पेड न्यूज से पिट रहे हैं प्रत्याशी
इस बात को कोई नहीं नकार सकता कि आज के दौर में मीडिया का प्रभाव यत्र तत्र सर्वत्र है। देश के कई बड़े घोटाले, झूठ के पुलिंदे लोगों के सामने सिर्फ मीडिया के दबाव के चलते ही बाहर आ पाए। शुरू से ही पत्रकारों को प्रबुद्ध वर्ग में सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। सोचने की [...]
ई.वी.एम. में बन्द गणतंत्र
हमारी श्रीमती जी चैनल सर्फिंग में व्यस्त थीं कि जरा देखें हमारे प्रदेश में गणतंत्र दिवस की परेड कैसी रही। मगर दर्जनों स्थानीय कहे जाने वाले चैनलों में किसी को इतनी फुर्सत नहीं थी कि जरा सी देर के लिये गणतंत्र दिवस पर कैमरा तान लेते। सब तो चुनावों में सराबोर थे। मगर अब चुनाव [...]
कहाँ गये विकल्प का वादा करने वाले ?
कड़ाके की ठंड के बीच उत्तराखंड की तीसरी विधान सभा चुनने वाले कुल 63,63,914 मतदाता, जिनमें 35,45,362 पुरुष व 30,16,209 महिलायें हैं, असमंजस की स्थिति में हैं। राष्ट्रीय दलों के पास कोई मुद्दे नहीं हैं, मगर भाजपा-कांग्रेस का विकल्प देने का दावा करने वाला तीसरा मोर्चा अस्तित्व में आने से पूर्व ही बिखर गय़ा है। [...]
आये चुनाव… गये चुनाव…
एक और विधान सभा चुनाव सामने है। एक पृथक राज्य बनने के बाद उत्तराखंड के तीसरे आम चुनाव। नामांकन के लिये जा रहे नेताओं और उनके समर्थकों के जलूसों में लगते गगनभेदी नारे हाड़ कँपाती ठंड को भगाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि टिकट पाने में असफल रहे नेताओं के आँसू पाला बन कर [...]
महिला मतदाता निर्णायक होंगी पिथौरागढ़ जनपद में
परिसीमन के बाद इस बार जनपद पिथौरागढ़ में एक सीट कम हुई है। कनालीछीना विधानसभा सीट के खत्म होने के बाद अब पाँच के बदले चार, पिथौरागढ़, डीडीहाट, गंगोलीहाट, धारचूला विधानसभा सीटें ही अस्तित्व में हैं। पिछले दो चुनावों को देखें तो कनालीछीना में 2002 के चुनाव में यूकेडी के काशी सिंह ऐरी विजयी रहे [...]
पौड़ी जिले पर दोहरी मार
नये परिसीमन से पौड़ी जिले को दोहरी मार पडी। दो सीटों के नुकसान के साथ विधानसभा में प्रतिनिधित्व कम हुआ तो बरसों से इस पहाड़ क्षेत्र के बलबूते राजनीति कर रहे कुछ दिग्गजों का मैदानी इलाकों को पलायन भी हुआ। परिसीमन से बदले समीकरण इन्हें रास नहीं आये और अपने घर-द्वार को छोड़ कहीं बाहर [...]
बंगाली विस्थापितों ने दस्तक दी
अजय कुमार मलिक ‘तड़प’ सितारगंज विधानसभा सीट पर भाजपा का टिकट किरन मंडल को मिलना बरसों से चले आ रहे आंदोलन का नतीजा है। उनकी पहल पर बंगाली कल्याण समिति के बैनर तले नागरिकता, अनुसूचित जाति का दर्जा दिये जाने आदि माँगों को लेकर कई बार धरना-प्रदर्शन हुए, जो आज तक जारी हैं। सन् 2000 [...]
पहाड़ से भाग रहे हैं नेता
प्रवीन कुमार भट्ट आम जनता की तरह उत्तराखंड के नेता भी मैदानों की ओर पलायन कर रहे हैं। पहले ही वे देहरादून और हल्द्वानी में अपने मकान बना चुके थे। अब उन्होंने पहाड़ से चुनाव लड़ने के लिए भी तौबा कर ली है। राज्य के ज्यादातर दिग्गजों ने मैदानों में अपने लिए सुरक्षित सीटें तलाश [...]
चुनाव आयोग को उत्तराखण्ड की परवाह नहीं
सीताराम बहुगुणा उत्तराखंड में मतदान की तिथि 30 जनवरी घोषित होने के बाद जहाँ राज्य का सियासी पारा गर्म है, वहीं बर्फबारी और ठंड से अधिकांश पहाड़ी क्षेत्र में जनजीवन अस्तव्यस्त है। हाड़ कंपाती इस ठंड के बीच चुनाव प्रक्रिया जारी है। कई प्रत्याशियों ने बर्फबारी के बीच ही नामांकन करवाया। स्वयं मुख्यमंत्री खंडूरी बर्फ [...]
यह कैसा मिशन 2012 है ?
गजेन्द्र नौटियाल सभी राजनैतिक दल मिशन 2012 की बातें और तमाशे में मशगूल हैं पर मुझे समझ नहीं आता कि ये मिशन किसके लिए है और किसका ? ऐसा समझ न आने का कारण भी है और धारणा भी। चलें पहेलियों से इतर कुछ यथार्थ को समझते हैं – वो खेतों के बिजूके- मेरा गाँव [...]
आपकी टिप्पणीयाँ