भू माफियाओं को अब नहीं सहेंगे पहाड़ के लोग
राज्य बनने के बाद उत्तराखंड के ग्रामीण अंचलों में बिल्डरों की एवं भूमाफियाओं की बाढ़ सी आ गई है। जमीन की कीमतों में वृद्धि होने के कारण लोगों ने अपनी बेशकीमती जमीनों को इनके हवाले कर दिया है। गाँवों की कृषि भूमि एवं फल पट्टियाँ कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो रही हैं। जमीनों की [...]
उसे ले गए
अरे कोई देखो मेरे आँगन में गिरा कटकर गिरा मेरा नीम गिरा मेरी सखियों का झूलना बेटे का पालना गिरा उड़ी उसकी चिड़ियाँ देखो उड़ा उनका शोर देखो एक घोंसला गिरा देखो वे आरा ले आये ले आये कुल्हाड़ी और रस्सा ले आये उसे बाँधने देखो कैसे काँपी उसकी छाया उसकी पत्तियों की छाया जिनसेघाव [...]
अब तो पानी के बारे में सोचना ही पड़ेगा
उत्तराखंड में इस साल अब तक पानी की स्थिति बहुत विकट रही है। जाड़ों में बहुत कम हिमपात होने के कारण सन् 2009 की गर्मियों में बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी की बहुत कमी रही। हिमनद से बनने वाली भागीरथी और अलकनन्दा जैसी नदियों में गर्मियों में पानी का औसत प्रवाह लगभग 50 प्रतिशत [...]
सेंचुरी मिल के झाँसे से बीमार रहने लगे हैं लोग
नैनीताल जनपद के लालकुआँ में स्थित सेंचुरी पल्प एण्ड पेपर मिल ने स्थानीय बेरोजगारों को भले ही रोजगार उपलब्ध न कराया हो, मगर जल और वायु प्रदूषण के रूप में एक धीमा जहर लोगों की साँसों में जरूर भर दिया है। फैक्ट्री में प्रयोग होने वाले रसायनों के प्रदूषित जल से लोगों के स्वास्थ्य को [...]
स्वस्ती श्री: प्रधान ज्यू चीड़ाक बोट झन लगाया हो..
प्रधान, ग्राम पंचायत धुंगोली, डाकघर बसभीड़ा, जिला अल्मोड़ा- 263656 मान्यवर प्रधानज्यू, मेरि स्यो! यो फरवरी में मैंके आपण गौं जाणौक मौक मिलौ, सच्ची लेखणयूँ मैं के गौं भौते भल लागो। चौखुटि-द्वाराहाट राजमार्ग बटी गौं तक द्वि-तर्फी-ग्वाली और बसभीड़ा-सीसी मार्ग बणि रौ। सीसी मार्ग पार पुर सीमेण्ट लागी छौ, जैक मतलब यो छ कि कमीशन नी [...]
हिवरे बाजार ने रास्ता दिखा दिया है
सत्तर के दशक तक हिवरे बाजार अपने ‘हिन्द केसरी’ पहलवानों के लिये मशहूर था। लेकिन फिर महाराष्ट्र के अहमदनगर का यह गाँव सूखे की चपेट में आ गया। 400 मिमी. औसत वार्षिक वर्षा वाले इस क्षेत्र में फसलें बर्बाद होने लगीं तो गाँव से पलायन शुरू हो गया। लोग छोटे-मोटे धन्धों के लिये पुणे और [...]
आदिवासी और ग्रामीण ही राहत दिला सकते हैं ग्लोबल वार्मिंग से
प्रस्तुति : दिनेश भट्ट हाल के दिनों में भारतीय उद्योगपति ही नहीं, वैज्ञानिक भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये हैं। पहले पर्यावरण संरक्षण के लिये डॉ. राजेन्द्र पचौरी की संस्था को अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर के साथ नोबेल पुरस्कार दिया गया और अभी हाल ही में देहरादून स्थित वाडिया इंस्ट्टियूट के वैज्ञानिक [...]
मौसम के पूर्वानुमान को लेकर बहुत गंभीर नहीं है मीडिया
ऐसी चर्चा है कि इस शताब्दी में ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभावों के कारण ग्लेशियर समाप्त हो जायेंगे तथा जीवनदायिनी गंगा विलुप्त हो जायेगी। समुद्रतटीय शहर समुद्र में डूब जायेंगे। ग्लोबल वॉर्मिंग एक विश्वव्यापी समस्या बनती जा रही है। एक रेडियो न्यूज के अनुसार सियाचिन में ग्लेशियर आज भी 10 वर्ष पूर्व स्थिति में हैं। उनमें [...]
चारा उत्पादन के लिये जमीनी सच्चाइयों का ख्याल रखें
प्रस्तुति : माधवानन्द मैनाली पर्वतीय जनपदों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में की जाने वाली खेती के लिये एक परिवार के पास दो बैल, एक भैंस और एक गाय पालना निहायत जरूरी है। खेत को खाद, बच्चों के लिये दूध और खेती कार्य हेतु बैल चाहिये। जंगलों के विनाश ने चारे की समस्या विकट कर दी [...]
आपकी टिप्पणीयाँ