गूंजी कुमाऊँ महोत्सव की धमक
बागेश्वर: पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत की पहल पर बागेश्वर में 3 दिन तक चले कुमाऊँ महोत्सव में कई प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिला। उत्तरायणी के बाद ही हुए इस महोत्सव के बारे में जनता का कहना था कि इस बेशकीमती क्षणों को यदि कुमाऊँ शरदोत्सव के नाम से जाडों की रामलीला में खर्च किया [...]
आशल कुशल – फरवरी 2008
शीत का प्रकोप इस वर्ष जोरों पर है। लगातार गिर रहे तापमान ने लोगों के होश उड़ा दिये हैं। हालाँकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में ठीक-ठाक वर्षा हुई है, लेकिन अधिकांशतः वर्षा अभी औसत से नीचे ही है। राजनीति इन दिनों पौड़ी लोक सभा उपचुनाव के आसपास ठहर कर रह गई है। नैनीताल जनपद में [...]
उत्तरायणी मेला: इस बार मौसम भी रूठा रहा
इस बार बागेश्वर के सरकारी उत्तरायणी मेले के आयोजन को लेकर शुरूआत में प्रशासन असमंजस में फँसा रहा। अन्ततः जैसे- तैसे में ‘मेला समिति’ का गठन हुआ और शासन से दस लाख रुपये आने की भनक पड़ी तो वर्ष भर सोयी रहने वाली नगरपालिका परिषद् भी सक्रिय हो गयी। गली, मुहल्ले, सड़कें, नालियाँ साफ होने [...]
सफरानामा पूना से मारूति-800 कार बागेश्वर पहुँचाने का – 1
यह ठीक दो साल पहले की बात है। दिन- वार ठीक से याद नहीं। अक्टूबर का महीना था। उन दिनों रामलीला (ऐं) चल रही थी। अल्मोड़ा से तीन जने दिल्ली के लिये रवाना हुए – बागेश्वर से केशव, अल्मोड़ा से रज्जन बाबू और मैं। हमें पूना से एक मारूती 800 कार बागेश्वर पहुंचानी थी। केशव [...]
स्वामी आलोकानन्द की मौत का विश्वास नहीं होता!
8 नवम्बर को सुबह जब कपकोट तहसील के, दूरस्थ सूपी गाँव से गोविन्द सिंह का फोन आया कि स्वामीजी नहीं रहे तो एकाएक यकीन नहीं हुआ। वैष्णव सम्प्रदाय के स्वामी आलोकानन्द लगभग 15 वर्षों से शिव मंदिर में रह रहे थे। बताया गया कि 7 नवम्बर की सायं उन्होंने शायद कोई जहरीला पदार्थ खा लिया। [...]
आशल-कुशल अक्टूबर 2007
बरसात के तत्काल बाद एकदम ठंड के उतर आने से पहाड़ अब जाड़ों की तैयारी में जुट गये हैं। धुमाकोट के बहुप्रचारित चुनाव के निपट जाने के बाद भी प्रदेश की खंडूरी सरकार बहुत गतिशील नहीं हो पायी है। नैनीताल बिंदुखत्ता क्षेत्र में पुलिस की शह पर चल रहे कच्ची शराब के अवैध व्यापार से [...]
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