खाद्यान्न: पहले वितरण व्यवस्था तो ठीक हो जाए
चुनावी साल में तथाकथित लोक लुभावन योजनाओं की घोषणा, उनका सही क्रियान्वयन जाने बिना ही कर देना भारतीय राजनीति का एक विद्रूप चेहरा है। उत्तराखंड में जारी अटल खाद्यान्न योजना ने भी इस सच को साबित किया है। जीडीपी में कथित रूप से अव्वल रहे उत्तराखंड की अंदरुनी हालत का सच भी इस योजना ने [...]
यूकेडी की जगह लेने की जद्दोजहद
सलीम मलिक उत्तराखण्ड की प्रमुख क्षेत्रीय राजनैतिक पार्टी उत्तराखण्ड क्रांति दल जिस वक्त जगहँसाई का पात्र बन कर टूट की कगार पर था, उसी वक्त रामनगर की अग्रवाल सभा में एक और राजनैतिक दल ‘उत्तराखण्ड परिवर्तन पार्टी’ राज्य की राजनीति की बिसात पर एक नई इबारत लिखने की जद्दोजहद में जुटा था। गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ [...]
नहीं बदली महिला के प्रति समाज की सोच
आनन्द सिंह शाही हमारे राज्य में लगभग अट्ठावन हजार पंचायत प्रतिनिधि हैं। इनमें से आधी महिलाएँ हैं। यहाँ पर सोचने का विंदु यह है कि क्या महिलायें इस जिम्मेदारी को सँभालने के लिये तैयार हैं ? क्या उनको मिले इस संवैधानिक अधिकार को समाज में मान्यता मिल गयी है ? इसका उत्तर ढूँढें तो मिलेगा [...]
उक्रांद में घात-प्रतिघात
उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष त्रिवेन्द्र पँवार के नेतृत्व में दल की कार्यकारिणी के कुछ सदस्यों ने 27 दिसम्बर की शाम राज्यपाल मार्गेट अल्वा को एक पत्र सौंप कर भाजपा सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया। इस प्रतिनिधिमंडल में उक्रांद का कोई भी विधायक या दायित्वधारी नहीं था। बताया जा रहा है कि इस [...]
नियम विरुद्ध करवाए गए सरमोली-जैंती वन पंचायत चुनाव
तमाम विरोधों के बाद भी सरमोली-जैंती वन पंचायत के चुनाव 24 जनवरी को सम्पन्न करवा दिये गए। डीडीहाट की एस.डी.एम. दीप्ति सिंह ने नियमावली के बारे में तमाम दलीलों और अन्य आपत्तियों को खारिज करते हुए चुनाव सम्पन्न हुए घोषित कर दिये। सरमोली-जैंती वन पंचायत, मुनस्यारी की सरपंच ने चुनाव आयोजन के तरीके पर काफी [...]
लोकतंत्र के लिये चुनौती
वे सारे नवयुवक जिनको पढ़ाई अथवा अन्य कार्यों में लगा होना चाहिये था जिससे वे अपने क्षेत्र व देश/प्रदेश का नाम रोशन करने, चुनाव लड़ते देखे गये। वोटर (जिनमें इंटर से ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले नौजवान मुख्य थे।) विभिन्न प्रत्याशियों के साथ चुनाव प्रचार में जाते देखे गये। यह तो अच्छी बात रही [...]
क्या संदेश देने जा रहे हैं पंचायत चुनाव ?
73 वाँ संविधान संशोधन जारी होने के बाद तीसरे और राज्य बनने के बाद दूसरे त्रिस्तरीय पंचायती चुनावों का घमासान हो रहा है इन दिनों उत्तराखंड में। पंचायती राज की बुनियादी अवधारणा से कोसों दूर और मुद्दों को तवज्जो दिये बिना हो रहे इन चुनावों में चौतरफा अपसंस्कृति का बोलबाला देखने को मिल रहा है। [...]
भैजी चरौनी भैंसी……भौजि बणिगो सभापति
आज भी दूरस्थ गाँवों में चाव से सुने जा रहे रेडियो से ‘उत्तरायण’ कार्यक्रम में कभी-कभी बजने वाले एक कुमाऊँनी गीत की दो पंक्तियाँ पेश-ए-नजर हैं, ‘‘नौ रुप्य किलो नून, सौ रुप्य किलो चहापति,……भैजी चरौंनी भैंसी, भौजि बणिगो सभापति।’’ पहली पंक्ति तो अद्यतन घटित हो रही सच्चाई है। दूसरी पंक्ति रचते हुए गीतकार के इरादे [...]
क्या यह राजनैतिक दलों से मोहभंग की शुरूआत है ?
उत्तराखंड के लोग क्या राजनैतिक दलों से ऊब गए हैं ? हाल में आए राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजे तो यही दर्शाते हैं। इन चुनावों में 633 वार्ड थे, जिनमें 300 पर निर्दलीय विजयी हुए। राज्य की सत्तारूढ भाजपा, एड़ी-चोटी का जोर लगाने पर भी 177 में ही जीत कर दूसरे नंबर पर [...]
नेपाल में नया सूर्योदय
पड़ोसी देश नेपाल में एक नया सूर्योदय हो रहा है। संविधान सभा के लिये 10 अप्रेल को हुए चुनाव में नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) अन्य सभी दलों से बढ़त बना कर पूर्ण बहुमत प्राप्त करने की स्थिति में पहुँच गई है। माओवादियों की इस सफलता की उम्मीद नेपाल अथवा नेपाल के बाहर किसी को नहीं [...]
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