लेखक : शिरीष कुमार मौर्य ::अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31:
जैसे बिल्ली के भाग से छींका टूटता है, वैसे ही कभी-कभार साहित्य और प्राध्यापन के एकरस काम में लगे मुझ जैसे किसी आदमी को मिलती है ‘बारहनाजा’ जैसी अद्भुत किताब। एक किताब, जो पाठक को उसकी जड़ों तक ले जाती है और यह अनुभव कराती है कि उसने अपने कई-कई नए तकनीकी सन्दर्भों से भरे [...]
लेखक : लक्ष्मण सिंह नेगी ::अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31:
पर्वतीय क्षेत्र की विशेष जलवायु में बगैर रासायनिक खाद व कीटनाशकों के पैदा होने वाले कृषि उत्पाद अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं। इस स्वाद का एक अन्य कारण वे परम्परागत बीज भी हैं, जो सदियों से यहाँ पर प्रयोग होते रहे हैं। हालाँकि उत्पादन बहुत कम है, किन्तु सुस्वादुपन व पौष्टिकता के कारण [...]
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