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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :April 5, 2011 पर प्रकाशित
प्रगतिशील सांस्कृतिक पर्वतीय समिति द्वारा आयोजित 19वें बसंतोत्सव में पहाड़ की लोकसंस्कृति के अनेक रंग देखने को मिले। प्रदेश के कोने-कोने से आए लोक कलाकारों ने ऐतिहासिक संस्कृति व पौराणिक लोक गाथाओं पर आधारित नृत्य नाटिकाओं का मंचन कर दर्शकों को भाव विभोर किया। बीते 19 सालों से समिति बगैर सरकारी मदद के जन सहयोग [...]
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लेखक : प्रयाग जोशी :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 28, 2011 पर प्रकाशित
हल्द्वानी के नवाबी रोड स्थित आनन्दधाम निवासी 86 वर्षीय डॉ. डी.डी. शर्मा को इस वर्ष पद्मश्री के अलंकरण से सम्मानित किया गया है। 2011 के वर्ष इस सम्मान से नवाजे गए, उत्तराखण्ड के वे अकेले व्यक्ति हैं। उन्हें अलंकृत होने की खबर से जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल तक फैले हुए हिमालयी राज्यों के कलमजीवियों [...]
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लेखक : उदय किरौला :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 8, 2010 पर प्रकाशित
विभिन्न अंचलों के अपने-अपने लोकनृत्य होते हैं। कुमाऊँ का लोकनृत्य छोलिया नृत्य कहा जाता है। इस नृत्य को करने वालों को छोल्यार कहा जाता है। यह नृत्य प्रायः पुरुषों द्वारा किया जाता है। यह नृत्य यहाँ श्रृंगार व वीर रस दो रूपों में देखने को मिलता है। कुमाऊँ के पाली पछाऊँ में प्रचलित छोलिया नृत्य [...]
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लेखक : जुगल किशोर पांडे :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 22, 2009 पर प्रकाशित
ग्रामीण परिवेश में रह रहे लोगों की अपने देवी देवताओं को मानने की परम्परा लम्बे समय से चली आ रही है। पिथौरागढ़ के कुमौड़ गाँव में आयोजित हिलजात्रा पर्व पर लखिया भूत को पूजने के साथ ही उसे प्रसन्न भी किया जाता है। हिलजात्रा आयोजन समिति के अध्यक्ष गोबिन्द सिंह महर (गोपू) के अनुसार हिलजात्रा [...]
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लेखक : आनन्द बल्लभ उप्रेती :: अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :February 15, 2009 पर प्रकाशित
विकृत होते सांस्कृतिक परिवेश के बीच जब हम कुमाऊँ अंचल की होली परम्परा की ओर नजर दौड़ाते हैं, तो सुखद आश्चर्य होता है। एक विशुद्ध परम्परा की इस होली गायकी ने यहाँ के लोक जीवन में स्वाभाविक रूप से प्रवेश कर लिया और शास्त्रीयता की जटिलता और प्रारम्भिक ज्ञान के अभाव के बीच जिस तरह [...]
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लेखक : चंदन बंगारी :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 14, 2008 पर प्रकाशित
रामनगर में होने वाले वसंतोत्सव में हर साल की तरह प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आये लोक कलाकारों ने ऐसा रंग बिखेरा कि पाँच दिनों तक रामनगर उत्तराखंड की लोक संस्कृति में सराबोर हो गया। गौरतलब है कि प्रतिवर्ष कुमाऊँ व गढ़वाल की संस्कृति के संगम माने जाने वाले रामनगर में वसंत पंचमी के अवसर [...]
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