बसन्त आ गया है।
पतझड़ वाले
आड़ू-पयाँ के
वृक्षों पर
नई कोंपल
आ गई हैं,
लक्-दक् फूल
खिल चुके हैं,
एक नया जीवन
नया राग-रंग
नई उमंग
संग लेकर
बसन्त आ गया है।
तिड़ा हुआ मुँह
फटे हुये पैर
भयभीत करती शीतलहर,
दुःखों के बाद
सुख का ऐहसास
एक नया जीवन
नया राग-रंग
नई उमंग
संग लेकर
बसन्त आ गया है।
-डॉ. नरेन्द्र गौनियाल