सम्पादकीय : मीडिया आंख में धूल झौंकने का औजार है
यदि गणतंत्र दिवस मनाना एक कर्मकांड मात्र है तो कोई दिक्कत नहीं है। 26 जनवरी को राजपथ पर होने वाली सलामी और रंगारंग कार्यक्रमों से उसकी पूर्ति हो जाती है। लेकिन यदि हमें इस महादेश की सचमुच चिन्ता है तो यह मानना होगा कि हम बहुत बड़े खतरे में हैं। क्योंकि एक अरब से अधिक [...]
बच्चों को अनदेखा किया तो क्या होगा गणतंत्र का?
लोकगीत क्या होता है ? हमारे नौनिहाल पहाड़ में ही रह कर भी यह नहीं जानते। वाकया है एक टेलीविजन चैनल द्वारा आयोजित लोकगीत ऑडिशन का। रुद्रप्रयाग में आयोजित इस कार्यक्रम में दो बच्चों के गायन में बराबर नंबर आये हैं। इनके बीच अंतिम फैसला होना है। निर्णायक गैरसैंण के सरस्वती विद्यामंदिर में पढ़ रहे [...]
नॉन बी.एड. अध्यापकों से नाइंसाफी क्यों ?
बलवीर सिंह दानू शिक्षा विभाग द्वारा एल.टी. से प्रवक्ता ग्रेड में पदोन्नति सूची अनुमोदन हेतु लोक सेवा आयोग को भेज दी गई है तथा शीघ्र ही विभाग इसे जारी करने जा रहा है। इस सूची में आने वाले नॉन बी.एड. शिक्षकों को छोड़ दिया गया है। इन नॉन बी. एड. शिक्षकों में कला, व्यायाम, बी.टी.सी., [...]
यह शिक्षा व्यवस्था तो होनहारों का जीवन लीलने लगी
जिन शिक्षण संस्थानों में अपने बच्चों को दाखिला दिलवा कर माँ-बाप उनके सुनहरे भविष्य के सपने सँजोते हैं वे अब बच्चों के अन्दर कुंठाएँ भर रहे हैं। 18 जून को राजकीय इन्टर कॉलेज नैनीताल के छात्र अमित पाण्डे की खाई में गिर कर हुई मौत इस बात की पुष्टि करती है। इस घटना के लिए [...]
अरे, ‘देश-सेवा’ के इनके जुनून को थामो !
बहुत समय नहीं हुआ……………कोई सालेक बीता होगा। मैं एक पार्टी में अनायास ही पहुँच गया। पार्टी बड़े लोगों की थी। दो अफसरों को मैं पहचानता था, क्योंकि दोनों अपनी देव-भूमि और निशंक जी के शब्दों को उधार लूँ तो ‘भारत के भाल’ में प्रभावशाली पदों पर हैं। एक साहब फोरेस्ट में डी.एफ.ओ. बताए जा रहे [...]
शिक्षा का बाजारीकरण
प्रस्तुति : दिनेश भट्ट ‘अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा का अधिकार अधिनियिम’ 1 अप्रेल 2010 से लागू हो गया है। शिक्षाविदों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों ने इस अधिनियम पर अनेक आपत्तियाँ दर्ज की हैं। सरसरी तौर पर अधिनियम ठीक ही लगता है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में अवश्य ही दिक्कतें आयेंगी। इस बीच सरकार ने विदेशी संस्थानों, विश्वविद्यालयों को [...]
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