पेयजल, जैव विविधता तथा पर्यावरण के लिये महत्वपूर्ण स्याहीदेवी शीतलाखेत के 1100 हैक्टेयर क्षेत्रफल में फैले आरक्षित वन को बचाने के लिये चलाये जा रहे ‘जंगल बचाओ, पानी बचाओ’ अभियान के 7 वर्ष पूरा होने पर शीतलाखेत में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। स्याही देवी क्षेत्रीय विकास मंच द्वारा आयोजित इस बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद प्रदीप टम्टा, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक करन मेहरा तथा प्रभागीय वनाधिकारी अल्मोड़ा ए.के. बनर्जी ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के संरक्षक गिरीश चन्द्र शर्मा तथा संचालन गणेश चन्द्र पाठक ने किया।
सांसद प्रदीप टम्टा ने स्याही देवी क्षेत्रीय विकास मंच द्वारा चलाये जा रहे जंगल बचाओ, पानी बचाओ अभियान को पेयजल एवं जैव विविधता के संरक्षण के लिये अत्यन्त महत्वपूर्ण बताते हुए इसकी सराहना की तथा महिलाओं का आह्वान किया कि चिपको आंदोलन की भांति जंगलों को बचाने के लिये आगे आयें। सांसद ने इस महत्वपूर्ण जंगल की रक्षा के लिये ठोस कार्ययोजना बनाने का आश्वासन दिया। विधायक अल्मोड़ा मनोज तिवारी ने स्याही देवी के जंगल से अल्मोड़ा शहर एवं समीपवर्ती 40 से अधिक गाँवों को मिल रहे 96 इंच पानी का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि इस महत्वपूर्ण जंगल में ईंधन तथा कृषि उपकरणों के लिये चौड़ी पत्ती प्रजाति पेड़ों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिये ग्रामीणों को विकल्प दिये जायें। रानीखेत के विधायक करन मेहरा ने चौड़ी पत्ती जंगलों में चीड़ के प्रवेश पर चिन्ता व्यक्त करते हुए चीड़ के प्रसार को रोकने की माँग की। प्रभागीय वनाधिकारी ए.के. बनर्जी ने घोषणा की कि स्याही देवी शीतलाखेत क्षेत्र के जंगल को प्राकृतिक पुनरोत्पादन के तरीके से संरक्षित संवर्धित किया जायेगा तथा चाल, खाल, गड्ढे बनाकर वर्षा जल का संरक्षण किया जायेगा। ऐड़ी गधेरा में वर्षा जल को रोकने के लिये जलाशय का निर्माण किया जायेगा।
कार्यक्रम में वन क्षेत्राधिकारी सी.गोस्वामी, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेन्द्र बाराकोटी, जीवन नाथ, जमन सिंह, हरीश बिष्ट, कैलाश नाथ, ललित बिष्ट, हीरा सिंह, तारा सिंह, नीमा देवी, मीना बोनाल, तारा कार्की, शान्ति देवी, सचिन टम्टा, अनूप साह, लक्ष्मण गिरी, राम सिंह भंडारी ने विचार व्यक्त किये। सूरी गडसारी, बरसीला, नौला धामस, भाकड़, नौगांव, स्याहीदेवी, सल्ला, शीतलाखेत, परकिया, मरीला, सड़का, हरड़ा आदि गाँवों के महिला दलों के अध्यक्षों, ग्राम प्रधानों तथा सरपंचों ने आयोजन में प्रतिभाग किया। बाद में आमंत्रित अतिथियों को 9 सूत्रीय माँगपत्र सौंपा गया जिसमें इस जंगल की रक्षा की कार्ययोजना बनाने, ग्रामीणों को निःशुल्क गैस कनेक्शन तथा धातु के हल उपलब्ध कराने, वृक्षारोपण की समीक्षा करने, ऐड़ी गधेरा में वर्षा जल को रोकने के लिये जलाशय बनाने तथा जंगली जानवरों से खेती बाड़ी को बचाने के ठोस उपाय करने की माँग की गयी है।























mujhe aap ka sujhhav achchha laga