरी मृगों का कब्रगाह
- हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भी नहीं मिली स्वतंत्रता सेनानी की विधवा को पेंशन
- पिथौरागढ़: जिला पंचायत अध्यक्ष का उत्पीड़न
- आपदा की त्रासदी झेलने को अभिशप्त हैं अनुसूचित जाति के परिवार
अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011
- कलाकारी रोटी नहीं देती
- चम्बा एक दिन चमन बनेगा . 2
- नैनीताल में स्वच्छता का ताजा हाल
- इस बार …: सच्चिदानन्द भारती सम्मानित
- आशल–कुशल : 1 अक्टूबर से 14 अक्तूबर 2011
- घोटाले ही घोटाले
- ऐसे क्रान्तिकारी होते थे शिक्षक
- मायने हैं पौड़ी की खामोशी के
- चलो खंडूरी मुस्कराये तो…
- खतरे में है ढोल वादन की परम्परा
- बेनाप भूमि के मसले को सिर्फ सरकार पर न छोड़ा जाये
- माफिया भी हैं बेनाप की ताक में
- चिट्ठी-पत्री : गिरदा की बरसी का अंक, आपदाओं की बरसी का अंक
- हाशिये पर डाल दिये जाने से नाराज हैं किसान
- संपादकीय : उन्हें तो विश्व-बैंक ने वित्त मंत्री बनवाया!
- भू कानून की मौत
- क्यों बना यह निगोड़ा उत्तराखण्ड ?
- किताबों के बारे में :‘यात्रायें : जीवन यात्रायें’
अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011
- चम्बा एक दिन चमन बनेगा . 1
- कुमाऊँ का खतड़ु़वा दरअसल गाय का त्यौहार है
- रुसी गाँव की सब्जी को विवाद से बचायेगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
- अब नहीं रहेंगे बी.पी.एल.
- आशल–कुशल 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011
- खंडूरी क्या भा.ज.पा. को जिता पाएँगे?
- सिस्टम का मारा संजय बेचारा
- सुमगढ़ आपदा की बरसी पर छलका जिलाधिकारी का दर्द
- मुक्तेश्वर की यादगार भूमिका है पशु प्लेग के उन्मूलन में
- पीताम्बर डेवरानी की याद
- पशुओं की मंडी जैसा हो गया पौड़ी
- कोई कायदा कानून नहीं तबादलों में
- सम्पादकीय: देखें खंडूरी जी माफियाओं से कैसे निपटते हैं
- पापी तस्करों का अड्डा बन गया है जागेश्वर तीर्थ
- समाधान के बदले समस्या बने नये जिले
- कन्नू उस्ताद नहीं रहे
- तो लौट आये खंडूरी !
अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011
- प्रशान्त राही का जज्बा अभी बरकरार है
- पशु-पक्षियों को आपदाओं का सहज नैसर्गिक पूर्वाभास होता है
- पहली बरसी पर गिरदा को याद किया
- कब बनेगा कोसी का तटबंध
- बकवास है पुनर्वास नीति
- गढ़वाली लोकगीत : सतपुली की त्रासदी
- परियोजना, विस्थापन और पुनर्वास
- लोकतारिणी गंगा इस साल खतरे का कारण बनी है
- रोल गाँव में फूटते धारों का आतंक
- भूस्खलन का एक कुख्यात प्रतीक बन गया है सिरोबगड़
- माफियाओं की लाइफलाईन गौला ने बिन्दुखत्ता को टापू बना दिया है
- आपदा का शो पीस बन गया है यमुना घाटी का कफनौल गाँव
- अधूरी योजनायें और दावाग्नि भी आपदायें पैदा करती हैं
- आशल-कुशल : 15 अगस्त से 14 सितंबर,2011
- अभी बदहाल हैं सीमान्त की सड़कें
- पहाड़ी लोगों का जीवट और जज्बा कारगर है
- इस एक साल में और चौड़े हो गये हैं रौखड़
- ‘‘सख्त चट्टानों पर ही बनें मकान’’
- निष्प्रभावी है आपदा प्रबंधन तंत्र
- उत्तराखण्ड में बाढ़ एवं भूस्खलन: कुछ प्रमुख घटनाएँ
- पहाड़ों की संवेदनशीलता को समझें
- सरकार कहती है कि उसे जरूरत से कम धनराशि मिली
- धरातलीय सच्चाइयों और मानवीय जरूरतों के संतुलन से बनानी होंगी योजनायें
- कोई समग्र दृष्टि नहीं है राहत और पुनर्वास के पीछे
- मौजूदा राजनीति में बदलाव लाये बगैर रुक नहीं सकती आपदायें
- राजभवन की आपदा अबोध जानवरों पर टूटी
- ग्रामीणों ने लीसा पकड़ा
- मूल निवास पर दब गई सरकार
- अथ पौड़ी कथा.10 आन्दोलनों की धरती-2
- उक्रांद का वार्षिक अधिवेशन …
- चिट्ठी पत्री: बीना सजवाण कैसी जनप्रतिनिधि हैं?
- सम्पादकीय : अभी सम्भावनायें जीवित हैं….
- स्वस्ती श्री: बड़े भाई निशंक जी, दिल दुखने का अर्थ तो समझते ही होंगे….!!
- चांडाल चौकड़ी
- हमारा कॉलम : आँसू पोंछने की अनिच्छा और हिस्सा खा जाने की अमानवीयता
अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011
- श्रावण में जागेश्वर धाम
- एक अड्डे का पलायन
- अजी वाह ! क्या बात तुम्हारी……
- पिथौरागढ़ में अभियन्ताओं के लाले पड़े़
- अब वे काले वन कानूनों को बदलना चाहते हैं
- छांगुज में लहराया तिरंगा
- हल का विकल्प खोजें
- जस की तस बनी हुई हैं केदारनाथ धाम की मुख्य समस्यायें
- किसानों की तबाही जारी है
- यात्रा: आन्दोलनों का एकजुट होना जरूरी है–2
- आशल-कुशल : 1 अगस्त से 14 अगस्त,2011
- जी हाँ…..मैं नाचता हूँ
- सम्पादकीय : काँवड़ यात्रा,नैतिकता और विषैली विचारधारा
- बाँध के लिये वन कानून आड़े़ नहीं आते
- क्या उसके दिन बहुरेंगें ?
- फूलन को रस ले भँवरा…
- दस रुपये रोज पर आशा वर्कर!
अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011
- ‘‘गाँव के स्तर पर संस्कृतिकर्मियों का एक नेटवर्क बनना चाहिये’’
- अथ पौड़ी गाथा-9 : आन्दोलनों की धरती है पौड़ी
- लगातार बढ़ती जा रही हैं महिलाओं पर अत्याचार की घटनायें
- दर्जाधारियों के लिए पिकनिक तथा अधिकारियों के लिए मुँह छिपाने का सबब बनीं चौपालें
- आलस्य से उद्यमिता की ओर बढ़ें…
- क्या हम चीन से सीखेंगे?
- जन यात्रा: उत्तराखण्ड से हो सकती है वैकल्पिक विकास के प्रयोग की शुरूआत
- तो हम ज़हर खा रहे हैं !
- मंडलसेरा के वृक्ष प्रेमी मलड़ा समाज के लिए बने मॉडल
- …अब लीसा फैक्ट्री से दुश्चिन्ता
- आशल-कुशल : 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011
- दो पैसे कमाने का जुगाड़ कर सकता है लिलियम
- श्रीविधि कृषि पद्धति: खेती के लिए वरदान
- रंग ला रही है कापड़ी की मुहिम
- सिमतोला इको पार्क: ‘यहाँ अपने पदचिन्हों के अलावा कुछ मत छोडि़ये’
- क्षुद्र राजनीति में उलझ गया मेडिकल कॉलेज
- क्या महज आस्था के कारण यह देवभूमि है ?
- ऐसा पर्यटन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है
- एक बहस ने उन्हें जनूनी बना दिया…
- एकता बिष्ट अल्मोड़ा पहुँची
- घनश्याम ढौंडियाल: अभी भी ऐसे शिक्षक होते हैं
- किताबों के बारे में :’चिट्ठी’ , ‘अजूबे’
- वैश्वीकरण के दौर में थियेटर की प्रासंगिकता
- चिट्ठी पत्री : ऐसी विशेषतायें बिरले लोगों में ही होती हैं
- सम्पादकीय : न्यायालय और स्वस्थ लोकतंत्र
- ग्लोबल वार्मिंग
- हरेले की चिट्ठी बागेश्वर से …..
अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011
- उनके साथ रह कर मेरी समझदारी बहुत बढी़
- ‘‘मेरी काव्य यात्रा में ये सारे संदर्भ आपको साफ दिखायी दे सकते हैं"
- बाबा नागार्जुन महादेवी पीठ और लेखकों का जमावड़ा
- देहरादून में प्रवासी उत्तराखंडी संस्थाओं के महापंचायत
- नंद कुमार उप्रेती की फाम
- अनशन की सीमायें
- आशल-कुशल–1 जुलाई से 15 जुलाई 2011
- कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल ! -2
- देखें इन अंत्योदय यात्राओं का क्या हस्र होता है….
- चिट्ठ्ठी पत्री :भ्रष्टाचार,नगर निगम और ब्रज मोहन शर्मा
- पौड़ी में जनपक्षीय नाटकों की धूम
- सम्पादकीय : जनता बेवकूफ ना बने तो क्या करे….
- जो समझ रहे थे तुम मार दिए गए
- बहुतु कठिन है डगर पनघट की…
अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2011
- जैंता एक दिन तो आलो
- देखते ही बनता है फुटबाल प्रतियोगिता के लिये अधिकारियों का उत्साह
- विराट व्यक्तित्व के धनी गिर्दा
- तिलाड़ी कांड आज भी यमुना घाटी को प्रेरणा देता है
- बिनसर में हुआ इको टूरिज्म मैप का लोकार्पण
- सीमान्त में क्या मिला ?
- वाह जनगणना !
- जरूरत तो है नगर निगमों की
- टी.एच.डी.सी. ने ग्रामीणों से धोखाधड़ी की
- आशल-कुशल: 15 जून से 30जून 2011
- लोकप्रिय हो रहा है कॉर्बेट फॉल
- सैर सपाटे का काम करती सांसदों की राजभाषा समिति
- ये समस्यायें सुनने वाले
- ‘गिर्दा कहता है……’
- कहाँ-कहाँ से चले आते हैं नैनीताल !
- गुरु जी….इस रास्ते पर सावधानी से चलें
- सम्पादकीय: बुद्धिजीवियों का निकम्मापन
- चिट्ठी पत्री : यह आपकी प्रतिष्ठा के अनुरुप नहीं..
- नहीं महामहिम…..हमें नहीं भाया…
- खत्तेवासियों की भी सुनो
अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2011
- जनता के मंचों पर गिरदा की याद बरबस आती रहेगी
- जहाँ आप हैं वहाँ एक दिन मैं भी आऊँगा और पूछूँगा आपसे…
- एक प्रवासी हिन्दीप्रेमी का अमृत महोत्सव
- कौन खरीद पायेगा इतनी महंगी दवाओं को ?
- भाजपा क्यों परेशान है आन्दोलन से ?
- अज्ञान और गलतफहमियों में फँसा है वनाधिकार कानून
- प्रदेश को मिले दो नगर निगम
- एक गोष्ठी हिमालय पर
- अथ पौड़ी गाथा-8
- आशल-कुशल : 1जून से 14 जून तक
- आखिरी फैसला तो कॉरपोरेट करते हैं, सरकार नहीं
- भ्रष्टाचार तो तरक्की का रास्ता है हजारे जी !
- मायावती का शंखनाद
- कोटद्वार: दोहरे हत्याकांड के अनसुलझे सवाल
- एक किताब बदलाव के लिये
- मंच पर ‘रोमियो जूलियट’
- चिट्ठी पत्री : क्या यह एकतरफा कोर्ट मार्शल है…?
