बच्चों की कार्यशाला…. अरे कान्हा बजै गयो बाँसुरिया
यह माना जाता है कि बच्चों को छुट्टी होने का घंटा प्रिय लगता है। मगर जब बच्चे छुट्टी का घंटा बजने पर भी पढ़ने-लिखने की बातें करें तो इसे आप क्या कहेंगे ? जी हाँ ! यह सब हुआ एक राजकीय इंटर कॉलेज में ‘सरल बाल लेखन’ की चार दिवसीय कार्यशाला में। बच्चे यहाँ चार [...]
बाबू बन कर रह गये हैं प्राइमरी अध्यापक
प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों का कहना हैं कि वे मास्टर कम और क्लर्क ज्यादा बन गये हैं। आधा समय तो रजिस्टर भरने में लग जाता है। समय-समय पर इन रजिस्टरों को अपडेट भी करना पड़ता है। यानी पढ़ाई हो या न हो, पर रजिस्टर तो अपडेट होने ही चाहिये। कोई अधिकारी भी जब विद्यालय में [...]
तोड़फोड़ से सकते में हैं कुमाऊँ वि.वि. के अध्यापक और कर्मचारी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अराजक कार्यकर्ताओं द्वारा कुमाऊँ विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में की गयी तोड़फोड़ के बाद अनिश्चित काल के लिए बंद कुमाऊँ विश्वविद्यालय खुल तो गया पर इस घटना से विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई सबक लिया हो ऐसा नहीं लगता। बाहर से सबकुछ सामान्य दिख रहे विश्वविद्यालय का अन्दरूनी माहौल बिलकुल सामान्य [...]
शिक्षा की तो पूरी सोच बदलने की जरूरत है
उत्तराखंड का शिक्षा विभाग शिक्षा में जिस गुणात्मक सुधार की कल्पना एवं कोशिश कर रहा है, वह धरातल पर सार्थक होता नहीं दिख रहा है। जब तक शिक्षा के मूलभूत ढाँचे में परिवर्तन एवं उसका शत-प्रतिशत पालन नहीं होता, केवल अधिकारियों की फौज खड़ी कर देने मात्र से काम बनने वाला नहीं है। यदि पाठ्यक्रम [...]
गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः, गुरूर्देवो महेश्वरः, गुरूः साक्षात्….
गुरूर्ब्रह्मा, गुरूर्विष्णुः, गुरूर्देवो महेश्वरः । गुरूः साक्षात्परं ब्रह्मं तस्मै श्री गुरुवै नमः ।। गुरु की महानता बखानता यह श्लोक मुझे बचपन के उन दिनों से याद है, जब मैं इसका अर्थ बिल्कुल भी नहीं जानता था। कुछ बड़ा होने पर जब जरा संस्कृत सीखी तो श्लोक का शब्दार्थ समझ में आया। मगर सच मानिये इसका [...]
शिक्षा राष्ट्र की सुरक्षा से कम जरूरी नहीं
हाल में राज्य में सरकारी विद्यालयों में बोर्ड का रिजल्ट सुधारने को गठित समिति ने सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपी हैं। समिति ने ऊपर से दिखायी देने वाली चीजों की ओर इशारा कर दिया और थोड़ा बहुत साहस दिखाकर कुछ क्षेत्रों में सरकार की चूक को भी स्वीकार किया। उसने माना कि विद्यालयों में सी.बी.एस.ई. [...]
शोध कार्य की दिशा कौन तय करेगा
हमारे विश्वविद्यालयों के लियेपहाड़ के बिगड़ते पर्यावरण पर खोज-खबर लेना तो दूर की बात रही, उस पर कुछ लिखा भी नहीं जा रहा है। यहाँ इस वर्ष अत्यधिक वृष्टि के कारण जुलाई, अगस्त और सितंबर में लगभग 350 लोगों की जीवनलीला समाप्त हो गई। इनमें सड़कों के टूटने और मोटर दुर्घटनाओं में 300 लोग मरे। [...]
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