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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 28, 2011 पर प्रकाशित
ऊँचाई के क्षेत्रों में फलों तथा सब्जियों का उत्पादन इस साल बहुत कम हो गया। इसका कारण बदलता हुआ पर्यावरण ही था। माल्टा, जो अब पेड़ों से दुकानों में आने लगा है, की पैदावार बहुत कम हो गई है। उसका आकार, रंग तथा छिलका भी पहले की अपेक्षा निम्न कोटि के हो गए हैं। फल [...]
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लेखक : विजय जड़धारी :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 7, 2010 पर प्रकाशित
‘बीज बचाओ आंदोलन’ द्वारा 29-30अप्रैल 2010 को खाड़ी एवं नागणी में आयोजित गोष्ठी में समाजसेवियों, किसानों वैज्ञानिकों एवं बुद्धिजीवियों ने दो दिन के विचार विमर्श के बाद अनेक प्रस्ताव पास किए। यह माँग की गयी कि उत्तराखण्ड में जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिये अतिरिक्त सब्सिडी दी जाये। यहाँ रासायनिक खादों एवं कीटनाशकों का [...]
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लेखक : संजीव भगत :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
विकास की स्पष्ट दिशा निर्धारित न होने के कारण उत्तराखण्ड राज्य के कई क्षेत्रों में हालात उत्तर प्रदेश के समय से भी बदतर हो गये हैं और प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इसका नुकसान उत्तराखण्ड राज्य की जनता को उठाना पड़ रहा है। वनों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। उत्तराखण्ड के लगभग 23 [...]
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लेखक : पुरुषोत्तम शर्मा :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
अभी हाल में उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के लिए एक नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया है। इस मसौदे में क्या है यह तो पता नहीं पर इसे तैयार करने का काम जिस तरह किया गया वह पूरी तरह आपत्ति करने लायक है। राज्य के लिए नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया जा [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2009:: वर्ष :: 33 :December 22, 2009 पर प्रकाशित
खेती पर निर्भर पहाड़ के जीवन पर इस साल मौसम की बहुत बुरी मार पड़ी। पिछले साल बर्फ न पड़ने तथा बहुत कम वर्षा के कारण रबी की खेती चौपट रही। अभी जाड़े की फसलें बटोरी जा रही हैं। उनमें भी कुछ हाथ नहीं लग रहा है। जोशीमठ के ऊँचे क्षेत्र में जाडे़ की फसलें [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2008:: वर्ष :: 31 :June 14, 2008 पर प्रकाशित
नैनीताल जनपद के एक दूरस्थ गाँव के युवक कैलाश सिंह बिष्ट की ख्याति अब बहुत दूर तक पहुँच चुकी है। हर्बल खेती करते-करते 23 मार्च 2007 को वे राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तक पहुँच गये। विकास खंड धशारी स्थित ग्राम सभा सुंदरखाल में कार्यरत कैलाश के पिता एक [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2008:: वर्ष :: 31 :May 14, 2008 पर प्रकाशित
उत्तराखंड के 7,000 फीट से अधिक ऊँचाई वाले चमोली, धारचूला के सरहदी इलाकों आदि में आलू ही मुख्य खेती है। किसान इस आलू से ही अपना जीवन चलाता है। कुछ सालों से आलू की खेती कठिनाइयों का शिकार हो गई है। इसका मुख्य कारण है आसपास के जंगलों में सुअरों की तेजी से बढ़ती संख्या, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 31, 2008 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : माधवानन्द मैनाली पर्वतीय जनपदों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में की जाने वाली खेती के लिये एक परिवार के पास दो बैल, एक भैंस और एक गाय पालना निहायत जरूरी है। खेत को खाद, बच्चों के लिये दूध और खेती कार्य हेतु बैल चाहिये। जंगलों के विनाश ने चारे की समस्या विकट कर दी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 31, 2008 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : कुलदीप सिंह नेगी नैनीताल जनपद के विकासखंड भीमताल में स्थित ग्राम सभा चोपड़ा (कभी-कभार रोवड़ा या रोपड़ा के नाम से भी जाना जाता है), ज्योलीकोट के समीप स्थित ‘गिरिजा हर्बल फार्म’ एक महत्वपूर्ण गतिविधि में संलग्न है। गर्म व तर जलवायु में स्थित इस फार्म में पूरन चन्द्र चंदोला ‘आओ हम सब मिलकर [...]
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लेखक : शिरीष कुमार मौर्य :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
जैसे बिल्ली के भाग से छींका टूटता है, वैसे ही कभी-कभार साहित्य और प्राध्यापन के एकरस काम में लगे मुझ जैसे किसी आदमी को मिलती है ‘बारहनाजा’ जैसी अद्भुत किताब। एक किताब, जो पाठक को उसकी जड़ों तक ले जाती है और यह अनुभव कराती है कि उसने अपने कई-कई नए तकनीकी सन्दर्भों से भरे [...]
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