- पहाड़ की भूमि पर तो और भी ललचायी नजरें हैं
- क्यों चूके कोई आई.ए.एस. ?
- ऑटो हड़ताल और हल्द्वानी में भबर्योल
अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011
- पौड़ी में किया गया रचनाकर्म (ख)
- अल्मोड़ा: पानी को लेकर भेदभाव
- किसे मालूम था कि यह उनका अंतिम सफर होगा ?
- सदियों तक वे हमारे मार्गदर्शक बने रहेंगे
- कभी बाघ आदमी पर, कभी आदमी बाघ पर
- आशल-कुशल
- प्रकृति का दिया अमूल्य फास्ट फूड हैं फल
- असंगठित मजदूरों को जोड़ने की कवायद
- हिमालय के चरित्र के अनुरूप बनें योजनायें
- इस जनगणना ने कुछ जरूरी सवाल पैदा किये हैं
- जिसने विज्ञान को जनता का ककहरा बनाया है
- युगमंच का ‘कोर्टमार्शल’
- ‘दावानल’ से उठी ‘आमा’ की वेदना
- लोक भाषाओं को लेकर गहराती चिन्ता
- क्यों बंद हुई चीनी भाषा की शिक्षा
- चिट्ठी पत्री : हमारा इतिहास कितना सच है!!
- सम्पादकीय : सैनिक ताकत से आतंकवाद खत्म नहीं होता….
- सुनहरा कुछ भी नहीं है इस बजट में
- कहीं नहीं है लहू का सुराग
अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2011
- उनके ब्रह्मास्त्रों की तो आज ज्यादा जरूरत है
- उनके परिवार को लेकर यह चुप्पी क्यों ?
- गोविन्द वन्य जीव विहार तस्करों के निशाने पर
- मनियारस्यूँ के निवासियों का धैर्य चुक गया है
- एंगलिंग यानी मछली मारने का खेल
- शराब के खिलाफ महिलायें
- मुख्यमंत्री की घोषणायें बेअसर
- मनरेगा और पंचायतों की समस्यायें छायी रही महिला समाख्या में
- कैसे जलेंगे पहाड़ में चूल्हे
- कटुता नहीं रहती राजीनामा से मुकदमा निपटाने पर
- प्राप्ति स्वीकार
- बाबाओं पर वश नहीं गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान का
- स्वस्ती श्री : सहयोगात्मक रवैया अपनायें
- सम्पादकीय : कॉरपोरेट साम्राज्यवाद और भ्रष्टाचार
- इन फैसलों से उम्मीदें बढ़ रही हैं
- जे.सी.बी. ने ले लीं 5 जानें
- आओ जंगल-जंगल खेलें
अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2011
- इतने चिन्तित थे वे अपने साथियों के लिये !
- गिर्दा संस्कृति के हथियार से लड़ने वाले योद्धा थे
- लोक गीतों के सुर साधती उखड़ती साँसें
- अबला नहीं रही चम्पा
- अथ पौड़ी कथा- 6 : पौड़ी में रची पुस्तकें (क)
- मानसून में कई रूप दिखते हैं हिमालय के…
- चारधाम यात्रा की तैयारी शुरू
- सड़कों की सर्वे में धांधली
- खस्ताहाल सड़कें और चार धाम यात्रा
- भगत सिंह और पाश की याद में
- अल्मोड़ा: बदहाल प्राथमिक शिक्षा
- नहीं रहा रहने लायक नैनीताल शहर
- स्याही देवी में भी सक्रिय हैं बाघ
- नहीं बन पा रहा आई.टी.आई. भवन
- पर्यावरण मंत्रालय चुप क्यों है ?
- प्राप्ति स्वीकार
- नववर्ष पर सम्पन्न हुआ ‘परम्परा’ का समारोह
- सम्पादकीय: अन्ना हजारे, एक आशा की किरण….
- स्वस्ती श्री : शैलेश मटियानी जी को जानना आवश्यक…..
- जानवरों और मनुष्यों के बीच समरसता जरूरी है
- अण्णा हजारे को सलाम…लेकिन माजरा क्या है ?
अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2011
- तुम्हें न भूल पायेंगे
- पौणा के हुड़के और गिरदा
- जरूरत है उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने की
- उपेक्षित योजनाएं और भ्रष्टाचार
- तहसील की मांग को लेकर देघाटवासी मुखर
- उमेश डोभाल स्मृति समारोह : वैकल्पिक मीडिया व व्यवस्था परिवर्तन के लिये जुटने का आह्वान
- शराब से ही निकल रही कारिंदों की तनख्वाह
- कॉमरेड बहादुर धपोला को लाल सलाम !… जय जगत
- नाट्य प्रस्तुतियों से दी निर्मल को श्रद्धांजली
- स्वस्ती श्री: परिसीमन, वन्य जीवन और अवैध शराब
- नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ : एक कविता
- सम्पादकीय : क्या विधायक कॉरपोरेट के लिये बेहद उपयोगी हैं?
- बाँधों के सुनामी मुखाने में है उत्तराखंड
- अल्मोड़ा आये उप राष्ट्रपति
- कसूरवार कौन ? आदमी या वन्य जीव…
अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011
- सादगी उनका एक मिजाज था
- उमेश डोभाल..राजू रावत..गिर्दा का अक्स जीवित है हममे, हर एक में
- अथ पौड़ी कथा – 5: अब वो होली कहाँ
- बरस दीवाली बरसे फाग, जो नर जीवे खेले आज
- बरसे फाग
- एक होली हमारी ओर से
- तब की जैसी होली अब कहाँ…
- मेरी स्मृति में ताजा है सतराली की होली
- बसन्त आ गया है
- शराब के प्रचलन ने पहुँचाया होली परम्परा को आघात
- पिथौरागढ़ में बैठकी होली की परम्परा
- फरसौली: बुजुर्गों के साथ ही चली गई होली की रंगत
- राज्य बनने के बाद हुए पलायन से फीका पड़ा होली का रंग
- कुमाउनी होली की शान है महिला होली
- बगरो बसन्त : जातीय होली और कवितायें
- आपत काल बिरस भयो फागुन… …उचित होय सो की जै
- सौल कठौल : हुक्काराम और बजट
- होली के गीत, कवितायें
- चुनावी विकास का शिकार: गंगोलीहाट
- दूसरी पुण्यतिथि: याद आए कॉ. नारायणदत्त सुन्दरियाल
- संघर्षरत हैं उर्गम घाटी के ग्रामीण
- चिठ्ठी पत्री: कुमाऊँ-गढ़वाल के दिलों को जोड़कर रख दिया है
- संपादकीय : राजनीति के रंग!!
- नौकरशाही की अदूरदर्शिता से घूमता उत्तराखण्ड का पहिया
- खाद्यान्न: पहले वितरण व्यवस्था तो ठीक हो जाए
- मनरेगा की जनसुनवाई
अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2011
- आपकी वैचारिक चेतना हमेशा साथ रहेगी
- वे उत्तराखण्ड के सवालों से शिद्दत से जुड़े थे
- रामनगर में जीवंत हुई पहाड़ की लोकसंस्कृति
- पौड़ी: पात्र व्यक्तियों को नहीं मिलता योजनाओं का लाभ
- ‘भृकुटी’ के बहाने जानें अपने अतीत को
- जरूरत है पर्वतीय कृषि को बचाने हेतु कड़े कानून व ठोस नियोजन की
- अथ पौड़ी कथा-4: लेखन की प्रेरणा रहे जो पत्र
- पलायन के सवाल को केन्द्र में लाने की कोशिश
- कौन लेगा डिजिटल्स कर्मियों की सुध
- सम्पादकीय : जनता सचेत रहे…
- तो ऐसे हो रहा है घायल उत्तराखण्ड का इलाज
- अस्तित्व के लिये संघर्षरत जनता होगी लाभान्वित उच्च न्यायालय के फैसले से
अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011
- ‘यार चन्दन’ से शुरू होती थीं उनकी भावभीनी चिठ्ठियाँ
- कवि और साहित्यकार ही नहीं, वे प्रयोगधर्मी कलाकार भी थे
- अथ पौड़ी कथा – 3: रचनाकारों की भी धरती है पौड़ी
- चिट्ठी पत्री : भाषा, बोली या आंचलिक भाषा?
- सम्पादकीय : क्या यह चुनाव की तैयारी है?
- अलविदा बीबीसी… उँगलियाँ तो फिर भी तलाशेंगी तुझे
- मंदाकिनी घाटी में आग
- राजनीति के चश्मे से न देखें परियोजनाओं को
- ‘हम महान भारत के ऋणी हैं’
- बाँके लाल कंसल: एक शताब्दी तक फैला इतिहास
- खत्तेवासियों के नारों से गूँजा हल्द्वानी का आकाश
- ‘मानवीय मुक्ति का औजार हैं शिक्षा एवं संस्कृति’
- स्थानान्तरण नीति भ्रष्टाचार की मूल है
- फैज जन्म शताब्दी: फैज बरास्ता गिरदा…
- बापू ये शहर छोड़कर कहीं मत जाना
- उत्तराखण्ड की एक और प्रतिभा पद्मश्री से सम्मानित
- अतिक्रमण से बढ़ रही हैं दुर्घटनाएँ
- रेडियो का मतलब ही बीबीसी है
- बस लिंगानुपात में अव्वल है हिमालय
- कृषि क्षेत्र का विस्तार जरूरी है
- शिवरात्रि यानी चित्तवृत्ति का निरोध
- ‘लहरों के राजहंस’ का मंचन
अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011
- मैंने तो ओवरएज हो जाने के बाद गिर्दा को जाना
- बसंत पंचमी: सरस्वती, रति और कामदेव पूजन का पर्व
- सावधान ! दरक रही है रिश्तों की दीवार
- हमें तो गणतंत्र की परिभाषा भी नहीं मालूम
- बात बुनियादी उठी
- किसी और माँ को यह दर्द न मिले
- स्थानान्तरण: फिक्स रेट, बाजुओं में दम…..मौजा ही मौजा
- अथ पौड़ी कथा – 2: शिक्षा का केन्द्र भी न रहा अब
- यूकेडी की जगह लेने की जद्दोजहद
- एक भूले – बिसरे स्वतंत्रता सेनानी की याद
- निधन
- नहीं बदली महिला के प्रति समाज की सोच
- बागेश्वर: पुलिस की वर्दी ही क्यों होती है दागदार
- इस पलायन को तो रोको !
- चिट्ठी पत्री : थोड़ा अध्ययन कर लें ताकि पद की गरिमा पर आँच न आये
- स्वस्ती-श्री : शिक्षा प्रेरकों को नहीं मिला वेतन मानदेय
- सम्पादकीय : मीडिया आंख में धूल झौंकने का औजार है
- विराटता दिखी उत्तरायणी मेले में
- हमारे गणतंत्र की महानता ?
- सैफ विंटर गेम्स, बदइंतजामियाँ और पांगती का हश्र
अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011
- जाने नहीं देंगी उन्हें जनमानस में रची बसी उनकी यादें
- श्रद्धांजली : गिर्दा पर कवितायें
- एक लोकपर्व की त्रासदी
- देहरादून का कलिंगा स्मारक
- आजीविका का जरिया बन रहा है पिरूल
- क्या खायें लोग ?
- पहली बरसी पर राजू की याद
- पर्यावरणीय संकट का संकेत है गिद्धों का इस तरह मरना
- सिमट रही है गंगा की धारा
- परम्परागत फसलों को बचायें
- अथ पौड़ी कथा: 1
- तो ऐसी रही बागेश्वर जनपद की विकास यात्रा
- अब रामगंगा जिले की मांग को लेकर उद्वेलित हैं लोग
- चेतना आंदोलन का महिला सम्मेलन
- थर्टी फर्स्ट के बाद
- मकर संक्रान्ति (घुघुती)
- चिट्ठी पत्री : ऐसे गाली तो मत दीजिये….
