-भारतीय गणतंत्र घोटालों का गणतंत्र बन गया है।
-भ्रष्टाचार की गंगा ऊपर से नीचे तक बह रही है।
-भ्रष्टाचार अब शिष्टाचार बन गया है।
-मेरा भारत महान, सौ में से निन्यानबे बेईमान।
-भ्रष्टाचार भारतवासियों के खून/जीन में आ गया है।
इस तरह के फिकरे, व्यंग्योक्तियाँ और ताने अब आम हो चले हैं। पिछले कुछ समय से हर क्षेत्र में और हर स्तर पर भ्रष्टाचार में बेहद बढ़ोतरी हुई है और इसने सारी हदें पार कर ली हैं। घोटालों और घपलों की तो बाढ़ आ गई है और उन्होंने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये हैं। भारत के आम नागरिक हैरानी, बेचैनी, क्षोभ और व्यग्रता से इस तमाशे को देख रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर अन्ना हजारे के अनशन को जो व्यापक जनसमर्थन मिला, उसके पीछे यही बेचैनी और गुस्सा था।
विगत कुछ सालों से तो एक के बाद एक कई बड़े-बड़े घोटाले उजागर हुए हैं। देश को शर्मसार करने वाले नित नये-नये मामले आते जा रहे हैं। इनकी सूची इस तरह बनाई जा सकती है-
-बोफोर्स तोप सौदे का घोटाला।
-जर्मन पनडुब्बी सौदे का घोटाला।
-हर्षद मेहता का 5 हजार करोड़ रुपये का शेयर प्रतिभूति घोटाला।
-केतन पारेख का शेयर घोटाला।
-1999 में दूरसंचार मंत्री के पद से जगमोहन को हटाकर प्रमोद महाजन को लाकर निजी टेलीफोन कंपनियों का 5000 करोड़ रुपये का लाइसेंस शुल्क माफ करना।
-चंडीगढ़ का 2008 का ‘न्यायाधीश द्वारा नकदी’ घोटाला। जिसमें 15 लाख रुपये गलती से पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय के मिलते-जुलते नाम के न्यायाधीश (न्यायमूर्ति निर्मल यादव की जगह न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर) के यहाँ पहुँच गये।
- अब्दुल करीम तेलगी का स्टांप पेपर घोटाला।
-अमरीकी बिजली कंपनी एनरॉन के साथ महाराष्ट्र सरकार के बिजली खरीद करार का घोटाला।
-सुखराम का दूरसंचार घोटला।
-लालू प्रसाद यादव का चारा घोटाला।
-रामलिंगम राजू का सत्यम कंपनी का घोटाला।
-भारतीय सेना का राशन आपूर्ति का केंटीन घोटाला।
-सेना का सुकना जमीन घोटाला।
-जीवन बीमा निगम का घोटाला।
-गाजियाबाद अदालत के कर्मचारियों की भविष्य निधि का, जिसमें उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय तक के कई न्यायाधीश शामिल हैं।
-कनार्टक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश दिनकरन के खिलाफ जमीन कब्जे के व अन्य आरोप तथा महाभियोग की कार्यवाही।
-सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सबरवाल का दुराचरण।
-वकील बाप-बेटे शांतिभूषण एवं प्रशांतभूषण द्वारा शपथपूर्वक हलफनामे पर बयान देना कि सर्वोच्च न्यायालय के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आठ भ्रष्ट रहे हैं।
-झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के पास 400 करोड़ की अवैध संपत्ति की बरामदगी।
-कर्नाटक में बेल्लारी के रेड्डी बंधुओं का खदान साम्राज्य व सरकारें बनाने-बिगाड़ने की हैसियत।
-विश्वास मत के दौरान सांसदों की खरीद-फरोख्त।
-आईपीएल का घोटाला जिसमें ललित मोदी व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की छुट्टी हुई।
-पूना के घोड़ा व्यापारी हसल अली का मामला जो भारत के कई नेताओं का दो नंबरी धन विदेशी बैंकों में जमा करने का माध्यम बना रहा है और जिस पर 1 लाख करोड़ रुपये का आयकर बकाया है।
-अखबारों द्वारा चुनावों के दौरान पैसा लेकर खबरें छापने (पेड न्यूज) का मामला।
-नीरा राडिया प्रकरण जिसमें सरकारी तंत्र के अंदर तक दलाली एवं लाबीइंग जाहिर हुई और जिसमें बड़े-बड़े पत्रकारों एवं संपादकों की भागीदारी पता चली।
-मध्य प्रदेश के आईएएस दंपति टीनू जोशी-अरविंद जोशी के पास 25 फ्लैटों सहित 360 करोड़ रुपये की संपत्ति की बरामदगी (जिसमें 3 करोड़ 16 लाख रुपये तो नगद मिले)।
-सरकारी एल्युमीनियम कंपनी ‘नाल्को’ के मुख्य अधिकारी श्रीवास्तव के लाॅकरों से 15 किलो सोना मिलना और पता चलना कि वह अपने दलाल के माध्यम से घूस में सोने के बिस्कुट या सोने की ईंट ही लेता था।
-पायलटों के लाइसेंस का घोटाला जिसमें फर्जी अंक सूची एवं फर्जी प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों के आधार पर लाइसेंस बनाये गये और जिसमें नागरिक उड्डयन निदेशालय के अधिकारी भी शामिल पाये गये।
-उत्तर प्रदेश का राशन अनाज का घोटाला।
- कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदियुरप्पा का अपने परिजनों को महंगी जमीन का आबंटन।
-भारतीय चिकित्सा परिषद के प्रमुख केतन देसाई का एक मेडिकल कॉलेज को मान्यता देने के मामले में दो करोड़ रुपये की घूस लेना।
-केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त के रूप में एक दागी अफसर पी.जे. थॉमस की नियुक्ति का मामला।
-राष्ट्रमंडल खेल का विशाल घोटाला जिसमें सुरेश कलमाड़ी सहित कई लोग गिरफ्तार हुए हैं।
-मुम्बई का आदर्श बिल्डिंग घोटाला जिसमें कारगिल के शहीदों की विधवाओं के नाम मुम्बई के एक महंगे इलाके में बनी इमारत के फ्लैटों की बंदरबाँट नेताओं, अफसरों व सेना के अफसरों ने मिलकर की और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण को घोटाले के कारण त्याग-पत्र देना पड़ा।
-इसरो द्वारा देवास मल्टी मीडिया कंपनी को मामूली राशि पर उपग्रह की संचार सेवाओं का आबंटन।
-घोटालों का सरताज दूरसंचार मंत्रालय की 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला जिसमें पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा अब जेल में है और 1.76 लाख करोड़ रुपये की राशि ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये हैं।
एक चिन्तित नागरिक द्वारा जनहित में जारी
ये अंश समाजवादी चिन्तक सुनील द्वारा लिखी ‘भ्रष्टाचार को कैसे समझें’ पुस्तक से उद्धृत हैं। इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर देश भर में बहुत चिन्ता और बेचैनी है, मगर भ्रष्टाचार के मूल कारणों की पड़ताल करने की कोशिश शायद ही किसी ने की हो। इस दृष्टि से रोशनाई प्रकाशन (212 सी.एल./ए, अशोक मित्र रोड, कांचरापाड़ा, उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल 743145; मूल्य: 40 रु.) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक बेहद महत्वपूर्ण है।