लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2012:: वर्ष :: 35 :January 16, 2012 पर प्रकाशित
मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तिथि 30 जनवरी रख कर उत्तराखंड निवासियों के मुँह पर करारा थप्पड़लगाया है। फिलहाल वोट के मैदान में मछली बाजार लगाने वालों के कोलाहल में उत्तराखंडवासियों की कराह घुट कर रह गई है, मगर इस एक घटना ने यहाँ के निवासियों को उनकी [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged chief election commissionor, election, uttarakhand election 2012, uttarakhand politics, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 17, 2011 पर प्रकाशित
इस पखवाड़े चर्चा में आयी तीन प्रमुख घटनाओं से देश का मौजूदा परिदृश्य समझने में मदद मिलती है। केन्द्र सरकार ने खुदरा व्यापार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को अनुमति देने का निर्णय किया है। इसका न सिर्फ समाज के प्रबुद्ध लोगों और आन्दोलनकारी संगठनों ने विरोध किया है, बल्कि पक्ष-विपक्ष के सभी राजनैतिक दल, जो [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged corporate, corporate corruption, corporation, fdi in retail, globalisation, maoism, naxalism, society, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 1, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड राज्य बने 11 वर्ष पूरे हो गये। जो प्रदेश जनता द्वारा सुदीर्घ आन्दोलन और दर्जनों प्राण न्यौछावर कर प्राप्त किया गया हो, उसके स्थापना दिवस पर वैसा ही उत्साह दिखाई देना चाहिये था, जैसा दीवाली या ईद जैसे त्यौहारों पर होता है। लेकिन आम जनता द्वारा इस महत्वपूर्ण दिन की पूरी तरह उपेक्षा करना [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged gairsain, gairsain capital movement, uttarakhand forming day, uttarakhand sthapna divas, राज्य प्राप्ति आन्दोलन, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 06 || 01 नवंबर से 14 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :November 15, 2011 पर प्रकाशित
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस निर्णय, जिसमें अदालत ने प्रदेश में भूमि खरीद की सीमा तय करने के लिये बने कानून को निरस्त कर दिया था, पर रोक लगाने से उत्तराखंड आन्दोलनकारियों और सभी प्रबुद्ध लोगों ने राहत की साँस ली है। उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला आते ही भू माफिया की बाँछें खिल [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged court, court verdict, government, high court, land act, land mafia, mafia, rajiv lochan sah, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 30, 2011 पर प्रकाशित
हालाँकि पिछले दिनों मीडिया ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा हजारे द्वारा चलाये जा रहे अभियान में जरूरत से ज्यादा बढ़-चढ़ कर हिस्सेदारी की, लेकिन इससे यह सच्चाई खत्म नहीं हो जाती कि मीडिया और एन.जी.ओ. देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं, क्योंकि ये दोनों मिल कर कॉरपोरेट साम्राज्यवाद, जो भ्रष्टाचार की गंगोत्री है, के हाथ [...]
Posted in विविध | Tagged anna effect, journalism, journalists, media, media power, paid news, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 15, 2011 पर प्रकाशित
भ्रष्टाचार की दिनोंदिन लंबी होती फेहरिस्त में अब गृह मंत्री पी. चिदम्बरम का नाम उछलने से बहतु सारे लोग भौंचक्के हो सकते हैं, लेकिन इस घटना पर आश्चर्य करने की कोई जरूरत नहीं है। 20 वर्ष पूर्व आर्थिक उदारीकरण का जो रास्ता हमने अपनाया उसने देश की पूरी तरह केन्द्रीकृत सत्ता व्यवस्था के साथ मिल [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged economics, finance minister, globalisation, liberalization, manmohan singh, p.chidambaram, world bank, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 1, 2011 पर प्रकाशित
28 अगस्त को उधमसिंह नगर के सितारगंज में काँवड़ियों की पुलिस से मारपीट एक बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इसका निहितार्थ तो यह है कि यदि किसी समूह के पास राजनैतिक संरक्षण है तो वह पुलिस से भी मोर्चा ले सकता है। दो वर्ष पूर्व कालाढूँगी कांड में भी यह प्रवृत्ति दिखाई दी थी। पक्ष-विपक्ष के [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged government, hindu religion, kanwar yatra, police, sawan, sitarganj, सम्पादकीय |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 2, 2011 पर प्रकाशित
15-30 जून अंक में ‘ये समस्यायें सुनने वाले’ के जरिये लेखक ने जगह-जगह उग आए तथाकथित नेताओं (जिन्हें लेखक ने लगुआ-भगुवा कहा) की अच्छी खबर ली है। आम चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे छद्म नेताओं ने भी जनता के साथ नजदीकियाँ गाँठ ली हैं। हताश-परेशान जनता इनकी छाँह तले थोड़ा सुकून (कोरे आश्वासन) पाकर धन्य-धन्य [...]
Posted in आपकी बात, चिठ्ठी पत्री | Tagged census 2011, girda, intellecutuals, mail from readers, nainital samachar, चिठ्ठी पत्री, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 2, 2011 पर प्रकाशित
पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ ऐसे निर्णय दिये हैं, जिससे न्यायपालिका की गिरती हुई छवि साफ हुई है और उसे पुनः प्रतिष्ठा मिली है। छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम को खत्म कर एस.पीएओ. से हथियार वापस लेने, ग्रेटर नोएडा में प्राधिकरण को किसानों से अधिग्रहीत जमीन को वापस करने और आयोडीनयुक्त नमक को खत्म करने [...]
Posted in सम्पादकीय | Tagged chhatisgarh, court, democracy, government, judgment, justice, salwa jadoom, सम्पादकीय |
लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 26, 2011 पर प्रकाशित
स्वामी रामदेव के बच जाने और स्वामी निगमानन्द के शहीद हो जाने के बाद देश और प्रदेश की राजनीति का कुरूप चेहरा और अधिक स्पष्ट होकर सामने आया है। इन घटनाओं ने बेहयाई और संवेदनशून्यता की सारी हदें पार कर दी हैं। दोनों बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ, भाजपा और कांग्रेस, इन घटनाओं के बहाने एक दूसरे [...]
Posted in भ्रष्टाचार, विविध, सम्पादकीय | Tagged anna hazare, nigmanand fast, people, people against corruption, ramdev fast, भ्रष्टाचार, सम्पादकीय |
पृष्ठ 1 कुल 5 पृष्ठों में..पृष्ठ : 12345»
आपकी टिप्पणीयाँ