- सम्पादकीय : सही निर्णय,तरीका गलत
- इस तरह छाया अखबारों में हमारा प्रदेश
- बागस्यरौक गीत
- इस तरह बीते उत्तराखण्ड के दस साल
- खतरनाक विकिरण के साये में उत्तराखंड
अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2011
- वे सिखाते ही नहीं, सीखते भी थे
- तब तो तुम जमीन तैयार कर रहे थे
- लोक रंगमंच पर तो और काम कर सकते थे गिर्दा
- बच्चों को अनदेखा किया तो क्या होगा गणतंत्र का?
- छिः उत्तराखण्ड के नाम पर सेक्स परोस रही है यह पत्रिका
- अल्मोड़ा की ब्लैक-बोर्ड गाथा
- अश्लील एमएमएस अब बागेश्वर में
- बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित ग्रामीणों तथा प्रशासन में वार्ता शुरू
- ‘जनगणना में कुमाउनी को मातृभाषा लिखें’
- राज्य गठन के बाद और पिछड़ गया है पौड़ी
- उक्रांद में घात-प्रतिघात
- पहाड़ के अन्तवर्ती क्षेत्र में एक नया वैज्ञानिक केन्द्र
- गुस्से में हैं कार्बेट पार्क से लगे इलाकों के ग्रामीण
- चिट्ठी-पत्री : संस्कृत मृत भाषा है !?
- स्वस्ती श्री : लगाओ ठहाके थर्टी फर्स्ट में
- सम्पादकीय: गरीबों से सहानुभूति रखना ही जुर्म है इस देश में
- अस्कोट अभयारण्य: मनुष्य को जानवर से हेय समझने की वही पुरानी दास्तान
- इस बिखराव से निखर भी सकता है उत्तराखण्ड क्रांति दल
- आइये कुछ बदलाव की उम्मीद करें 2011 में
अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010
- वे मानवीय संवेदना के महाकाव्य थे…
- ‘दिल का वह कोना उसने मुझसे भी छुपा कर रखा’
- खेल खेल में सीखो विज्ञान
- के.पी. अंकल नहीं रहे
- वन संरक्षण अधिनियम से बाधित पहाड़ की सड़कें
- जरा सोचिये ! कोई क्यों नहीं रहना चाहता पहाड़ में
- विकास की विडम्बना का प्रतीक है कुनल्ता
- जनता के दमन के खिलाफ एक आवाज
- कहाँ खो रही हैं लड़कियाँ ?
- जन संसद का तीन दिवसीय अधिवेशन
- उत्तराखंड के घटते जल संसाधनों को बचाना होगा
- राहत के खिलाफ जनाक्रोश
- चाय की खेती की असीम संभावनायें हैं उत्तराखंड में
- राहत की चुनौतियाँ
- नैनीताल को बचाना होगा
- सवालों से घिरी परियोजनायें
- प्रभावितों के हित में है सर्वोच्च न्यायालय का फैसला
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनें रज्जू मार्ग
- आत्मा के भीतरी कमरे के चार कोने
- सम्पादकीय : क्या ऐसा उत्तराखंड जरूरी है ?
- बर्फ ज्यादा पड़ गयी तो…
- खड़क सिंह को आपदा प्रभावित नहीं मानता प्रशासन
- तो बिक ही गया भवाली सैनेटोरियम
- निज भाषा उन्नति अहै , सब उन्नति को मूल
अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2010
- लोगों पर विश्वास करो…जनता सबसे बड़ी ताकत है
- अभी बहुत दूर तक साथ चलेंगे…गिरदा
- बच्चे कितना कुछ जानते हैं
- जल-विद्युत योजनाओं से हानि
- पर्वतीय पत्रकार एशोसिएशन का तृतीय अधिवेशन
- सेवा योजन कार्यालय में ठगी
- लैंसडाउन पर भू-माफियाओं की नजर
- ये कैसी राजधानी है ?
- आपदा प्रभावितों की व्यथा सुन स्तब्ध रह गई मैं !
- सम्पन्न हुए ‘पहाड़’ के रजत जयंती समारोह
- मेला बंद करने से क्या रुकेगी पशु तस्करी
- नहीं सुलझी महिमा हत्याकांड की गुत्थी
- ऋण वसूली से आतंकित चंदन ने की आत्महत्या
- किताबों के बारे में : उत्तराखण्ड की लोक कलाएं एवं शिल्प कौशल
- ‘निशंक’ बाबू पर सवार ‘ओबामा’ का भूत
- चिट्ठी-पत्री : गिर्दा अंक भाव-विभोर कर गया
- सम्पादकीय : राजनीति और रुपया
- सरहदी मंदिर में स्त्रियों की पूजा
- शराब और राजनीति का अखाड़ा बनता जौलजीवी मेला
- सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों का भी हुआ नैतिक पतन
अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010
- एक दूसरे के पूरक थे ‘जागर’ और गिरदा
- केवल कुमाउनी कवि के रूप में देखना गिरदा को छोटा करना है
- छायाचित्रों और फिल्मों से सजा रहा नैनीताल
- वर्ष दस, सवाल हजार, निराकरण कुछ भी नहीं
- नॉन बी.एड. अध्यापकों से नाइंसाफी क्यों ?
- जलवायु परिवर्तन और आपदा
- सीमान्त क्षेत्रों में विकास के लिये संवेदनशीलता जरूरी है
- ‘कल चुण्डी चखुली’
- चिट्ठ्ठी-पत्री : गिर्दा के बारे में कुछ तथ्य सुधार लें
- किताबों के बारे में
- सम्पादकीय : मडु फोकियौल त् आफी देखियौल
- अभी भी हम चीन की विस्तारवादी मंशा से सावधान नहीं हैं
- इस आपदा ने विकास की असलियत बतायी
- राजनीति का मतलब जलूस दर जलूस
अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2010
- हर रह गुज़र में था साथ वो
- ‘हमने युवा पीढ़ी को क्या दिया’
- नगाड़े खामोश हैं और हुड़का भी……
- जमींदोज हो सकता है कफनौल
- नैनीताल में ‘मैकबेथ’ का मंचन
- लेखकों की गोष्ठी सम्पन्न
- युवाओं ने जीवित रखा गैरसैंण का मुद्दा
- वह प्यारा इंसान हिंसक कैसे हो सकता था ?
- अपनी सहृदयता से तादात्म्य स्थापित करते थे भैया जी
- बदरीनाथ राजमार्ग अभी भी अवरुद्ध
- सम्पादकीय : राजनीति का घिनौना चेहरा
- दैवी आपदा
- हाँ, दस साल हो गये हैं राज्य बने
- अफसोस कि सरकार भूमाफियाओं के साथ खड़ी है
अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010
- गिर्दा व होली
- पंडित देवराम नौटियाल को नमन
- अतिवृष्टि से चौखुटिया-मासी में भी हुई व्यापक तबाही
- गीत एवं नाटक प्रभाग में देखा उनका समर्पण
- कैसे बचायें खेती को जंगली सुअरों की बर्बादी से ?
- हिमालयी सीमान्त पर विदेशियों की खुफिया नजरें
- कलेक्ट्रेट: इस विरासत के भस्मीभूत होने के पीछे क्या था ?
- सोमेश्वर क्षेत्र में भी हुई तबाही
- सुमगढ़ से हमने क्या सीखा ?
- आपदा मंच के प्रस्ताव
- सड़क के मलबे ने लील लिया रमोला गाँव
- इस बार ! : दिनेश कर्नाटक का सम्मान
- अभी बची हुई हैं आस्थायें
- अंग्रेजी राज के दिन याद आ गये
- आपदा और राजधानी
- आपदायें रोक लेती हैं विकास का पहिया
- गिरदा की स्मृति में विचार गोष्ठी
- चिट्ठी–पत्री : बबीता अकेली नहीं होगी…
- विदर्भ और बुन्देलखंड की राह पर उत्तराखंड के किसान
- सम्पादकीय : उत्तराखंड में हुई तबाही का पूरा अनुमान है ??
- राजनीति का अमानवीय चेहरा
- कोसी की कहानी
- इसके बावजूद जिन्दगी आगे बढ़ रही है
- खिराज़ – ए – अकीदत
- गिरदा हमारे वजूद, हमारी पहचान में मौजूद हैं…
अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2010
- रुद्रप्रयाग: अब शादियाँ भी कैसे होंगी ?
- अतिवृष्टि से खाने के भी लाले पड़े सीमान्त में
- चप्पे-चप्पे पर मौजूद हैं तबाही के निशान
- अल्मोड़ा़ त्रासदी: बचाई जा सकती थीं कुछ जानें
- चिट्ठ्ठी–पत्री : गिर्दा अंक अब तक का सर्वश्रेष्ठ
- सम्पादकीय : धैर्य, सहनशीलता और सूझ-बूझ दिखायें
- मेरे बच्चे सोये चार : गिर्दा
- चलिये, अब सोच-समझ कर आगे बढें
- अति वृष्टि के बाद हुए नुकसान की आंशिक सर्वेक्षण रिपोर्ट
- टी.एच.डी.सी. की लापरवाही से कई गाँव जलमग्न
- यमनुा घाटी में भी बरपा वर्षा का कहर
- बारिश से घायल अल्मोड़ा की कहानी
- गिरदा, तुम्हारे समय को सलाम
अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2010
- नगाड़े खामोश हैं…: गिर्दा
- झोले वाले बड़े पापा
- मरीज हो तो ऐसा ! : डा. जी. पी. साह
- पप्पू को सलाम : गिर्दा
- इस बार : गिर्दा
- तसव्वुरात की परछाइयाँ…..: गिर्दा
- लेकिन क्या हम ऐसे ही भूल जायेंगे? : गिर्दा
- अरे ऽ, इतनी असहिष्णुता, ऐसा ओछापन !! : गिर्दा
- सलाम वालेकम: केशव अनुरागी नहीं रहे : गिर्दा
- गिरदा को कविता के आँखर
- जुदाई उसकी है जिसका करे जमाना अफसोस…
- एक मलाल दिल में रह गया कि …..
- अपनी बात को निर्भीकता के साथ प्रस्तुत करते थे
- एक बड़ी ज़िम्मेदारी गिरदा हम पर छोड़ गए हैं : रुपिन
- तुम हर एक उत्तराखण्डी के दिल में हो : गीता गैरोला
- वे सवाल हमेशा के लिये अनुत्तरित रह गये : विनीता यशस्वी
- उनकी बात ही अनोखी थी : अमीनुर्रहमान
- गिर्दा की कुछ कविताऐं
- धोखेबाज तिवाड़ी जी !!
- खुद को बटोरे बिना ही चल दिये, गुरू!
- एक है गिरदा
- ‘उत्तरायण को आवाज दे गया वह’
- सार्वजनिक श्रद्धांजलियाँ
- उनकी श्रद्धा और स्नेह का स्मरण आते ही आँखें भर आती हैं: चारु चन्द्र पाण्डे
- वह दरवाज़ा अब बंद हो चुका है : देवेन्द्र नैनवाल
- होली और रामलीला में वह जरूर याद आयेंगे : के.के.साह
- उनके गीतों को सुनके धौ नहीं होती : कमल नेगी
- वे बात-बहस से शब्द चुनते थे
- श्रद्धान्जलियाँ : वे अलबलाट में हमसे बिछड़ गये
- गिर्दा आखिर क्या था ?
- ऋतुपर्व है खतड़ुवा
- इस बार : महेश चंद्र पुनेठा सम्मानित
- खनन के पट्टों का गोलमाल उजागर हुआ
- सम्पादकीय : ठेकदारों के आसपास घूमती राजनीति
- सीरियल हत्याओं से सहमे लोग
अंक: 01 || 15 अगस्त से 31 अगस्त 2010
- बादल फटने से नहीं दफन हुए 18 बच्चे
- हमारा कॉलम : आखिर गिरदा रोज-रोज तो पैदा नहीं होते।
- आजादी के मायने
- सम्पादकीय : अहिंसक प्रतिरोधों की अनदेखी की जायेगी तो माओवाद पनपेगा
- अलविदा प्रताप भय्या
- श्रद्धांजली
- शीघ्र स्वास्थ्य लाभ करें कबूतरी
- गिर्दा के लिये मरदूद का मातम
- भविष्य के लिये चेतावनी है यह त्रासदी
- मास्साब
- बिखरे हुए आन्दोलनों को एकजुट करने के लिये जन संसद
- औली में शीतकालीन खेल होंगे भी कि नहीं ?
