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लेखक : रमदा :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
नदी का सम्बन्ध पानी से है और रहिमन पानी राखिये बिन पानी सब सून…….से लेकर तीसरे विश्व युद्ध के पानी के लिए लड़े जाने की आशंकाओं तक पानी की अहमियत जगजाहिर है। पानी जीवन आधारक बुनियादी संसाधन है। पानी के भीतर सूक्ष्म जीवन अंकुरित होता है……कालान्तर में पुष्पित पल्लवित होती है एक पूरी खाद्य-श्रंखला। पानी [...]
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लेखक : विजय जुयाल :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
पंचायतों के बारे में मेरी कई ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों व प्रमुखों आदि से चर्चा हुई। यहाँ केवल पौड़ी जिले के यमकेश्वर विकास खंड में ढाँसी, तल्ला ढाँगू के ग्राम प्रधान वीरेन्द्र सिंह रावत व स्योली के ग्राम प्रधान राकेश गौड़ से हुई चर्चा का उल्लेख किया जा रहा है। वीरेन्द्र रावत और राकेश [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : राजेन्द्र सिंह भाकुनी मेरे ग्राम प्रधान बनने की भी एक कहानी है। सुनोली अल्मोड़ा जिले के ताकुला विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम सभा है और बिनसर वन्य जीव विहार से बुरी तरह प्रभावित है। कई तोक गाँव जीव विहार की परिधि के भीतर हैं। मैं 1972 में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स में सिपाही [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : ललित जोशी अब तक पंचायती राज में कृषि उत्पादन में वृद्धि, ग्रामीण उद्योगों व सहकारी संस्थाओं का विकास, स्थानीय श्रम शक्ति एवं अन्य संसाधनों का पूर्ण उपयोग, ग्रामीण जनसंख्या की सामाजिक-आर्थिक दशा में सुधार एवं स्व-सहायता की भावना में वृद्धि देखी गयी है। यद्यपि अभी इसमें व्यापक सुधार की गुंजाइश है। परंतु ग्रामीण [...]
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लेखक : शमशेर सिंह बिष्ट :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
पंचायतों को लेकर लोगों की मानसिकता में बदलाव आ रहा है और सरकार की भी। लोग समझने लगे हैं कि चाहे ग्राम पंचायत हो अथवा नगरपालिकायें, उनको लापरवाही से नहीं लिया जा सकता। शायद वे इन्तजार भी कर रहे हैं कि अभी ये संस्थायें और ज्यादा शक्तिशाली होंगी। यह एक अच्छा लक्षण है। इस साल [...]
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लेखक : यायावार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
यह मेरा गाँव है। इसका नाम अब ‘इकचुलिया गाँव’ है। पहले कभी इस गाँव में तीस परिवार बसते थे, अब एक परिवार है। आप सोचते होंगे कि पलायन ने गाँव खाली कर दिया। आप इससे इतर सोच भी क्या सकते हैं ? पर हाँ, यहाँ पलायन जैसा कुछ नहीं हुआ, उलटे बाहर से आकर पाँच-छः [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
(6 जून 2000 के अमर ‘उजाला में प्रकाशित’ इस लेख की प्रति हमें पी.यू.सी.एल., उ.प्र. के अध्यक्ष रवि किरण जैन से प्राप्त हुई। इन 6 वर्षों में केरल में पंचायतों की स्थिति बदतर हुई अथवा बेहतर, हमें नहीं मालूम; किन्तु यह वृतान्त ग्राम गणराज्य स्थापित करने की दिशा में उत्तराखंड की मदद कर सकता है।) [...]
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लेखक : सुरेन्द्र पुंडीर :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली अशिक्षा व प्रशिक्षण के बिना अधूरी नजर आती है। इसकी वजह से बहुत सी दिक्कतें सामने आ रही है। यह एक बड़ी चुनौती है कि प्रतिनिधियों को पंचायत राज एक्ट की कोई जानकारी नहीं है। इस सिलसिले में ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर जिला टिहरी गढ़वाल के जौनपुर विकास [...]
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लेखक : प्रेम पंचोली :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
सन 1993 में 73वाँ तथा 74वाँ संविधान लागू होने से उम्मीद जगी थी कि भारत के सभी गाँव जल्दी ही विकास की मुख्य धारा से जुड़ जायेंगे। तब कहा गया था कि पंचायतों के अधीन 29 विभाग होंगे, किन्तु 14 वर्ष गुजर जाने के बाद भी मात्र शिक्षा विभाग ही पंचायतों के अधीन किया गया [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2007:: वर्ष :: 31 :August 15, 2007 पर प्रकाशित
नैनीताल में ‘दादी अम्मा’ के नाम से मशहूर श्रीमती बसन्ती साह ने इस वर्ष 25 जनवरी 2007 को 100 वर्ष पूरे कर लिये हैं। उनके सबसे बड़े पुत्र सतीश लाल साह वाडिया इन्स्टीट्यूट में डायरेक्टर थे। अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। दूसरे बेटे राजा मोहन साह वकालत करते हैं। पुत्री माहेश्वरी भी अध्यापिका थीं, अब [...]
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