पशुओं की मंडी जैसा हो गया पौड़ी
स्थानीय नगर पालिका के लचर रवैये के कारण पौड़ी इन दिनों आवारा पशुओं की समस्या से जूझ रहा है। पर्यटक विहीन फिर भी पर्यटन नगरी कहे जाने वाले इस नगर में जिधर भी चले जायें वहाँ इन आवारा गोवंशीय पशुओं का बोलबाला दिखता है। कन्डोलिया, सर्किट हाउस, लक्ष्मीनारायण मन्दिर मार्ग हो या नगर का अपर [...]
पशु-पक्षियों को आपदाओं का सहज नैसर्गिक पूर्वाभास होता है
रामस्वरूप सिंह चौहान विकसित सभ्यता के इस दौर में ऐसा लगता है, जैसे मनुष्य प्रत्येक प्रकार की विपदाओं से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। जबकि ऐसा है नहीं। पहले जब मनुष्य प्रकृति के घनिष्ठ सम्पर्क में रहता था, तब उसे शायद आने वाली विपदाओं का पूर्वाभास हो जाता था। पशु-पक्षियों में आज भी इस [...]
राजभवन की आपदा अबोध जानवरों पर टूटी
कमल जगाती 82 हेक्टर क्षेत्रफल, जिसका अधिकांश घना और खूबसूरत जंगल है, में फैला है नैनीताल का राजभवन, जिसे देश की अनमोल धरोहरों में गिना जाता है। 1900 में बना राजभवन इंग्लैंड के बर्मिंघम भवन की कॉपी है और गौथिक शैली का नायाब नमूना। फिलहाल इसमें श्रीमती मार्गरेट अल्वा राज्यपाल के रूप में काबिज हैं। [...]
अब वे काले वन कानूनों को बदलना चाहते हैं
प्रीति थपलियाल 23 मार्च 2011 को आत्मरक्षा में एक गुलदार को मारने के प्रकरण में पौड़ी जनपद के रिखणीखाल विकासखण्ड का धामदार गाँव के 5 पुरुष व दो महिलाओं को जेल हुई। [देखें नैनीताल समाचार रिपोर्ट एक , रिपोर्ट दो] । उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कोटद्वार के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने ‘जन अधिकार संयुक्त [...]
टी.एच.डी.सी. ने ग्रामीणों से धोखाधड़ी की
प्रस्तुति: जे. पी. मैठाणी टी.एच.डी.सी. द्वारा निर्माणाधीन विष्णुगाड़ पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना के विरोध में ग्राम सभा नौरख पीपलकोटी के ग्रामीणों द्वारा पीपलकोटी में अपनी एक सूत्रीय माँग को लेकर विशाल जुलूस निकाला गया। महिलाओं ने प्रदर्शन में खाली कण्डियों एवं दराँतियों के साथ शिरकत की। परियोजना में वर्ष 2007 में पीपलकोटी से मैनागाड़ तक सड़क [...]
गोविन्द वन्य जीव विहार तस्करों के निशाने पर
सीमान्त जनपद उत्तरकाशी के अन्तर्गत हिमांचल प्रदेश की सीमा से लगा हुआ गोविन्द वन्य जीव पशु विहार में कथियान के जंगल एवं जाख बीठ में जंगली पशुओं की तस्करी जारी है। यहाँ अन्तर्राष्ट्रीय वन्य जीव तस्करों का गिरोह कई वर्षों से अपनी पैठ बनाये हुए हैं। विभागीय अधिकारी खानापूर्ति के लिए गिरफ्तारी भी करते ही [...]
आओ जंगल-जंगल खेलें
हिमालय, बर्फ, जंगल और पानी उत्तराखंड की शान हैं। लेकिन जैसे औरत की खूबसूरती कई बार उसके लिये अभिशाप हो जाती है, उसी तरह हमारी ये निधियाँ भी हमारे लिये संकट का कारण बन गई हैं। एक ओर हमारी सरकार ‘ग्रीन बोनस’ की माँग कर रही है कि जिस तरह कुम्भ या आपदा के बहाने [...]
स्वस्ती श्री: परिसीमन, वन्य जीवन और अवैध शराब
क्या परिसीमन करवायेगा एक और राज्य आन्दोलन? उत्तराखण्ड राज्य बने दस वर्ष हो चुके हैं। लेकिन आज भी कुछ प्रश्न उठ रहे है। आखिर राज्य की मांग क्यों की गई ? राज्य बनने के पश्चात सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक लाभ किसे हुआ। क्या फिर पहाड़वासियों का शोषण होता रहेगा ? या एक नये उत्तराखण्ड आन्दोलन [...]
कसूरवार कौन ? आदमी या वन्य जीव…
उत्तराखंड में लंबे समय से वन्य प्राणियों और आबादी के मध्य ‘भूख’ मिटाने की लड़ाई चल रही है। आबादी के साथ ही गुलदार को भी इसकी कीमत अपनी जान चुकाकर देनी पड़ रही है। गुलदार, बाघ, हाथी, सुअर जैसे जंगली जानवरों का कहर यहाँ की आबादी पर टूट रहा है। शेही, बंदर जैसे कई जंगली [...]
बिनसर वन्य जीव विहार प्रभावित ग्रामीणों तथा प्रशासन में वार्ता शुरू
ईश्वर जोशी उत्तराखण्ड संसाधन पंचायत, लोक प्रबंध विकास संस्था तथा वन पंचायत सरपंच संगठन ताकुला के संयुक्त तत्वावधान में बिनसर वन्य जीव विहार से प्रभावित गाँवों की समस्याओं को लेकर एक बैठक 24 दिसम्बर 2010 को अयारपानी स्थित बिनसर अभयारण्य के राजि कार्यालय में संपन्न हुयी। बैठक में आयोजक संगठनों के प्रतिनिधियों के अलावा भारत [...]
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