पर्वतीय कृषि: भूमि की उत्पादकता का कैसे हो अधिक सदुपयोग
प्रस्तुति : माधवानन्द मैनाली ‘मधु’ मडुआ, गहत, पहाड़ी आलू, भट्ट, पहाड़ी गाय का दूध, घी और गौमूत्र आदि पहाड़ी उत्पादों ने बाजार में अपना प्रभुत्व जमाना आरम्भ कर दिया है। अब चुनौती है कि इनके उत्पादन को किस प्रकार आगे बढ़ाया जाये। उत्तराखण्ड के 55.66 लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में 34.66 हेक्टेअर वन क्षेत्र है। बंजर [...]
क्या हमारे रणनीतिकार बिहार से सबक लेंगे ?
तथाकथित औद्योगिक विकास के कारण भले ही उत्तराखंड विकास दर के मामले में तीसरे स्थान पर हो, लेकिन इस विकास दर में खेती का योगदान लगातार घट रहा है। नाबार्ड के स्टेट फोकस पेपर के अनुसार, वर्ष 1999-2000 में उत्तराखंड में खेती का अंश 38 प्रतिशत था, जो अब घटकर 22 प्रतिशत पहुँच गया है। [...]
साझा मंच से हल होंगी समस्याएं
जल, जंगल, जमीन जैसे बुनियादी सवालों को लेकर संघर्ष करने वाले जन संगठन अब मिलकर उत्तराखंड में बन रहे सभी बड़े बाँधों का विरोध करेंगे। इन संगठनों ने बड़े बाँधों के स्थान पर छोटे बाँध व ‘रन ऑफ रिवर’ के तहत परियोजनायें बनाये जाने की माँग की है। उत्तराखंड में समय-समय पर जन सरोकारों के [...]
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