सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् और स्वतंत्रता सेनानी सरला बहन की पुण्यतिथि के अवसर पर लक्ष्मी आश्रम कौसानी में आयोजित ‘उत्तराखण्ड नदी बचाओ अभियान’ की वार्षिक बैठक में श्रीनगर में पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर हुए हमले पर चिन्ता जताते हुए तय किया गया कि इस घटना का तीव्र प्रतिरोध किया जायेगा। वक्ताओं ने नदियों के विनाश व जनता के हकों को छीनने में सरकार और कम्पनियों के मजबूत हो रहे गठजोड़ को उत्तराखंड के लिए खतरनाक बताया। ‘नदी बचाओ अभियान’ की संयोजक राधा बहन ने कहा कि अभियान के प्रयासों से नदियों के प्रति जागरूकता निश्चित रूप से बढ़ी, लेकिन इसके बाद नदियों का व्यावसायिक दोहन करने वाले लोग ज्यादा संगठित हो गये हैं। यहाँ तक कि सरकारी संरक्षण में अब वे हिंसा पर उतर आये हैं। इस दमन का प्रतिकार लोगों को साथ लेकर करना होगा।
उत्तराखंड लोक वाहिनी के अध्यक्ष डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं को सरकार तमाम गड़बडि़यों के बावजूद स्वीकृति दे देती हैं। लेकिन छोटी परियोजनाओं, जिन्हें ग्रामीण स्वयं संचालित कर रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, को पर्यावरणीय स्वीकृति बड़ी मुश्किल से मिलती है। सुरेश भाई ने कहा कि गंगा नदी विकास प्राधिकरण में उत्तराखण्ड के समाज के प्रमुख व्यक्ति भी होने चाहिये। उत्तराखण्ड में पैदा हो रही बिजली में स्थानीय लोगों की हिस्सेदारी तय होनी चाहिए।
बैठक में तय किया गया कि आने वाले दिनों में नदी बचाओ आन्दोलन के लोग श्रीनगर व टिहरी में जुटेंगे। 1 दिसम्बर से 8 दिसम्बर तक प्रदेश भर में पदयात्रायें निकाली जायेंगी, गढ़वाल मण्डल में इसकी जिम्मेदारी सुरेश भाई तथा कुमाऊँ में राम लाल साह, गिरीश तिवारी, गोपाल लोधियाल तथा बसन्त पाण्डे को दी गई।