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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2012:: वर्ष :: 35 :January 17, 2012 पर प्रकाशित
(भगत दा द्वारा सम्पादित/प्रकाशित ‘बनरखा’ के प्रवेशांक का शकीय वक्तव्य। – सम्पादक) प्रकाशकीय ‘वनरखा’ का यह अंक हम केवल एक अनियतकालिक पत्रिका (स्मारिका) के रूप में ही प्रकाशित कर पा रहे हैं। इसके प्रकाशन के पूर्व हमने ‘अरण्या’ नाम से इसके प्रकाशन की घोषणा की थी, परन्तु कतिपय कारणों को ध्यान में रखते हुए, हमे [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :November 15, 2011 पर प्रकाशित
बिजू नेगी मूलतः जैविक प्रदेश उत्तराखण्ड का कृषि विभाग किसानों को रासायनिक उर्वरक़़ मुफ्त मे बाँट रहा है। बगैर किसी सार्वजनिक चर्चा या सूचना के यह प्रसाद ‘पोषक सुरक्षा हेतु तदन्य मोटा अनाज विकास पहल’ के अन्तर्गत चुपचाप बाँटा जा रहा है। किसानों को प्रदर्शन के तौर पर डी.ए.पी., यूरिया, जिंक जैसे रासायनिक उर्वरकों के [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 30, 2011 पर प्रकाशित
सच्ची लगन हो तो मुकाम तक पहुँचने में औपचारिक शिक्षा और डिग्री की कमी आड़े नहीं आती है। इस उक्ति को चरितार्थ किया उमेश चन्द्र साह ने। श्री साह अब नहीं रहे। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने …………..अंतिम साँस ली। अब बची हैं तो सिर्फ उनकी स्मृतियाँ और उनके विशद् अनुभव जो कि उनके [...]
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लेखक : विजय जड़धारी :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 16, 2011 पर प्रकाशित
कृषि व पशु पालन सम्बन्धी विभिन्न समस्याओं को लेकर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आये किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 25 अगस्त 2011 को नई टिहरी में विशाल प्रदर्शन कर एक सभा की। ‘बीज बचाओ आन्दोलन’ की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हमारी जीवन पद्धति व संस्कृति के साथ ही [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 16, 2011 पर प्रकाशित
कैसी विडम्बना है कि जिस बरसात को खुशहाली का कारण माना जाता था, उसे बरसात को हमारी सरकारों के गैर जिम्मेदारी और नाकारेपन ने आपदा और भय का प्रतीक बना दिया है। पहले बरसात शुरू होने पर लोग खुश होते थे कि चलो चारों ओर हरियाली का साम्राज्य होगा और धरती में पानी की मात्रा [...]
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लेखक : गजेन्द्र पाठक :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 2, 2011 पर प्रकाशित
बाँज पर्यावरण संतुलन, जैवविविधता एवं जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष है। इस सदाबहार वृक्ष की जड़ से लेकर तने तक का प्रत्येक भाग किसी न किसी रूप में उपयोगी है, अतः इसे पहाड़ का कल्प वृक्ष भी कहा जाता है। ग्लोबल वॉर्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के वर्तमान दौर में इस वृक्ष का महत्व [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 15, 2011 पर प्रकाशित
प्रस्तुति: ईश्वर जोशी परम्परागत कृषि को छोड़ व्यावसायिक खेती के जरिये अधिक लाभ कमाने की कोशिशें राज्य बनने के बाद काफी तेज हुई हैं। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र में जहाँ प्रति परिवार औसत 8 नाली कृषि भूमि बची है, वहीं ऊपर से बिखरी जोतों तथा जंगली जानवरों के नुकसान के चलते बंजर भूमि का क्षेत्र [...]
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लेखक : पुरुषोत्तम शर्मा :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
12 मार्च को सदन में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा पेश वर्ष 2011-12 के बजट में कुल अनुमानित वार्षिक बजट 19366.91 करोड़ रुपये में से योजनागत मद में मात्र 6564.29 करोड़ ही रखे गये हैं। बाकी 12802.62 करोड़ रुपये गैर योजनागत मद में हैं। यानी बजट का लगभग दो तिहाई खर्च इस शासन-प्रशासन को चलाने के [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :April 4, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में कृषि व इससे जुड़े कार्य यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को निर्धारित करते हैं, परंतु पलायन की प्रवृत्ति यहाँ के बाशिन्दों के खून में रच-बस गयी है। जीविका कमाने के लिये पहाड़ से मैदानों की ओर जाना तो यहाँ की पुरानी समस्या है। परन्तु हाल के वर्षों में तथाकथित विकास की सुविधाओं, यथा स्कूल, [...]
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लेखक : कौस्तुभानन्द पंत :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 28, 2011 पर प्रकाशित
पहाड़ों के पारम्परिक अनाज- भट (काले और सफेद), रैंस, गुरूंस, सिमि, गुरसुंटि, सुंट, ग्यूँ, धान, जौ, उजौ, कौंण, मादिर, मडु, चुव, ध्वाग या मक्का, राजमा आदि के सही विकास और सुधार के लिये विशेष शोध, परीक्षण तथा उन्नति पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भट एक खास महत्व रखता है, क्योंकि यह शीत ऋतु का [...]
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