लगता है कि उत्तराखंड में अभी इक्कीसवीं सदी की शुरूआत नहीं हो पाई है। वर्ना क्या वजह है कि प्रदेश की कामचलाऊ राजधानी देहरादून वाले जिले में किसी को मंदिर में प्रवेश से रोका जाए ? हाल ही में अनुसूचित जाति की एक किशोरी के हनोल स्थित महासू देवता के मंदिर में प्रवेश पर न केवल उसे रोका गया, बल्कि उसके साथ दुर्व्यवहार करते हुए पीटा भी गया। मगर अधिकारियों द्वारा इस घटना को छुपाने के प्रयास हुए। बाद में कुछ पत्रकारों और अन्य नागरिकों के हस्तक्षेप करने पर ही प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई।
फिलहाल बुनियादी सवाल यही है कि संविधान प्रदत्त पूजा की स्वतंत्रता के अधिकार को कोई किसी से कैसे छीन सकता है ? क्या धर्म, जाति समुदाय के नाम पर ऐसा भेदभाव स्वीकार्य होना चाहिए ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार दुव्र्यवहार की शिकार किशोरी राखी जब 3 अगस्त को मंदिर में भेंट अर्पित करने गई तो व्यवस्थापक नमन सिंह और मंदिर में बैठे पुजारी हरीश चन्द्र नौटियाल ने उसके मंदिर प्रवेश पर आपत्ति जताई और गालीगलौज की। असल में इस दुर्व्यवहार की भूमिका 28 जुलाई को ही बन गई थी जब मंदिर के व्यवस्थापक नमन सिंह ने राखी से मंदिर के पास लगे पी.सी.ओ. पर अपमानजनक टिप्पणियाँ की थीं। राखी उस दिन हनोल मंदिर के पास स्थित पी. सी. ओ. पर अपनी दीदी को अमृतसर फोन करने के लिए गई थी। नमन सिंह को यह बात नागवार गुजर रही थी कि कथित रूप से निम्न जाति की होने के बावजूद वह टेलीफोन का उपयोग कर रही थी। उसका कहना था कि ‘अब इन लोगों ने कुछ ज्यादा ही सीख लिया है’। राखी ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति की तो वह झगड़ा करने पर आमादा हो गया और राखी घर लौट गई। बाद में 3 अगस्त को जब राखी अपनी बीमार माँ को लम्बी बीमारी के इलाज के बाद स्वास्थ्य लाभ होने पर प्रभु का धन्यवाद देने व भेंट अर्पित करने के लिए मंदिर के अहाते में गई तो व्यवस्थापक नमन सिंह उर्फ नमनू और पुजारी हरीश चन्द्र नौटियाल गालीगलौज पर आमादा हो गए। वे किसी प्राचीन प्रथा का हवाला देते हुए कह रहे थे कि इसने मंदिर परिसर में प्रवेश कैसे किया ? इस गलती के लिए तुझे 1100 रु. नकद और एक बकरा दंडस्वरूप देना होगा। राखी के अनुसार जब उसने प्रतिवाद किया तो नमन सिंह ने अपने साथियों के साथ मिल कर उसकी शर्ट फाड़ दी और फिर गला पकड़ कर उसे जमीन पर पटक दिया। शोर सुन कर आसपास के लोग आए। उन्होंने ही कुछ कपड़ों से मेरा शरीर ढँक कर मुझे घर पहुँचाया।
पिता के साये से वंचित राखी अपनी व्यथा कथा लेकर तहसीलदार के पास त्यूणी गई। उसी दिन 4 अगस्त को नायब तहसीलदार शूरवीर सिंह राणा को पूछताछ के लिए भेजा गया। उसने प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखने के बजाय समझौता करवा कर मामले को दबाने का प्रयास किया। अगले ही दिन उत्पीड़न करने वाले पक्ष ने राखी और उसकी सहायता कर रहे पत्रकार महेश राजगुरु सहित चार लोगों पर मुकदमा दर्ज करवा दिया। काफी प्रयास के बाद 6 अगस्त को ही पीड़ित पक्ष की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। उप-जिलाधिकारी चकराता के अनुसार दोनों ही पक्षों ने न्यायालय से जमानत ली है।
पीड़िता की मेडिकल जाँच के लिए 7 अगस्त को एक स्वास्थ्य जाँच दल हनोल पहुँचा था। उसी दिन कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी पीड़िता से भेंट करने गए। महासू मंदिर के पुजारी हरीश चन्द्र नौटियाल का दावा है कि मीडिया के दबाव में उन पर बेबुनियाद आरोप लगाये जा रहे हैं। मंदिर सभी के लिए खुला है। उन्होंने कहा कि मंदिर के गर्भगृह के सिवा सभी जगह लोग आ-जा सकते हैं। यदि राखी को पीटा गया तो दोषी व्यक्ति को सजा मिलनी चाहिए, परन्तु मैंने ऐसी कोई घटना देखी नहीं है। अब न्याय तो महासू देवता लगाएगा। उधर राखी का कहना है कि अनुसूचित जाति में जन्मी होने के कारण उसे यह झेलना पड़ा।
अपनी माता, भाई और बहन के पालन पोषण के लिए दिन भर मकानों में पुताई, प्लास्टर व रोड़ी तोड़ने का काम करने वाली राखी का विचार है कि कानून तो दबंगों और पैसे वालों का गुलाम है। पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी चन्द्र सिंह के नेतृत्व में एक जाँच दल ने हनोल का दौरा किया।























nainital samachar
kailash chandra panpai ji ki “Mahasu mandir” ki report pari unhone likha ha ki ikkisvi sadi ki suruaat saayad yanha nahi ho payi.yeh baat bilkul thik hai yeh ghatnaye sirf mahasu mandir tak seemit nahi hai apitu aisi ghatnayen Nainital jaisi bare nagaron mai bhi prasaasan ke naak ke neeche hoti hai. naina devi ka jab mela lagta hai to Kele ka per(tree or log) lene ke liye kisi gaon mai jaya jata hai. us hi dauraan uttarakhan ki sangit wah nritya ke dharohar ke roop mai jane jaani wali chhhaliya nritakon ko bulaya jataa hai.parnatu unn logo ko saamanya logo ke beech mai baithkar khana nahi khilaaya jaata hai ,…….aaakhir kyon mai aisa do baar dekh chuka hun…….prasaasan to door wanha par yeh sab jaante hai is baat ko chhahe woh nanital ke jane maane patrkar ya fir pandit hi kyon ho. paper mai likhana aasaan hota hai lekin us ko kahane aur virodh karne ki takat bhi honi chahiye ki bhi samaachar patra ko …………god is always same for everybody and we need to know the fact. even our intellectual section of society wear two fold identity cloth one is to show and other for practice………..apane ghar se suruaat karne ki hai agar society mai change laana ho to…………..
thank u………..