- पी.यू.सी.एल. का पुनर्गठन
- श्रीदेव सुमन की पुण्य स्मृति
- 15 अगस्त का असली जज़्बा
- त्रासदी और मौजमस्ती
अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010
- नन्दाखाट चोटी फतह कर लौटे पर्वतारोहियों की चिन्ता वाजिब है
- मुम्बई का हिल स्टेशन ‘माथेरान’ और नैनीताल
- स्वतंत्रता आन्दोलन से जुड़ा रहा भीमताल का हरेला मेला
- जयदीप लघु उद्योग
- अपनी माटी से ताउम्र जुड़े रहे उमेशदा
- याद रहेंगे पत्तीदास
- अपना राज है….सब चलेगा !
- श्रीनगर के लिये अभिशाप बन कर आई है जल विद्युत परियोजना
- उत्तराखंड पुलिस दबा रही है ‘ऑनर किलिंग’ का मामला
- दुआ करें कि नियम-कानूनों की अवहेलना के बावजूद बच जाये नैनीताल
- बस दुर्घटना ने खोली आपदा प्रबंधन की कलई
- लैंसडाउन ने बाबा नागार्जुन को याद किया
- भारी बजट के बावजूद प्यासे हैं गाँव
- उत्तराखंड के लिये जरूरी है चकबन्दी
- जल विद्युत परियोजनाओं से त्रस्त किसान
- एक प्रखर व प्रतिभाशाली पत्रकार के जीवन की अतिंम यात्रा
- हेम पाण्डे: सच के लिए मरने का उसे अफसोस नहीं हुआ होगा
- खेती-बाड़ी से जुड़ा है हरेला त्यौहार
- पूरन चन्द्र चन्दोला का गिरजा हर्बल फार्म
- हरेले की वैज्ञानिकता ढूंढने का प्रयास
- सम्पादकीय:पीछे छूट गये हरेला और काले कौआ….!!
- पानी के दिन
- हरेले के तिनड़े के साथ बधाई
अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2010
- क्यों बेपरवाह है सरकार साहित्य और संस्कृति के विकास को लेकर ?
- ईको टूरिज्म का मतलब व्यापार नहीं होता
- सच्ची… मैंने इस बार कुच्छ नहीं कहा…
- किताबों के बारे में: डूबती टिहरी के समय का दस्तावेज हैं त्रेपन की कहानियाँ
- चिट्ठी-पत्री : जनता जागरूक बने और सक्रिय सहभागिता निभाये
- दुदबोलि- 2008: एक महत्वपूर्ण संकलन
- यह शिक्षा व्यवस्था तो होनहारों का जीवन लीलने लगी
- बाबा हम तुम्हें बहुत याद करते हैं
- आशल-कुशल : 1 जुलाई से 14 जुलाई 2010
- मनुष्य के पक्ष में खड़ा होना ही जनपक्षधरता है
- मनरेगा लौटायेगा खेतों की हरियाली ?
- सल्ट (अल्मोड़ा): पुलिस के पहरे में बँट रहा है पानी
- जल्दबाजी से होता है ट्रेफिक जाम
- ‘चिपको’ की याद ताजा हुई
- खबरें जो अनछपी रह गईं
- पेट्रोल पंप न सही हुजूर, हैंडपंप ही दिलवा दो !
- गौरा देवी विकास मेला सम्पन्न
- पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन हो
- बच्चों का खेल नहीं बाल मजदूरी खत्म करना
- कंचन की मानिन्द निखर कर आये प्रकाश पंत
- मसूरी: सार्थक रही राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी
- रहस्य व रोमांच से भरी है थुलिंगमठ से कैलास मानसरोवर व्यापार यात्रा
- ‘मूर्तता-अमूर्तता के द्वन्द्व से हर कलाकार गुजरता है’
अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010
- बेमतलब का बोझ बनकर रह गये हैं ये जाँच आयोग
- खैरलिंग मेला: पशुबलि से खलबली
- बदरीनाथ यात्रा में श्रद्धालुओं का उबाल
- सम्पादकीय : ‘फर्स्ट एमंग ईक्वल्स’ निशंक का उपलब्धि विहीन पहला साल
- स्वस्ती – श्री : सड़क निर्माण पहाड़ की तलहटी से ही किया जाये।
- जलते वनों के प्रति उपेक्षा और हमारा भविष्य
- पर्वतीय कृषि: भूमि की उत्पादकता का कैसे हो अधिक सदुपयोग
- क्या हमारे रणनीतिकार बिहार से सबक लेंगे ?
- विकास कार्यों में आ रही अड़चनें तो दूर करनी ही होंगी
- गौंड धूर फिर जागा ?
- कॉर्बेट पार्क विस्थापितों को नहीं मिल रहा वाजिब हक
- शासनादेश की अनदेखी कर तस्करों के हवाले कीड़ाजड़ी
- अद्भुत है बिशनदा के संघर्ष की दास्ताँ
- निशंक सरकार गैरसैंण में बनायेगी सचिवालय ?
- मेरा जीवन तेरे लिये, जीवन की खुशियाँ तेरे लिये
- महिलाएं एवं मीडिया विषय पर एक सार्थक गोष्ठी
- पर्यावरण का तर्पण
- खजूरी बीट में बीते बचपन के वे दिन – 2
- अरे, ‘देश-सेवा’ के इनके जुनून को थामो !
अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010
- पहाड़ का कूड़ा गंगा में
- कितनी निरापद होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा
- 18 साल तक खुले आम रहा आतंकी
- सूदखोरों के खिलाफ एक अभियान
- श्रीनगर मेडिकल कॉलेज का भविष्य अधर में
- सम्पादकीय: पहाड़ को पहाड़ जैसा ही बना रहना चाहिये
- चिट्ठ्ठी – पत्री : कहीं कुछ टूट गया है
- रवाँई से उत्तराखण्ड: एक रोचक यात्रा वृतान्त
- निर्मल पाण्डे की स्मृति में: ‘अंधा युग’ जारी है …
- संघर्ष वाहिनी का चिंतन शिविर
- सरकार कुछ भी कहे, हकीकत और भविष्य कचरे में है !
- विधायक निधि से खरीदे गये भांडे बर्तन
- आशल-कुशल : 1 जून से 14 जून 2010
- योग गुरू बाबा रामदेव रोडवेज की बस में!
- शिक्षा का बाजारीकरण
- होटल गाइड़ों से सीखें !
- बाँध ने देवता भी विस्थापित किये
- पुरातत्व का खजाना है काली कुमाऊँ
- साझा मंच से हल होंगी समस्याएं
- जंगल बचाओ, पानी बचाओ
- कुमाऊँ का लोक नृत्य: छोलिया
- बाल लेखन कार्यशाला: समझ विकसित कर रची कहानियाँ
- खजूरी बीट में बीते बचपन के वे दिन – 1
- पहाड़ की खेती बचाने को चिंतन
अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2010
- युद्धं देहि……..उन्होंने कहा था
- मुख्यमंत्री यहाँ की समस्या पर नहीं बोले
- राजाजी राष्ट्रीय पार्क: विदेशियों के आगे क्यों लाचार थी सरकार
- सम्पादकीय: अब ऐसी ही है राजनीति
- चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक जी आग लगना कुदरती घटना नहीं है
- आग नहीं बुझाता वन विभाग?
- जैविक खेती पर महत्वपूर्ण पुस्तकें
- वन संरक्षण की नीतियों में जनहित को नहीं दी जाती तरजीह
- आशल-कुशल : 15 मई से 31 मई 2010
- खाद्यान्न घोटाले में एफआईआर
- पलायन से सूनी हुई बुजुर्गों की चौपाल
- विवादों में घिरा इंटर कॉलेज कार्कीनगर
- टिहरी के पुरोधा थे सत्यप्रसाद रतूड़ी
- कुप्रबन्धन का मॉडल बन रहा है उत्तराखंड
- चन्द्रकला तिवारी की रिहाई
- कोई ग्रामीणों को विकास की परिभाषा तो समझाये
- पहाड़ को समझने की एक कारगर कोशिश
- मोहन जोशी हाजिर हो !
अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2010
- फिर बोतल से बाहर आया कंडी रोड का जिन्न
- क्या अब जोशीमठ बच जायेगा ?
- पाटी: प्रशासन की बेवफाई से सदमे में हैं शराब के खिलाफ लड़ती महिलायें
- चिट्ठ्ठी – पत्री: संपादक नैनीताल समाचार के नाम खुला खत
- सम्पादकीय: आई.पी.एल. यानि पैसे का खेल
- कमबख्त यों ही चला गया
- आखिरी साँसें गिन रही है गांधी पुलिस
- सब सूचनायें एक साथ उपलब्ध होंगी ‘हिसालू डॉट कॉम’ से
- अक्ल पर पड़े ताले
- चम्पावत में बिजली गुल होने की दास्तान
- पलायन तो होगा ही !पलायन तो होगा ही !
- दैनिक अखबारों के क्षेत्रीय संस्करणों को मुद्दे दिखाई ही नहीं देते
- कौन चिन्तित है सोर घाटी को लेकर
- पुल के टैक्स के नाम पर की जा रही है लूट
- क्या इस आधे-अधूरे सोच से उत्तराखंड का विकास सम्भव है ?
- वों कि बोर्यों माँ सब्जी हमारी बोरी मा रेतु छा
- ऐसे बनती हैं नावें नैनीताल की !
अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010
- आइये ठंडे दिमाग से इस हिंसा का जवाब ढूँढें
- पौड़ी: करोड़ों बहाकर भी न बुझी प्यास
- प्रमोद जोशी: मुख्य धारा का तैराक
- सम्पादकीय : क्या ऐसे बचेंगे जंगल!!
- चिट्ठ्ठी – पत्री : दक्षिण एशिया ही है, जिसे पुरुषों ने अपना मूत्रालय बना रखा है
- पुरुषों के कुकृत्य में महिला भागीदारी से उठते सवाल
- अल्मोड़ा…लाजवाब !
- कपकोट: किसने हजम किया राशन ?
- दावानल के आगे बेबस प्रशासन
- क्या हो पायेगी निष्पक्ष जाँच शेरवुड प्रकरण की
- चिंता का सबब है घटता भूजल
- इस तरह भटकती है पत्रकारिता !
- अभ्यारण्य आग नहीं बचाते
- ‘लोक’ का अद्भुद खजाना
- क्या कर रहा है सौर ऊर्जा विभाग ?
- आशल-कुशल : 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2010
- लोक सूचना अधिकारी को अर्थदंड
- खंडहर में चल रहा इंटर कॉलेज
- होली के हुड़दंग से हिमालय की शांत वादियों में – 2
अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2010
- वे नहीं चाहते तराई में साम्प्रदायिक सद्भाव
- नाक के नीचे से पेड़ गायब
- इस तरह बीस साल बाद पौड़ी कहाँ होगा ?
- सम्पादकीय : आर्थिक पैकेज, सब मौसेरे भाई
- चिट्ठ्ठी – पत्री : पूरे पहाड़ के कण-कण से परिचय
- स्वस्ती – श्री : नरेगा किसके लिये??
- केदार सिंह कुंजवाल: एक कर्मयोगी को समझने की कोशिश
- वनाधिकार कानून लागू करवाने के लिए जरुरत है एकजुट संघर्ष की
- महिला अदालत: न वकील न जज, न्याय फटाफट
- श्मशानवाणी का यह खड़खड़ी केन्द्र है…….
