किताबों के बारे में : उत्तराखण्ड की लोक कलाएं एवं शिल्प कौशल
उत्तराखण्ड के पर्वतीय भूगोल में खेती व पशुपालन के विकास, मकानों व मंदिरों का निर्माण, धुनने, कातने, बुनने, खेती व वाद्ययंत्रों के निर्माण, आभूषण बनाने, धातुओं को शोधने, मिट्टी व लकड़ी के बर्तन बनाने, कागज, रंग-रोगन व श्याहियों के निर्माण, चमड़े व औषधियों के परिष्करण सहित उनके उत्पादों के रख-रखाव आदि को लेकर मानवीय जीवन [...]
किताबों के बारे में
बीस सालों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही उत्तराखण्ड की स्वयंसेवी संस्था ‘सिद्ध’ ने पिछले दिनों ‘इतिहास की समझ शिक्षक मार्गदर्शिका’ प्रकाशित की, जिसकी चर्चा देश भर में हुई। इस किताब को भी कुसुमा ट्रस्ट हैदराबाद के सहयोग से प्रकाशित किया गया है। दरअसल जो हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वह समाज [...]
रवाँई से उत्तराखण्ड: एक रोचक यात्रा वृतान्त
प्रस्तुति : प्रो. डी.डी. शर्मा सर्वतोमुखी प्रतिभा एवं बहुविज्ञता के धनी डॉ. प्रयाग जोशी के यात्रा वृतान्त में समाविष्ट हैं शीर्षक द्वारा परिसीमित भूभाग की विभिन्न धरातलीय स्थितियाँ, जलवायु, कृषि एवं वनस्पतियों उनके लोकोत्सवों एवं धार्मिक उत्सवों, आस्थाओं, विश्वासों, दैवीन्याय के तरीकों रहन-सहन व खान-पान के तरीकों, सामाजिक व सांस्कृतिक व्यवस्थाओं, वस्त्राभूषणों, आवासीय व्यवस्थाओं, क्षेत्रीय [...]
जैविक खेती पर महत्वपूर्ण पुस्तकें
अरुण डिके हमारी पारंपरिक जैविक खेती को पूरे विश्व में प्रचारित करने वाले अंग्रेज कृषि वैज्ञानिक सर अलबर्ट हॉवर्ड 1872-1940 की दुर्लभ पुस्तक ‘एन एग्रीकल्चर टेस्टामेंट’’ 1948 का हिन्दी अनुवाद ‘एक खेती का वसीयतनामा’ और सम्पूर्ण भारत में बरसों से सफल जैविक खेती करने वाले मशहूर एक हजार किसानों के नाम और पते दर्शाती ‘निर्देशिका’ [...]
किताबों के बारे में
महेश पुनेठा का नया संग्रह ’भय अतल में’ की कविताएँ अंदर तक छूती हैं। न सर के ऊपर जाती हैं न कोफ्त पैदा करती है। हर कविता में अपनापन और घरेलूपन दिखता है और अन्य कवितायें पढ़ने के लिए विवश करता है। यह विवशता सार्थक होती है। इसमें मजा ही नहीं आता यह अंदर भी [...]
किताबों के बारे में
‘मध्य हिमालय: पर्यावरण एवं वन्य जीवन’ / लेखक: प्रो. बी. पी. जोशी / प्रकाशक: नीलाम्बर जोशी स्मृति संस्थान, चीनाखान, अल्मोड़ा / मूल्य: रु. 95 (जन संस्करण) और रु. 150 (पुस्तकालय संस्करण) । जनाधारित विकास पर बुनियादी हस्तक्षेप के लिए देश-विदेश में सुपरिचित प्रोफेसर बी. पी. जोशी की इस महत्वपूर्ण पुस्तक में 120 पृष्ठों को पर्यावरण,समस्या [...]
सम्पादकाचार्य की याद में शोध ग्रन्थ
ललिता चंदोला वैष्णव द्वारा सम्पादित शोध ग्रंथ ‘सम्पादकाचार्य पंडित विश्वम्भर दत्त चंदोला’ में चंदोला जी की जीवनी तथा उनके लेखन को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सामग्री है। विशेषकर ‘गढ़वाली’ में उनके द्वारा लिखे गये सम्पादकीय और उनके संस्मरणात्मक लेख, 1 जून 1925 को दुगड्डा में हुए गढ़वाल नवयुवक सम्मेलन के अधिवेशन में सभापति के तौर पर [...]
ईष्र्या, द्वेष और लालच की प्रवृत्ति पर चुटीला व्यंग्य है ‘पाणि’
नरेन्द्र कठैत गढ़वाली के उभरते हुए समर्थ रचनाकार हैं। 2003 मे डॉ. आशाराम’ के नाम से उनका गढ़वाली हास्य व्यंग्य नाटक प्रकाशित हुआ था। लेकिन 2006 में प्रकाशित हुए काव्य संग्रह ‘कुल्ला पिचकारी’ और इस वर्ष ‘पाणि’ खण्डकाव्य प्रकाशित हुआ है। नरेन्द्र कठैत गढ़वाली के उन गिने-चुने लेखकों में हैं जिन्होंने हर विधा में कलम [...]
अक्षरों के पुल के नीचे बहती-थमती कवितायें
दिवा भट्ट के कविता संकलन ‘अक्षरों के पुल’ की कवितायें महज एक स्त्री के गुनगुने भाव लोक भर की कवितायें नहीं हैं, जैसा कि आम तौर पर स्त्री लेखन में देखा जाता है। ये कवितायें दरअसल उस विचार के विरोध की कवितायें हैं, जो लेखकों को स्त्री और पुरुष के खेमों में बाँटकर देखता आया [...]
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