लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 19, 2011 पर प्रकाशित
ऐतिहासिक व सामरिक महत्व वाला जौलजीवी मेला 14 नवम्बर से मनाया गया। त्रिदिवसीय मेले में भारत-नेपाल-तिब्बत से व्यापारी आते थे। अब तिब्बत अपनी सहभागिता नहीं निभा पा रहा है जो चिन्तनीय है। ज्वालेख देव की भूमि पर लगने वाले इस मेले का प्रारम्भिक नाम स्थानीय गाँव दुतीबगड़ के नाम से ‘दुती मेला’ के रूप में [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :August 9, 2010 पर प्रकाशित
विनीत फुलारा/धीरज पाण्डे नैनीताल के निकट भीमताल में हरेला पर्व को सौ साल पहले से भी अधिक समय से मेले के रूप में मनाया जाता है। विगत दशकों में बहुत सारे बदलाव देख चुके यहाँ के बुजुर्गों के अनुसार बाजार के अभाव में आजादी से पहले लोग व्यापार के लिये यहाँ आते थे। व्यापारी घोड़ों [...]
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लेखक : अरविंद मुद्गल :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 30, 2010 पर प्रकाशित
पौड़ी के निकट कल्जीखाल क्षेत्र में दो दिन के खैरलिंग मेले पर इस वर्ष प्रशासन, स्थानीय निवासियों, पशुबलि का विरोध करने वाली संस्था बिजाल से लेकर राजनीतिक दलों की भी नजर थी। सब इसी असमंजस में थे कि क्या इस वर्ष भी भैंसों की बलि दी जायेगी। वर्ष 2005 की घटना से प्रशासन चौंकन्ना था [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 23, 2010 पर प्रकाशित
उत्तरायणी और बागेश्वर ये दोनों ही नाम एक दूसरे के पर्याय रहे हैं। उत्तरायणी, उतरैणी अथवा उतरैण सूर्य के उत्तरी अयन में प्रवेश का दिन है। इस भौगोलिक घटना का बागेश्वर के लिए विशिष्ट ऐतिहासिक, धार्मिक व ब्यापारिक महत्व रहा है। बागेश्वर में उत्तरायणी पर मेला आयोजन की शुरुआत कब हुई इसका कोई ठीक प्रमाण [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 9, 2010 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : सीताराम बहुगुणा ‘‘नौ परैं विकास का विनाश कैन कैरि यूँ पहाडु कु, खोजा वे सैणी पछाणा वे सैणी…’’ प्रसिद्ध लोकगायक नरेन्द्र सिंह नेगी की ये पंक्तियाँ उत्तराखण्ड में विकास के नाम पर मेले मनाने वालों पर सटीक बैठती हैं। राज्य बनने के बाद शरद् ऋतु के आगमन के साथ ही यहाँ मेलों और [...]
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