- आपदा राहत कोष की बंदरबाँट
- इस बार ज्यादा भागीदारी भरा रहा उमेश डोभाल समारोह
- गुजरात में देश भर की भाषाओं का संगम
- ब्रिटिश गुलामी का यादगार: राष्ट्रमंडल खेल
- होली के हुड़दंग से हिमालय की शांत वादियों में
अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010
- राष्ट्रीय रोजगार गारण्टी योजना के नाम पर किया जा रहा है ग्रामीणों का उपहास
- तय है अल्मोड़ा नगरपालिका का दिवाला निकलना
- पंचेश्वर बाँध: झेलनी ही होगी एक और बड़े विस्थापन की त्रासदी
- सम्पादकीय : विधानसभा में अराजकता
- चिट्ठी पत्री : शम्भू जी की वल्गर तरंग
- एक सांस्कृतिक कैसेट
- बच्चों की लेखन कार्यशाला’ का आयोजन
- कब शामिल होंगी गढ़वाली-कुमाउनी भाषा आठवीं अनुसूची में
- उमेश डोभाल की याद में
- आबकारी विभाग गंगोलीहाट में क्यों बिकवाना चाहता है शराब ?
- आशल – कुशल 15 मार्च से 31 मार्च 2010
- क्या महिलाओं को पूर्ण अधिकार दिला पाएगा ‘महिला आरक्षण विल’ ?
- क्यों नहीं बनी जलवायु परिवर्तन से निपटने की नीति
अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010
- कटाल्डी खनन प्रकरण: खनन माफियाओं के साथ न्यायपालिका से भी संघर्ष
- भष्टाचार की भेंट चढी़ विष्णगाड़ जल विद्युत परियोजना
- नैनीताल को बचाने के लिये जबर्दस्त संकल्प की जरूरत है
- उत्तराखंड में माओवाद या माओवाद का भूत ? !!
- अपने मजे का मजा ठैरा दाज्यू
- नदियों को सुरंगों में डालकर उत्तराखण्ड को सूखा प्रदेश बनाने की तैयारी
- नियम विरुद्ध करवाए गए सरमोली-जैंती वन पंचायत चुनाव
- दुःखद है ऐसे प्रकृतिप्रेमियों का जाना
- निर्मल पांडे: कहाँ से आया कहाँ गया वो
- शराब माफिया व प्रशासन के खिलाफ उग्र आन्दोलन की तैयारी
- क्यों बढ़ रहा है मनुष्य व जंगली जानवरों के बीच संघर्ष ?
- स्पष्ट दिशा के अभाव में बद्तर होते राज्य के हालात
- ‘कैंपेन फार ज्यूडिशियल एकांउटेबिलिटी एण्ड रिफार्म्स’ का तीसरा राष्ट्रीय अधिवेशन
- नहीं भुलाया जा सकता चन्द्रसिंह शाही का योगदान
- ‘‘तब के आई.सी.एस. साइकिल पर जाते थे या फिर इक्के पर’’
अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010
- पद्यात्मक होली
- संपादकीय: कैसे बने समाज ज्यादा सहनशील?
- होली का सामाजिक पक्ष
- काहे से खेलूँ सजनी होली ?
- इस तरह मनाई जाती है नंधौर घाटी में होली
- बगरो बसंत है : घायल वसन्त और होली
- सौल कठौल: सतरंगी छलड़ी कैका घर
- यो वसन्त हो कैका घर जाये ?
- भज भक्तन के हितकारी, सिरी कृष्ण मुरारी
- पकौड़ी की कौन सोचे ?
- वाह फागुन की हवायें…… होली है !
- संघर्षों की जले मशाल
- छटा अद्भुत बन आई, शंभू ने आज होली मचाई
अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010
- हम इस गणतंत्र के काबिल नहीं
- चलो, पता तो करें, हम कहाँ जा रहे हैं
- महात्मा, माओवाद और मोदी
- चिट्ठी-पत्री : निष्पक्ष पत्रकारिता का पर्याय नैनीताल समाचार
- जन आन्दोलनों पर माओवाद का ठप्पा लगाने का प्रयास
- किसानों के हक की बात नहीं कहती नई कृषि नीति
- आस्था छोड़ मौजमस्ती का हुआ उत्तरैणी मेला
- जोशीमठ: सुरंग निर्माण में फूटे स्रोत से खतरे में जनजीवन
- बिजली परियोजना में धांधली के विरोध में मुनस्यारी में न्याय रैली
- बागेश्वर में लगातार हो रही हत्याओं पर उबली जनता
- बिनसर वन्य जीव विहार: जंगली जानवरों से त्रस्त जनता का क्रंदन
- पृथ्वी हारी, मल्टीनेशनल जीते
- पौड़ी की दु:खती रग है – इसकी उपेक्षा
- संघर्षों की जले मशाल
अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010
- वह उत्तरायणी अब कहाँ… ?
- लूटो-खसोटो, उत्तराखंड है ही इसलिये
- अब शिक्षक चल पड़े हैं शिक्षा की मशाल जलाने
- कैसे-कैसे मील के पत्थर….
- सरकारी वकीलों की लापरवाही से रेता-बजरी का संकट
- जयदत्त वैला: वे ताउम्र गांधीवादी मूल्यों से जुड़े रहे
- डोल का बंगला तो नमूना है पहाड़ में अफसरों की ऐयाशियों का
- अब पंतनगर विश्वविद्यालय की शामत
- मनोज पाल की याद
- आशल-कुशल : 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010
- कछुआ चाल से चल रही है नरेगा
- अल्मोड़ा के बच्चे चिन्तित हैं शहर के हालातों से…
- कमांडेट नवानी को याद किया
अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010
- नये वर्ष की शुभकामनाओं सहित नया अंक
- वर्ष 2009 ? ……मगर उम्मीद पर तो दुनिया जीती है !
- अब पंचेश्वर को लेकर सरगर्मी
- साल का एहतेराम
- हम तुम्हें हमेशा याद रखेंगे राजू!
- शरदोत्सव समिति की उपेक्षा के बावजूद रंगकर्मियों ने क्षमता दिखलाई
- किताबों के बारे में
- विकास कार्यों के बदले मेले-उत्सवों से बहलाने की कोशिश
- आतंक के बीच वह साहस तो अद्भुत था…. ‘
- अलविदा! राजू भाई, अलविदा!
- आशल-कुशल – 1 जनवरी से 14 जनवरी 2010
- शिक्षा के लिये पलायन कर रहे हैं लोग
- नदी अभियान की समीक्षा
- पापा पास होते तो डिक्शनरी की जरूरत नहीं पड़ती थी
- समाज को जीवन्त बनाने के लिये वे धीमी लौ जलाते रहे
- राजेन्द्र रावत ‘राजू’
- हिन्दुस्तान के मीडिया की इनसाईड स्टोरी
- थोड़े शब्दों में बड़ी बात कहने का हुनर …
- उनके साथ रह कर मैंने धैर्य और सहिष्णुता का मतलब जाना
- दगड्या, दगडू नि रैणो सदानी
- छ्वी बथ
- पहली बरसी पर सखा सत्यम को श्रद्धांजलि
अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009
- चमोली जिले में एक राजमार्ग ही गायब हुआ !
- सत्ता से बाहर यानी जनता से प्रेम
- सड़क न होने से बूढ़ाकेदार से कट रहे हैं तीर्थ यात्री
- वाह हल्द्वानी !……. जमीन भी हिन्दू और मुसलमान होने लगी अब ?
- चिट्ठी पत्री : पूर्व निर्धारित मानसिकता के आधार पर सिर्फ खुन्दक न निकालें !!
- स्वस्ती श्री: बाजार से दवाई खरीदना हर किसी के बस की बात तो नहीं
- ब्रजेन्द्र लाल साह के रचना संसार का परिचय
- ‘‘वन्य जीवों के व्यवहार के बारे में तो पढ़ाया जाना चाहिये’’
- वैंकी को नोबेल पुरस्कार तो मिल गया, मगर….
- पहाड़ पर साफ दिखाई दे रहा है जलवायु का बदलना
- आरक्षण से वंचित अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लोग
- छायाकार बृजमोहन जोशी को प्लैटिनम ग्रेडिंग
- ताउम्र आन्दोलनों की नींव के पत्थर बने रहे राजा बाबू
- एक कर्मनिष्ठ और अनुशासित विद्वान थे प्रो. अग्रवाल
- वे हमें साधनों का सदुपयोग सिखा गये
- आशल-कुशल : 15 से 31 दिसंबर 2009
- ‘बाल प्रहरी’ ने किया आयोजन
- अस्पताल सिर्फ रेफर करने के लिये है
- …..मौत तो एक दिन आनी ही है !
अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2009
- वाह हल्द्वानी ! …. जिस डाल पर बैठे हैं, उसी को काट रहे हैं लोग
- कितना कारगर होगा यह बीमा ?
- ये तमाम गैर सरकारी संस्थायें कर क्या रही हैं ?
- किताबों के बारे में
- भविष्य के लिये आशा जगाती रचनाकारत्रयी
- तेरहवीं पुण्यतिथि पर गोपाल बाबू गोस्वामी की याद
- उल्टा पड़ गया हे.न.बहुगुणा विश्वविद्यालय को केन्द्रीय बनाने का दाँव
- पहाड़ की चिन्ता उन्हें महानगर से वापस खींच लाई !
- नैनीताल समाचार के वे अभिभावक थे
- आशल-कुशल – 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2009
- भूल सुधार: क्या पहाड़ के सिपाही के जीवन का मूल्य कम होता है ?
- खेती किसानी की लूट का असली चेहरा
- वीरान पड़ा है प्रदेश का पहला ईको पर्यटन केन्द्र
- निशंक से कितने सशंक हैं पिथौरागढ़ के लोग ?
- इलीनोर ओस्ट्राम के साथ हिमालय की पारम्परिक व्यवस्थायें सम्मानित हुईं
अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009
- नया अंक 15 नवंबर से 30 नवंबर 2009
- नौ साल बीते, नहीं मिली राजधानी
- गैरसैंण में एक बार फिर गूँजे नारे
- हेम चन्द्र शर्मा बहुत दुःखी हैं….
- बहुत सी नजरें टिकी हैं चंडाक की खूबसूरत जमीन पर
- 2010 ‘नदियों को मुक्त करो वर्ष’ होगा
- हिन्दी पत्रकारिता के शलाका पुरुष को नमन !
- कम्पोजिंग के जादूगर थे आनन्द मास्साब
- आशल-कुशल 15 नवम्बर से 30 नवम्बर 2009
- कर्मठ और व्यवहारकुशल सामाजिक कार्यकर्ता हैं पूरन सिंह रावत
- ठेकेदार राजनेताओं और एन.जी.ओ. ने मिल कर छीन लिया सारा प्रतिरोध
- वन अधिनियम की जटिलताओं को समझे बगैर संभव नहीं विकास कर पाना
- नैनीताल में पहली बार एक फिल्म समारोह सम्पन्न हुआ
- सिर्फ जुआरियों का जमघट नहीं है लधौनधूरा का मेला
- मसूरी में वृद्धजनों की पहल
- क्या गिद्ध अब लौटेंगे ?
अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009
- नया अंक : 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009
- यह किस अंधेरी गुफा में जा रही है उत्तराखंड की राजनीति ?
- जनता की सहभागिता से चले पर्यटन
- उन्होंने कहा उन्हें ऐसा विकास नहीं चाहिये, उन्हें मिली जेल
- चिठ्ठी पत्री: बाकी ईश्वर मालिक है इस देश का
- ‘सरकारी उपेक्षा के बावजूद पनप रही है लोक संस्कृति’
- एक औरत
- सीमान्त क्षेत्र में एक संवेदनशील फौजी मददगार
- चम्पावत और अल्मोड़ा में ‘पहाड़’
- बच्चे कितना कुछ जानते हैं
- विषमता के पर्वत
- आशल-कुशल : 01 नवंबर से 14 नवंबर 2009
- मुहब्बत के गुनहगारो ! कुछ तो शर्म करो
- तो चलिये, सतोपंथ एक्सप्रेस को हिमालय तक पहुँचायें
अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009
- नया अंक : 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009
- कब पूरा होगा रेल का सपना – भाग 1
- शिक्षा का राजनीतिकरण बंद हो
- पर्यटन प्रदेश में तीर्थयात्रियों की लूट-खसोट
- अपनों ने ही भुला दिया देवी दत्त शर्मा को
- जन्मदिन पर याद किया धर्म सिंह रावत को
- कला का उद्देश्य उत्कृष्ट सृजन व बेहतर समाज का निर्माण है
- एक और एनकाउंटर: सोये रंगकर्मियों को जगाने की कोशिश
- आशल-कुशल – 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2009
- ये कैसी श्रद्धांजलि!
