लेखक : विजय जड़धारी :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 16, 2011 पर प्रकाशित
कृषि व पशु पालन सम्बन्धी विभिन्न समस्याओं को लेकर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आये किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 25 अगस्त 2011 को नई टिहरी में विशाल प्रदर्शन कर एक सभा की। ‘बीज बचाओ आन्दोलन’ की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हमारी जीवन पद्धति व संस्कृति के साथ ही [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 2, 2011 पर प्रकाशित
वरुण शैलैश भूमि अधिग्रहण का संकट केवल भट्टा पारसौल तक सीमित नहीं है, जहाँ उग्र आन्दोलन के बाद जमीन अधिग्रहण राष्ट्रीय स्तर की सुर्खियाँ बन गया है। आज देश में ऐसे कई अधिग्रहण क्षेत्र हैं जहाँ बिल्ली की चाल की तरह किसानों की भूमि कब्जे में की जा रही है, लेकिन वे क्षेत्र खबर नहीं [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 15, 2011 पर प्रकाशित
प्रस्तुति: ईश्वर जोशी परम्परागत कृषि को छोड़ व्यावसायिक खेती के जरिये अधिक लाभ कमाने की कोशिशें राज्य बनने के बाद काफी तेज हुई हैं। उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र में जहाँ प्रति परिवार औसत 8 नाली कृषि भूमि बची है, वहीं ऊपर से बिखरी जोतों तथा जंगली जानवरों के नुकसान के चलते बंजर भूमि का क्षेत्र [...]
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लेखक : हरीश जोशी :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :April 4, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में कृषि व इससे जुड़े कार्य यहाँ के सामाजिक ताने-बाने को निर्धारित करते हैं, परंतु पलायन की प्रवृत्ति यहाँ के बाशिन्दों के खून में रच-बस गयी है। जीविका कमाने के लिये पहाड़ से मैदानों की ओर जाना तो यहाँ की पुरानी समस्या है। परन्तु हाल के वर्षों में तथाकथित विकास की सुविधाओं, यथा स्कूल, [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2010:: वर्ष :: 34 :December 3, 2010 पर प्रकाशित
कर्ज में डूबे किसानों की आत्महत्या की खबरें अब तक विदर्भ और आन्ध्र प्रदेश आदि राज्यों से सुनते थे। परन्तु पिछले दिनों पौड़ी और पिथौरागढ़ से आई खबरों ने पहाड़ी किसानों की दयनीय आर्थिक स्थिति की ओर ध्यान खींचा है। यदि इस ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो यहाँ भी किसानों की आत्महत्यायें [...]
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लेखक : कैलाश कोरंगा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 18, 2010 पर प्रकाशित
‘‘भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की 70 प्रतिशत जनसंख्या खेती पर आश्रित है,’’ यह वाक्य हम कक्षा दो से पढ़ते आये हैं। लेकिन उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद भी जनता के खेवनहारों ने कृषि की इस अमूल्य निधि की तरफ आँख उठाकर देखने की जरूरत नहीं समझी। जिस प्रकार पहाड़ों की सोना उगलने वाली [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 23 || 14 जुलाई से 31 जुलाई 2010:: वर्ष :: 33 :July 30, 2010 पर प्रकाशित
उत्तराखंड में बन रही 558 जल-विद्युत परियोजनाओं के बारे में बहुत सारी अफवाहें हैं। सबसे बड़ी अफवाह यह है कि इन परियोजनाओं के लिये सरकार और उसके अफसर निजी कंपनियों से पैसा ले रहे हैं। जल-विद्युत बनाने और बेचने में बहुत अधिक फायदा है, जिसका एक छोटा सा भाग यदि योजना की स्वीकृति पाने के [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2010:: वर्ष :: 33 :June 13, 2010 पर प्रकाशित
तराई-भाबर में बसे थारू-बोक्सा आदिवासियों की जमीन हड़पने व बंगाली विस्थापितों को जमीन से ही बेदखल कर देने की प्रवृत्ति के खिलाफ उत्तराखण्ड किसान सभा द्वारा अभियान छेड़ा गया है। इस अभियान में आ रही अड़चनों को लेकर उत्तराखण्ड किसान सभा के प्रान्तीय अध्यक्ष एवं माकपा नेता बच्चीराम कौंसवाल पिछले दिनों जिलाधिकारी उधमसिंह नगर व [...]
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लेखक : पुरुषोत्तम शर्मा :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 7, 2010 पर प्रकाशित
अभी हाल में उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य के लिए एक नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया है। इस मसौदे में क्या है यह तो पता नहीं पर इसे तैयार करने का काम जिस तरह किया गया वह पूरी तरह आपत्ति करने लायक है। राज्य के लिए नई कृषि नीति का मसौदा तैयार किया जा [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2007:: वर्ष :: 31 :December 31, 2007 पर प्रकाशित
मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी अब लोक लुभावन घोषणाओं पर उतर आये हैं। किसानों को बिजली की पेनाल्टी की माफी, सचिवालय में संविलयन की मांग कर रहे संबद्ध कर्मचारियों को तोहफा, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण और उनके कल्याण का फैसला, जमीन की कीमतों में इजाफा रोकने के लिये इमारतों की ऊँचाई को बढ़ाने की मंजूरी [...]
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