सम्पादकीय : विधानसभा में अराजकता
उत्तराखंड में एक बार फिर अराजकता की स्थिति है। विधानसभा का सत्र ही नहीं चल पा रहा है। हमारे विधायक समझ रहे होंगे कि जब संसद के उच्च सदन, राज्य सभा में ‘महिला आक्षरण विधेयक’ को लेकर तमाम पार्टियों के प्रतिनिधि शर्मनाक हरकतें कर रहे थे तो उन्हें भला क्यों पीछे रहना चाहिये। विधायिका में [...]
उत्तराखंड में माओवाद या माओवाद का भूत ? !!
उत्तराखंड में माओवाद का कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। अब तक इस तरह की कोई वारदात नहीं हुई है। पुलिस जासूसी उपन्यासों की तर्ज पर कुछ कहानियाँ बना कर पकड़-धकड़ कर रही है तो उसकी मजबूरियाँ हैं। केन्द्र से माओवाद को नियंत्रित करने के नाम पर जो पैसा मिलना है, उसका लालच बहुत बड़ा है। [...]
महात्मा, माओवाद और मोदी
पोरबंदर…. पहली बार गुजरात आने का सुयोग मिला तो तय किया कि अपनी यात्रा वहीं से शुरू करूँगा, जहाँ से 140 वर्ष पहले महात्मा गाँधी ने अपनी जीवन यात्रा शुरू की थी। उस वक्त तो जेहन में यह भी नहीं था कि वह तो 30 जनवरी का मौका होगा और हो सकता है कि गुजरात [...]
वर्ष 2009 ? ……मगर उम्मीद पर तो दुनिया जीती है !
हर साल आखिरी दिनों में होने वाली कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं के कारण याद रह जाता है। 2008 का साल मुम्बई के आतंकी हमलों के कारण अविस्मरणीय हो गया था तो 2007 का वर्ष बेनजीर भुट्टो की हत्या के कारण। वर्ष 1992 बाबरी मस्जिद के ध्वंस के कारण इस तरह दिमाग में खुद गया है कि [...]
जी रौं लाख सौ बरीस!
जी रौं लाख सौ बरीस! ‘नैनीताल समाचार’ के इस होली विशेषांक के लिये काव्य रचनायें जुटाने वाले युवा कवि शिरीष मौर्य जी रौं लाख सौ बरीस! भारत के संविधान का सच्चा चेहरा दिखाने वाले रविकिरण जैन जी रौं लाख सौ बरीस। जिनकी रचनायें इस अंक में प्रकाशित हो सकीं वे, जो वादा कर के समय [...]
नदी अंक के साथ 32 वें वर्ष में प्रवेश
इस अंक के साथ नैनीताल समाचार अपने 31 वर्ष पूरे कर 32वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह जनमबार अंक हम ‘नदी अंक’ के रूप में निकाल रहे हैं। हालाँकि यह अंक उस रूप में नहीं निकल पा रहा है, जैसा हम चाहते थे या जैसे हमारे अब तक के जनमबार अंक निकलते रहे [...]
ठेकेदार अफसर गठबंधन से डरने की जरूरत नहीं
पंचायतों के बारे में मेरी कई ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों व प्रमुखों आदि से चर्चा हुई। यहाँ केवल पौड़ी जिले के यमकेश्वर विकास खंड में ढाँसी, तल्ला ढाँगू के ग्राम प्रधान वीरेन्द्र सिंह रावत व स्योली के ग्राम प्रधान राकेश गौड़ से हुई चर्चा का उल्लेख किया जा रहा है। वीरेन्द्र रावत और राकेश [...]
सहयोग-सौहार्द होना पहली शर्त है
प्रस्तुति : राजेन्द्र सिंह भाकुनी मेरे ग्राम प्रधान बनने की भी एक कहानी है। सुनोली अल्मोड़ा जिले के ताकुला विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम सभा है और बिनसर वन्य जीव विहार से बुरी तरह प्रभावित है। कई तोक गाँव जीव विहार की परिधि के भीतर हैं। मैं 1972 में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स में सिपाही [...]
केरल से विकास के कुछ सबक
(6 जून 2000 के अमर ‘उजाला में प्रकाशित’ इस लेख की प्रति हमें पी.यू.सी.एल., उ.प्र. के अध्यक्ष रवि किरण जैन से प्राप्त हुई। इन 6 वर्षों में केरल में पंचायतों की स्थिति बदतर हुई अथवा बेहतर, हमें नहीं मालूम; किन्तु यह वृतान्त ग्राम गणराज्य स्थापित करने की दिशा में उत्तराखंड की मदद कर सकता है।) [...]
जनजाति क्षेत्र का बजट भी काम नहीं आ रहा जौनपुर की पंचायतों में
त्रिस्तरीय पंचायत प्रणाली अशिक्षा व प्रशिक्षण के बिना अधूरी नजर आती है। इसकी वजह से बहुत सी दिक्कतें सामने आ रही है। यह एक बड़ी चुनौती है कि प्रतिनिधियों को पंचायत राज एक्ट की कोई जानकारी नहीं है। इस सिलसिले में ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर जिला टिहरी गढ़वाल के जौनपुर विकास [...]
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