- यह कैसा गांव भूमि हस्तांतरण
- दोषी है चयन प्रक्रिया व स्थानान्तरण नीति
- लोहाघाट: बदहाल और लापरवाह आपदा तंत्र
- अलविदा: महावीर प्रसाद गैरोला
- जन्म शताब्दि पर लौह पुरुष पंडित देवराम नौटियाल को श्रद्धांजलि!
- अस्पताल छूटा पर मरीज नहीं छूटे रहमान जी के
- चिठ्ठी पत्री : शिक्षा व्यक्तित्व के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है
- जयन्ती के अवसर पर तलाश, महात्मा गांधी की
- चर्च की भूमि बिल्डर को देने की तैयारी
- बद्रीनाथ: मास्टर प्लान के जरिये होगी तीर्थ नगरी सुव्यवस्थित
अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009
- नया अंक : 01 से 14 अक्टूबर 2009
- कस्तूरी मृगों का अस्तित्व खतरे में
- आशल-कुशल 01 से 15 अक्टूबर
- स्वाइन फ्लू तो वैश्वीकरण का उपहार है
- बिल्डर के खिलाफ जंग
- सरकारी आदेशों के बावजूद रुक नहीं पा रहा विद्युत परियोजनाओं का काम
- स्वच्छता दिवस 2009: बहुत कठिन है मानसिकता बदलना
- एक लीसा फैक्ट्री भी नहीं चल पा रही गढ़वाल मंडल विकास निगम से
- ट्रेल पास अभियान: संकल्प के सामने बौनी हुई विकलांगता
- राजनीतिक गुंडों से भयभीत है दुर्बलों को पीटने वाली मित्र पुलिस
- सम्पादकाचार्य की याद में शोध ग्रन्थ
- चिठ्ठी पत्री : बीच की सीट पर मुझे बैठने देगा तो आधा संतरा दूँगा।
- तन से कीमती है घास का तिनका
- यह एक नये किस्म का पलायन है
- चीनी घुसपैठ को लेकर सनसनी फैला रहा है मीडिया
अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009
- नया अंक : 15 से 30 सितम्बर 2009
- श्रीनगर परियोजना तो मनमानी से चल रही है
- अब वैसा नहीं रहा है गंगा का मायका
- कहाँ गईं चिड़ियायें ?
- ‘पीन’ अप गर्ल उर्फ उत्तराखंड की नायिका कथा
- उद्योग के नाम पर भवन कब्जाया
- मसूरी को लेकर सदैव बेचैन रहे पँवार जी
- उन्होंने सीमान्त में शिक्षा की ज्योति जलाई
- ‘मेरे चित्रों में अनुशासन नहीं, कबीर जैसी अराजकता है’
- आशल-कुशल – अगस्त-सितंबर 2009
- इस बार उद्वेलित रही केदार घाटी
- आठ साल से मुआवजे की राह देख रहे हैं आपदा पीड़ित
- श्रावण मास में भी पशुबलि होती है नन्दा ठोंगी मन्दिर में
- कुमौड़ की हिलजात्रा
- इन बिल्डरों पर किसी का बस नहीं
- अब प्रवास में भी बनी एक पार्टी
- गैरसैंण को लेकर सरगर्मी तेज
- किताबों के बारे में: वह अविस्मरणीय देश
- चिठ्ठी पत्री: मैन ‘निशंक’ कै ‘त्रिशंक’ पढ़ौ
- कुम्भ मेला आ रहा है, गंगा साफ सुथरी तो रहे
- तराई में खूनी जंग के आसार
- सौ दिन में जाँच नहीं हो सकती है इस सरकार की
अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009
- गनीमत है मैं आठवीं जमात से आगे नहीं गया….
- उच्च शिक्षा यानी ‘वन नाईट फाईट’
- महासू के मन्दिर में घटी घटना शर्मनाक है
- बहुत समय लगेगा उच्च शिक्षा को पटरी में लाने के लिये
- आँकड़ों के आइने में उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा
- गंगा
- एक शिक्षक की डायरी
- क्यों पढ़ाई में पिछड़ रही हैं उत्तराखंड की बेटियाँ
- शिक्षा का रास्ता पेट से होकर जाता है
- कितना अच्छा होता
- यह पूरी व्यवस्था ही डर पर आधारित है
- यह शिक्षा दो तरह की दुनिया का निर्माण कर रही है
- जरा सोचें, हम स्कूलों को सृजनशीलता की कब्रगाह तो नहीं बना रहे हैं
- शिक्षा तो खुशहाल समाज बनाने का जरिया है
- शिक्षकों के सम्मेलन में शिक्षा की बात नहीं हुई
- एडुसैट यानी शेखचिल्ली का सपना
- आई.आई.एम. मामले में नाकारा रही सरकार
- स्वच्छता को लेकर जन-जागरूकता पैदा कर रहा है ‘मैत्री’ संगठन
- दीप जोशी को समझने के लिये विकास के क्रम को समझना होगा
- अलविदा गौतम दा !
- कथा – व्यथा: सौंग – शामा
- रियासत मुक्ति आन्दोलन से राज्य आन्दोलन तक का सफर
- ए गमे दिल क्या करूँ
- बागेश्वरवालो: बहुत बढ़िया मौका चूक गये रे तुम !
- दमन का दुष्चक्र और मणिपुर की मौन त्रासदी
- आशल कुशल अगस्त-सितंबर 2009
- क्या ऐसे दुग्ध क्रांति होगी ?
- जनता की सक्रियता रंग ला रही है
- वे उत्तराखंड में मिलना चाहते हैं
- स्मृति से मिट नहीं पायेंगे ला, पनेलिया और झेकला के दृश्य
- पुलिस की बर्बरता और अक्षमता का नतीजा है कालाढूँगी कांड
- चिट्ठी पत्री: बुढ़ाती ऊर्जावान पीढी और ना गछाया हुआ हरेला
- किस रास्ते पर चल रही है हमारी शिक्षा ?
- शिक्षक! मेरे बच्चे को लूट की तरकीब मत बताना
- बत्तीस वर्ष पूरे, शिक्षा अंक और समाचार की वैब साइट
अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009
- ये परियोजनायें तो महज पैसा कमाने के लिये हैं
- क्या अब भी नहीं मिलेंगी परिसम्पत्तियाँ
- तालिबानी उत्तराखंड के भीतर तक घुस आये हैं
- ‘विरासत’ के बहाने हबीब तनवीर को श्रद्धांजलि
- नारायण राम दास: कठिन संघर्ष के 63 साल
- अमर सिंह जैसे अन्वेषकों की आज भी जरूरत है
- स्वतंत्रता सेनानी भवानी दत्त जोशी: जिन्हें हम भूल गये
- ये खेल तो जोशीमठ की तबाही का कारण बन रहे हैं
- वह ‘देवत्व’ तो अब दिखाई नहीं दे रहा है देवभूमि में
- जलवायु परिवर्तन की मार उच्च हिमालयी इलाकों पर भी पड़ रही है
- 2010 के कुम्भ मेले के लिये तैयार हो रहा है हरिद्वार
- साइबर अपराधों का गढ़ बन रहा है उत्तराखंड
- बारिश के बगैर भी पहाड़ों का रड़ना-बगना शुरू
- अब मिल पायेगा पीने के लिये पानी
- घराटों को लेकर खींचतान
- चिठ्ठी पत्री
- स्वस्ती श्री
अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 मार्च 2009
- पैसे दो, खबरें लो
- ‘उत्तराखंड खबर सार’ ने पूरे किये दस साल
- भू माफियाओं को अब नहीं सहेंगे पहाड़ के लोग
- खबरदार! ठुलीगाड़ का पानी मत पीना
- इस बार ‘इक्वाइन इनफ्लूइंजा’ ने कहर बरपा किया घोड़ों-खच्चरों पर
- सरकारी धन की बर्बादी का नायाब नमूना है रामनगर का ट्रांसपोर्ट नगर
- हरेले के तिनड़े के साथ जी रया जाग रया
- उसे ले गए
- शिक्षा के पहरुए भी हो सकते हैं बच्चे
- वन ग्रामवासी अब संगठित हो रहे हैं
- रॉयल राइफल्स के फौजी हमजोली
- मेरा गाँव, मेरे लोग. समापन किस्त
- लो साहब गुजर गये शादियों के भी दिन !
- कॉर्बेट पार्क में एक अभिनव प्रयोग
- अब तो पानी के बारे में सोचना ही पड़ेगा
अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009
- होली बागेश्वर की
- लोक और शास्त्र का अद्भुत समन्वय है होली
- होली..कैसी..कैसी..ऐसी…वैसी….
- संविधान के नये प्रारूप की उद्देशिका
- जी रौं लाख सौ बरीस!
- सीमान्त क्षेत्र में चोरों की मौज है
- धीरे चलूँ घर सास बुरी है…धमकि चलूँ ?
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 21
- थरूवाटी होली
- हाँ..हाँ रे आन्दोलनकारी….. क्यों गई तेरी मति मारी
- एक बाघ उ.प्र. में !
- बच्चों की कार्यशाला…. अरे कान्हा बजै गयो बाँसुरिया
- वसंत : कुछ कवितायें
- रामनगर में वसंतोत्सव सम्पन्न
- अब राग रंग को तबाह करने वाली सत्यानाशी शराब के खिलाफ ग्रामीण
- बाबू बन कर रह गये हैं प्राइमरी अध्यापक
- आज को बसन्त सूचना व लोक सम्पर्क विभाग का घर
- इस बार : गिर्दा
- तेरे बिरज में शूक बहुत हैं…. मुटियाय रहे रसिया
- होलियारविहीन वोट का स्वांग
- समाचार पत्रों का विराट रूप : महावीर प्रसाद द्विवेदी
- चाय की चुस्कियाँ : यशपाल
- चिपको पर बहस
- चैतलकोट का भू-स्खलन-ताजा स्थिति
- लाठियों के सहारे दमन
- नैनीताल से सटे गांवों में भी पड़ी है सूखे की मार
- देशभक्त रामदेव को राष्ट्रध्वज के सम्मान का ख्याल नहीं
- कमीशन खाने खिलाने के लिये है हरियाली परियोजना!
- जमीन को लेकर शुरु हो सकती है खून की होली
- स्मृति शेष: पद्मादत्त पंत
- अब ठोस एक्शन प्लान पर हो नदी बचाओ अभियान
- पौड़ी की होलियों की जान थे दयासागर धस्माना
- होली दमित भावनाओं का रेचन है.. मगर संस्कृति की ठेकेदारी ?
अंक: 08 || 01 दिसम्बर से 14 दिसम्बर 2008
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 16
- कौसानी में जुटे देश भर के साहित्यकार
- हैवानियत और बेशर्मी की मिशाल है प्रीति हत्याकांड
- बच्चे कितना कुछ जानते हैं
- फौज ने ही बेच डाली सरहदी भूमि !
- लोकतंत्र के लिये चुनौती
- प्राग फार्म के पट्टे निरस्त कर उद्योगपतियों को देने की तैयारी तो नही
- नहीं रहे नारायण चन्द्र भारती !
