चिट्ठ्ठी – पत्री : दक्षिण एशिया ही है, जिसे पुरुषों ने अपना मूत्रालय बना रखा है
पेड़ की ओट में हल्का होने की आजादी पुरुषों को ही मुबारक हो नैनीताल समाचार के 15 मार्च के अंक में मुकेश नौटियाल का लेख ‘क्या महिलाओं को पूर्ण अधिकार दिला पायेगा महिला आरक्षण बिल’ पढ़ा और पत्र लिखने का मन किया। महिला आरक्षण बिल महिलाओं को संसद और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत सीटें [...]
चिठ्ठी पत्री : शिक्षा व्यक्तित्व के विकास का मार्ग प्रशस्त करती है
नैनीताल समाचार का शिक्षा पर केन्द्रित विशेषांक मिला, पढ़ कर अत्यन्त खुशी हुई। शिक्षा के विषय में सुनील, महेश पुनेठा, प्रभात उप्रेती, कपिलेश भोज, दिनेश कर्नाटक, बसन्ती पाठक, आशा पाण्डे, मनोहर चमोली, शम्भु राणा सहित रमदा का लेख मन को भाये। यही नहीं इनके विचारों पर गौर फरमाने की नितांत आवश्यकता है। उत्तराखण्ड राज्य की [...]
गनीमत है मैं आठवीं जमात से आगे नहीं गया….
भूखे से रोटी के बारे में लिखने को कहना तर्कसंगत लगता है, लेकिन अशिक्षित व्यक्ति को शिक्षा के बारे में लिखने को कहना बड़ा अटपटा सा लगता है और अशिक्षित भी ऐसा कि शहर में रहने और तमाम सुख-सुविधाओं के बाद भी सिर्फ अपने निखद्दपने के कारण अपनी शिक्षा पूरी न कर पाये। और उस [...]
उच्च शिक्षा यानी ‘वन नाईट फाईट’
मैं महाविद्यालय प्रांगण में घूम ही रहा था कि एक छात्र ने मुझसे पूछा, ‘‘सर पोल साइंस के फर्स्ट पेपर का नाम क्या है ?’’ मैंने पूछा-‘‘अरे परसों तो इक्जाम है, तुम अब पूछ रहे हो ?’’ तो उसने कहा, ‘‘तो क्या गुरुजी, ‘लक्ष्मी’ जिन्दाबाद। वन नाइट फाइट.. …….।’’ मैने कहा मतलब ? तो वह [...]
महासू के मन्दिर में घटी घटना शर्मनाक है
लगता है कि उत्तराखंड में अभी इक्कीसवीं सदी की शुरूआत नहीं हो पाई है। वर्ना क्या वजह है कि प्रदेश की कामचलाऊ राजधानी देहरादून वाले जिले में किसी को मंदिर में प्रवेश से रोका जाए ? हाल ही में अनुसूचित जाति की एक किशोरी के हनोल स्थित महासू देवता के मंदिर में प्रवेश पर न [...]
बहुत समय लगेगा उच्च शिक्षा को पटरी में लाने के लिये
उच्च शिक्षा (आशय बारहवीं के बाद की शिक्षा से है) के दो रूप हैं- ज्ञानमूलक एवं क्षमतामूलक। दोनों के बीच एक स्पष्ट विभाजक रेखा खींच पाना कठिन है किन्तु ‘बुद्धि के लिये बुद्धि का प्रशिक्षण’ एवं ‘क्रियात्मक शिक्षा या रोजगार के लिये दक्षता का प्रशिक्षण’ जैसी मोटी रेखा खींची जा सकती है। पहले प्रकार में [...]
आँकड़ों के आइने में उत्तराखंड की विद्यालयी शिक्षा
यहाँ पर हम आँकड़ों के द्वारा उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को जानने व समझने की कोशिश कर रहे हैं। यदि हम दशकीय साक्षरता देखें तो पायेंगे कि सन 1951 से पिछ्ली जनगणना जो सन 2001 में हुई थी उसमें यह 18.92 प्रतिशत से बढ़कर 71.6 प्रतिशत हो गया है। महिला साक्षरता का प्रतिशत 4.78 % [...]
गंगा
प्रस्तुति : नाजिश़ तमन्ना ‘‘कहाँ चली गयी थी तू, मेरे को बताया भी नहीं, मेरे से मिल कर क्यूँ नहीं गई, मुझे अच्छा नहीं लगा।’’ भरी दोपहरी में ऐसे ही अनगिनत सवालों कि बौछार में भींग रही थी मैं और इस बरसने वाली बदली का नाम था ‘गंगा’। अल्मोड़ा बाजार के सबसे व्यस्त चौराहों में [...]
एक शिक्षक की डायरी
26/11/2005 राजकीय हाई स्कूल में आज मेरा पहला दिन था। पहाड़ के स्कूल बहुत दूर-दूर हैं। यह स्कूल दुर्गम है। बच्चे उचक-उचक कर देख रहे थे। प्रिंसिपल मुझे कक्षाओं में ले गये। उन्होंने बच्चों को बताया कि अब मैं भी उन्हें पढ़ाउँगा। स्कूल ढेर सारे बच्चों का घर है। कई गाँव से आने वाले बच्चे, [...]
क्यों पढ़ाई में पिछड़ रही हैं उत्तराखंड की बेटियाँ
उत्तराखण्ड में लड़की के पैदा होने पर मातम नहीं छाता, न भ्रूण हत्या की समस्या विकराल है। महिलाओं की जन आन्दोलनों में ऐतिहासिक भागीदारी रही है और आज भी ग्रामीण महिलायें जागरूकता के कार्यक्रमों में हिस्सा लेती हैं। मगर आश्चर्य होता है कि इसी समाज में लड़की को शिक्षित होने से रोकने वाली अनेक शक्तियाँ, [...]
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