- अनशन खत्म, अब जायेंगे देहरादून
- साहसिक पर्यटन संस्थाओं पर केस कर बचना चाह रहा है प्रशासन
- मनिया के साथ मुनस्यारी – 2
- होण्डा पावर प्रोडक्ट्स: पलायन के खिलाफ मजदूर संघर्ष की राह पर
- राष्ट्रीय शोक: राजनीति ने गड़बड़ाया देश का मोराल
- क्या होगा स्थानीय लोगों का
अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008
- डामा खातीर
- ‘बलिया’ नाम जलधार
- ‘नदियों ने मनुष्य की चेतना और सभ्यता को इस मुकाम तक पहुँचाया’
- सेवाग्राम घोषणा व शपथ
- पुरातत्व विभाग की लापरवाही से नष्ट हो रहा है शिव का त्रिशूल
- क्या यह पत्रकारिता है ?
- अभिव्यक्ति की आजादी का मखौल बन गया है
- स्मृतिशेष: कव्वाली गाते हुए गये अब्दुल वजीर (पच्चू)
- क्या संदेश देने जा रहे हैं पंचायत चुनाव ?
- गढ़वाल के यातायात के इतिहास का एक शानदार अध्याय
- चमोली में रोजगार गारंटी योजना भी भ्रष्टाचार में समा गई है
- नदी-अंक की कवितायें
- …सिर्फ उनकी नजरों के लिये जिन्हें नैनीताल समाचार की परवाह है
- नदी अंक के साथ 32 वें वर्ष में प्रवेश
- भैजी चरौनी भैंसी……भौजि बणिगो सभापति
- डी.डी.पंत की विरासत और उक्रांद : चिट्ठी पत्री
- स्वस्ती श्री : बनाओ अपनी अपनी बिजली
- हरा समंदर गोपीचंदर बोल मेरी मछली कितना पानी…..
- निशंक के कदम अब मुख्यमंत्री की कुर्सी की ओर
- तोड़फोड़ से सकते में हैं कुमाऊँ वि.वि. के अध्यापक और कर्मचारी
- यह दिग्भ्रमित छात्र राजनीति खतरनाक है भविष्य के लिये
- एक अभियान मैकतोली पर
- गलत निर्माण से भी होती हैं दुर्घटनायें
- इस बार तबाही लेकर आयी है बरसात
- ईष्र्या, द्वेष और लालच की प्रवृत्ति पर चुटीला व्यंग्य है ‘पाणि’
- नदी परियोजनायें: बेहतर विकल्प ढूँढें वैज्ञानिक और विशेषज्ञ
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 10
- सिर्फ एक स्थान विशेष नहीं है गैरसैण
- सौल कठौल :दूध माँगोगे खीर देंगे…कश्मीर माँगोगे चीर देंगे!
- एक और आत्महत्या….
- जल विद्युत परियोजनाओं पर श्वेतपत्र जारी करे उत्तराखंड सरकार
अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008
- सरयू के संभावित डूब क्षेत्र में एक यात्रा
- लोकवाद्यों के संरक्षण का प्रयास
- आदिवासी कानून से ग्रामीणों की किस्मत बदल सकती है
- नये पंचायत कानून की कवायद
- शांति यात्रा रोकी
- कैलाश बिष्ट को सब जानने लगे हैं
- आखिर नदी बचाओ अभियान ने सरकार के दरवाजे पर दस्तक दी
- आपदा प्रबंधन को अपनी आन्तरिक आपदा से मुक्त होना होगा
- तीन विभागों के झगड़े में फँसा है एक गाँव
- चिट्ठी-पत्री : गंदगी देखकर दुःखद आश्चर्य!
- निशंक की कथाकृतियाँ
- हर तरह के कायदे-कानून से मुक्त है यह विश्वविद्यालय
- ध्वस्तीकरण तो रुका पर आगे ?
- ये घटनायें अच्छे भविष्य का संकेत नहीं हैं
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 05
अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2008
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 04
- आजादी के लिये तिब्बतियों का स्वदेश कूच
- सुमन से क्यों डरती है सरकार
- हमारा समाज और साहित्य में महिलायें
- धर्मसिंह रावत की जरूरत तो अभी बनी रहेगी
- संघर्ष ही जीवन की कथा रही
- तो इस तरह जीत ली गई नैनीताल बैंक की अस्मिता की लड़ाई
- सेंचुरी मिल के झाँसे से बीमार रहने लगे हैं लोग
- स्वस्ती श्री: प्रधान ज्यू चीड़ाक बोट झन लगाया हो..
- चिट्ठी-पत्री : सदानीराओं के दिन बहुरेंगे?
- क्या खगौती देवी की आत्महत्या के बाद बेहतर होगी शिक्षा व्यवस्था
- ध्वस्तीकरण से खलबली मची
- राजनीति का शिकार हो गई है बद्री-केदार समिति
अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2008
- इन यात्राओं से हासिल क्या होगा ?
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 03
- यादगार रहेगी वह केदारनाथ यात्रा
- सुअरों के बाद अब सरकारी खाद ?
- बागेश्वर की चिन्ता दिल्ली से
- बागेश्वर में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी
- भारतीय आध्यात्मिकता को सर्वसाधारण को सुलभ कराया महर्षि ने
- पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर सकी जलक्रीड़ा प्रतियोगिता
- नातियों को लेकर व्याकुल है सोबती देवी
- चेतना आन्दोलन की पदयात्रा: यहाँ माइक्रोप्लान तक ठीक नहीं बने हैं
- इस बार उमेश डोभाल को श्रीनगर में याद किया गया
- महिलाओं ने फिर से शराब पर हल्ला बोला
- जबर्दस्त भ्रष्टाचार हावी है विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना में
- क्या इस साल चालू हो जायेगा मेडिकल कॉलेज
- एक लाख मरीज और अस्पताल खुद बीमार!
- जब लोग ही इस पवित्र जल को नहीं बचा पा रहे हैं
- स्वस्ती श्री : क्या नैनो जरूरी है?
- चिट्ठी-पत्री: पत्रकारिता करना तो आज पैसा कमाने का जरिया बन गया है
- कब तक मरती रहेंगी नर्मदायें ?
- एक बार फिर से एडसिल
- क्या यह राजनैतिक दलों से मोहभंग की शुरूआत है ?
अंक: 17 || 15 अप्रेल से 30 अप्रेल 2008
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 02
- राजनैतिक बन्दियों के साथ उचित व्यवहार करने की माँग
- बागेश्वर: होली का उल्लास हत्या ने छीना
- अब भुखमरी से भी मौतें!
- मुख्यमंत्री ने आन्दोलनकारियों की सुध ली
- नेपाल में नया सूर्योदय
- गंभीर नहीं हैं प्रदेश के कर्मचारी-शिक्षक नेता
- सम्मान तो आपको जनता ने दिया ही है पँवार जी!
- चिट्ठी पत्री: राम से बढ़ कर रामकथा है
अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2008
- कब बनेगा चौरास का पुल ?
- यह कैसी छात्र राजनीति है ?
- सिर्फ समारोह मनाने मात्र से नहीं बच सकेगी उमेश डोभाल की परम्परा
- इतराने लायक क्या है खंडूरी सरकार के एक साल के कार्यकाल में ?
- मग्रास सिर्फ एक सपने का नाम नहीं है
- चिट्ठी-पत्री : ये टाइम- बेटाइम केवल महिलाओं व लड़कियों के लिये ही क्यों?
- शिक्षा की तो पूरी सोच बदलने की जरूरत है
- पुलिस को तो मालूम ही नहीं कि प्रतिबंधित क्या है
- होली-2008 : मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी,
- मेरा गाँव, मेरे लोग – 01
अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008
- कुछ कविता कुछ गीत: होली 2008
- बगरो बसंत है-होली 2008
- अब मीडिया से संचालित हो रहे हैं त्यौहार
- म्याँमार (बर्मा) में होली
- सरयू लोकादेश, सौंग और सरयू गीत
- हमारी होली-दीवाली तो जनप्रतिनिधियों ने बदरंग कर दी
- गूंजी कुमाऊँ महोत्सव की धमक
- रंग तो कई हैं पर अपना रंग हल्का
- हाँ रे गोरी सब रस चूनर भीजि रयो
- सौल-कठौल : पंडित जी की याद
अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008
- तोलीगाँव मोटर मार्ग की फाइल गुम ?
- लड़कियों की निगरानी बगैर नहीं थमेगा अश्लील क्लिपिंगों का सिलसिला
- सर्वसम्मति की असहमति !
- पत्रकार एसोसिएशन का सम्मेलन
- साठ साल पुराने पौड़ी की यादें – 2
- अनावश्यक महत्व क्यों दें पद्म सम्मानों को ?
- प्रशान्त राही के बाद अब खीमराज सिंह को प्रताड़ित करती पुलिस
- सरकार की मदद के बगैर भी हर साल खिलते हैं बसन्तोत्सव के रंग
- स्मृति शेष: इतिहासकार जसवंत सिंह नेगी
- चिट्ठी-पत्री : मेरे हर सपने में सिर्फ पहाड़ होता है !!
- नदियों की चिन्ता तो पूरे देश को है
- उपचुनाव के बहाने निपटाने की कसरत
- सरकार को पंचायतों की ओर देखने की फुर्सत कहाँ है
अंक: 13 || 15 फरवरी से 29 फरवरी 2008
- ‘लवा’ का तो नाम भी भूल जायेंगे लोग
- आस्ट्रेलिया छोड़ कर सूपी में रम गये हैं देवीदा
- चूर चूर हो गया है हरिराम टम्टा जी का सपना
- अब आशा की किरण देख रहे हैं मल्ला दानपुर के ग्रामीण
- मक्कू मठ: इतिहास से विकास तक का सफर
- शादी की संस्कृति और विकास की विसंगतियाँ
- साठ साल पुराने पौड़ी की यादें
- जमीनी सच्चाइयाँ मुख्य हैं प्रतिभाओं की खोज के लिये
- यहाँ भी जल विद्युत परियोजनाओं से लोग अपना परिवेश नष्ट होते देख रहे हैं
- उत्तराखंड में मायावती की पहलकदमी
- आदिवासी वन कानून को लेकर सरकार खामोश क्यों है ?
- चिट्ठी-पत्री : पद+दायित्व-लालबत्ती=सरकारी खजाने के सेहतमंद दीमक
- आशल कुशल – फरवरी 2008
अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2008
- अपने अपने कैलास –1
- जंगली सुअर लौट आये हैं
- बच्चों को प्रोत्साहन चाहिये
- हिवरे बाजार ने रास्ता दिखा दिया है
- अलविदा एच.सी.एस. रावत
- आदिवासी और ग्रामीण ही राहत दिला सकते हैं ग्लोबल वार्मिंग से
- शासनादेशों से आतंकित हैं प्रत्याशी
- जबरन माओवाद का भूत पैदा कर रही है उत्तराखंड सरकार
- उत्तरायणी मेला: इस बार मौसम भी रूठा रहा
- जन प्रतिनिधियों द्वारा मँझधार में छोड़ दिये जाने के बावजूद डटे हैं ग्रामीण
- मौसम के पूर्वानुमान को लेकर बहुत गंभीर नहीं है मीडिया
- चिट्टी पत्री : श्रीमती जी को शिकायत है कि……
- परिसीमन से उबला गुस्सा
- इन यात्राओं को जारी रहना होगा
- अमर रहे गणतंत्र हमारा
- तुम नज़रें उठाने लगती हो तो…..
अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008
- सफरनामा पूना से मारुति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 3
- चारा उत्पादन के लिये जमीनी सच्चाइयों का ख्याल रखें
- उत्तराखंड को संजीवनी राज्य बनायें
- विज्ञापन लुटा कर भ्रष्टाचार छिपा रहा है हरिद्वार विकास प्राधिकरण
- जंगलों के बगैर विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती
- नदियों पर संकट है सारे गाँव इकट्ठा हों
- अभी भी आँखों के सामने रेंगता है मून लैंडिंग का नजारा
- क्या अस्पतालों में संवेदना नहीं बची
- महिला समाख्या ने महिलाओं में आत्मविश्वास भरा
- मरोज त्यौहार: यहाँ माघ में भी मांस खाया जाता है
- एक पदयात्री के नोट्स : नौजवान गायब है
- कस ज होलो ठार्यो समधी ! कस ज भ्यो
- छेदीलाल बनाम सुराख अली बनाम होलचन्द
- जीव जगत से बच्चों का अपनापा जोड़ने का पर्व है घुघुतिया
- चिट्ठी पत्री: जोर जबर्दस्ती से क्या सच्चाइयाँ छुपाई जा सकेंगी ?
- अक्षरों के पुल के नीचे बहती-थमती कवितायें
- व्हाट एन आइडिया जी ?
- अभी लड़ने से थके नहीं दानपुर के ग्रामीण
- नदियों के किनारे चल पड़ी हैं पदयात्रियों की टोलियाँ
अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2008
- सफरनामा पूना से मारुति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 2
- अब व्यापारी समझे मॉल की हकीकत
- क्या सचमुच इतना पैसा खर्च कर दिया गया है नैनीताल पर ?
- बौरारो की जनता के सामने लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा
- चौपता का कौथिग
- पत्रकार की शामत
- यों लुटता है सरकारी खजाना
- नैनीताल समाचार की अनदेखी से सकते में हैं दिल्ली के पत्रकार
- ताकि विवाह सम्बन्ध बना रहे: एक अध्ययन भाग – 2
- नदी को सुरंग से ले जाने का खतरा महसूस कर रहे हैं दानपुर के लोग
- है किसका अधिकार नदी पर
- मरियोला को पिथौरागढ़ की सच्चाई समझ में आ गई है
- औली बुग्याल में भारी निर्माण क्यों हो रहे हैं ?
- यहाँ मनाते हैं मंगसीर में दीवाली
- स्वस्ती श्री : मोटर रोड 8 से 24 किमी दूर
- चिट्ठी-पत्री : सरकार की मान्यता से जरूरी जनता की मान्यता है
- माओवादियों का जोनल कमांडर…….. बाप रे बाप!
- फँसाया गया है प्रशांत को
- अभी बना हुआ है परिसम्पत्तियों का लफड़ा
- नया साल : कुछ कवितायें
अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007
- सफरानामा पूना से मारूति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 1
- पंचेश्वर बाँध के डूब क्षेत्र सरयू घाटी में जन जागरण अभियान
- बुलन्द हो रहे हैं चोरों के हौसले
- मेरि कोसि हरै गे कोसि
- कौन कहता है कि गौरव नहीं रहा…..
- मुझे अपनी माँ में दिखता था बेटी का चेहरा
- त्रिलोचन के बिना
- मंत्री पुत्र का विवाह, उत्तराखंड विधान सभा में अवकाश
- संगठित होना होगा जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिये
- बच्चे कितना कुछ जानते हैं
- सम्पन्न हुआ उक्रांद का द्विवार्षिक महाधिवेशन
- छुट्टी हो तो ऐसी
- बारहनाजा – पारम्परिक अनाजों के बीजों में छुपे जीवन का दर्शन और विज्ञान
- स्वस्ती श्री: लोकतांत्रिक शक्तियों(?) का अलोकतांत्रिक कार्य
- चिट्ठी-पत्री : जी रया जाग रया, ट्विंकल-टिविंकल लिटिल स्टार
- पानी पर जनता के अधिकार सुनिश्चित करने निकलेंगी नदी यात्राएं
- इस व्योपारी को प्यास बहुत है
- थैंग गाँव के लिए रास्ते की मांग पर मार-पीट
- मुख्यमंत्री अब करने लगे हैं लोक लुभावन घोषणायें….
अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2007
- राजमा के उत्पादन से सम्पन्न हो रहे हैं उर्गम घाटी के किसान
- जिसका ईगो बढ़ गया है, उसे पैदल यात्रा करनी चाहिये
- बेघरबार है बलात्कार की शिकार बालिका
- ताकि विवाह सम्बन्ध बना रहे: एक अध्ययन
- अभी जीवन्त और आकर्षक है लोक संगीत की सुर-लहरी
- क्या यही है टी. एल. एम. मेलों की सार्थकता
- पशुबलि प्रथा देवभूमि पर कलंक है
- गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः, गुरूर्देवो महेश्वरः, गुरूः साक्षात्….
- चाँई जैसे हालात हैं कफनौल के
- थैंग गाँव में असंतोष है
- गुमनाम ही रहे स्वाधीनता संग्रामी मनोरथ पांडे ‘शास्त्री’
- ‘ग्रामीण विकास का मतलब है ग्रामीण उद्योगों का विकास’
- स्वामी आलोकानन्द की मौत का विश्वास नहीं होता!
- विश्वविद्यालय परिसर फासीवाद की नर्सरी बन रहा है
- किताबों के बारे में
- चिट्ठी पत्री: नैनीताल समाचार दैनिक कब से होगा?
- जातिवादी सोच में अबला का दर्द भी दब गया
- अब ग्रामीण नहीं रहेंगे, क्योंकि पनबिजली योजनायें आ रही हैं!
अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2007
- मुक्तेश्वर की यादगार भूमिका है पशु प्लेग के उन्मूलन में
- ट्राइबल सोसाइटी में कम्प्लीकेशंस नहीं होते, उसकी फुर्सत ही कहाँ
- जौनपुर बदल रहा है
- पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन का अधिवेशन सम्पन्न
- नैनीताल में कथा साहित्य का ‘संगमन’
- ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार…..3
- नैन सिंह: वह उत्तराखंड के जनसंघर्षों की बुनियाद था
- बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होय
- स्वस्ती श्री : जानवरों से परेशान हैं हम लोग
- मुख्यमंत्री जी, बतायें तो कि हमारी हैसियत क्या है ?
- आंदोलनकारियों का कोई ग्वाल-गुसैं नहीं
- सात सालों बाद भी दिशाहीन है यह राज्य
अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2007
- खेद तो इस देश के बारे में है जो सड़क, बिजली भी न दे सका
- ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार…..2
- बिना रीडिंग के बिजली बिल
- मिल-जुल कर किये बगैर नहीं हो सकती सफाई
- शीत जल मत्स्यिकी की अच्छी संभावनायें हैं
- रामगढ़ के नौजवान माफिया की सरपरस्ती में जी रहे हैं
- ये उद्योग तो खुशहाली के बदले असंतोष ला रहे हैं !
- शिक्षा राष्ट्र की सुरक्षा से कम जरूरी नहीं
- अभी तो खड़िया से आँखें चौधियायी हैं
- मोहन सिंह को उम्मीद है डी.एम. बचा लेगा माफिया से
- जंक खा रही गाड़ियों से कैसे उबरेगा निगम
- चाँईं गाँव की घटना तो खतरे की घंटी है
अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2007
- नेताओं और अफसरशाहों में विकास की इच्छा ही नहीं
- सीमान्त के गाँव निर्जन हुए तो सीमा की रक्षा कैसे होगी ?
- ये उद्यमी महिलायें!
- ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार-1…..
- आशल-कुशल अक्टूबर 2007
- मौत का शॉर्टकट क्यों बन रही हैं पहाड़ की सड़कें
- शोध कार्य की दिशा कौन तय करेगा
- विज्ञान कहाँ है इन विज्ञान प्रदर्शनियों में ?
- चिट्ठी पत्री : भ्रष्टाचार की गंगोत्री लबालब बह रही है और असली गंगोत्री संकट में
- समस्या का समाधान नहीं है भू अध्यादेश
- पालिका सदस्यों की बर्खास्तगी का अभूतपूर्व निर्णय
- शेरपाओं ने हिम समाधि ली
अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2007
- खुशी लाने का हर रास्ता काँटों भरा होता है
- आरक्षण पर व्यावहारिक समझ क्यों नहीं बनती ?
- संग्रामी पत्रकारों की याद
- विस्थापन के बगैर कोई भविष्य नहीं है पाला के ग्रामीणों का
- शर्मशार हुआ स्वामी श्रद्धानन्द का गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय
- यह तो नजरिया बदलने की शुरूआत है
- चिकित्सा और दूरसंचार से परेशान है मंदाकिनी घाटी
- स्वस्ती श्री: पीकदान, दीपदान और बागनाथ
- चिट्ठी पत्री: गायब हो गया मेरा गाँव बड़गूँ
- फिर अतिवृष्टि से घायल हुआ पहाड़
- आखिर क्यों आक्रामक हो उठे हैं जानवर
- छिः… कैसे-कैसे पत्रकार !
- छात्रसंघ के रणबाँकुरों से थर्रायी दून घाटी
अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2007
- वह व्यवहार ही क्या, जिसमें कहीं प्रेम न हो
- केदारघाटी में घुस आये शराब के तस्कर
- छोटे व्यापारी की व्यथा भी तो सुनी जाये
- घपलेबाज सांसदों को वेतन मत दो, वाहिनी ने कहा
- आप रौशनी हैं हमारे लिये
- इस बार की बधाई और मानहानि
- शहीदों को श्रद्धांजलि देने भी एक नहीं हो पाते लोग !
- चिठ्ठी पत्री: नराई कैसे फेरें, सम्पादक ज्यू ?
- आपको भ्रष्टाचार क्यों नहीं दिखाई दे रहा है ऐरी जी ?
- नैनीताल बैंक का अस्तित्व मिटाने की कोशिश जारी है
अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007
- ठेकेदार अफसर गठबंधन से डरने की जरूरत नहीं
- सहयोग-सौहार्द होना पहली शर्त है
- संकीर्ण दायरों को टूटना है
- मानसिकता बदल रही है
- ……और मैंने एक सपना देखा ….
- केरल से विकास के कुछ सबक
- जनजाति क्षेत्र का बजट भी काम नहीं आ रहा जौनपुर की पंचायतों में
- ठेकेदारी पर रोक कैसे लगे ?
- महात्मा गाँधी के आगमन से बढ़ा महिलाओं में आत्म सम्मान
- महिलाओं ने अपनी उपयोगिता साबित की है
- हमने प्रयोग किया सर्वानुमति का
- कुछ के लिये आजीविका का साधन हैं पंचायत
- महिला मैत्री गोष्ठी: प्रशासन और जनता के बीच संवाद की कोशिश
- शिमायल में सौन्दर्य है, मगर पानी नहीं
- आरक्षण को लेकर फिर से सरगर्मी
- शहर में रह कर गाँव के प्रतिनिधि बने लोग ज्यादा निकम्मे हैं
- कमीशनखोरी तो रुकनी ही चाहिये
- गाँव बटा, अब घर तो न बँटे !
- अब विवेकाधीन कोष पर रोक लगने के दुष्परिणाम दिख रहे हैं
- भारत हेवी इलैक्ट्रिकल्स भी शामिल है जमीन के घोटाले में
- पानी का अनियंत्रित उपयोग विनाशकारी होगा
- इन फालतू विद्यालयों का मतलब क्या है
- मैं आजादी से काम कर सकी
- विकास की दिशा पर गोष्ठी
- पहले नौकरशाही की जकड़ से मुक्त करें
- खो न जायें इतने संघर्ष से प्राप्त अधिकार
- ग्रामीण कहाँ होता है ग्राम विकास की योजनाओं में
- किलकारी से पर्यावरण चेतना
- याद रहेंगे देवीराम जी
- डाबर की नजर से अभी ओझल है आँवले का यह जंगल
- पिछली गलती न दोहरायें
- आम सहमति से हो सकते हैं सारे काम
- अथक संग्रामी और प्रखर वक्ता थे गोविन्द बल्लभ पंत
- एक ओर तबाही है तो एक ओर माफिया की ताकत
- औद्योगिक विकास के नाम पर मजदूरों का दमन
- सामुदायिक भागीदारी भ्रम है
- चिट्ठी पत्री: नारी तुम केवल श्रद्धा हो?
- ग्राम गणराज्य अंक: कुछ कविता, कुछ विचार
- केन्द्रीय सत्ता से कुछ टुकड़े फेंक दिया जाना विकेन्द्रीकरण नहीं
- परिचर्चा: अवसर मिले तो अत्यन्त कारगर हो सकती हैं पंचायतें
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