आओ जंगल-जंगल खेलें
हिमालय, बर्फ, जंगल और पानी उत्तराखंड की शान हैं। लेकिन जैसे औरत की खूबसूरती कई बार उसके लिये अभिशाप हो जाती है, उसी तरह हमारी ये निधियाँ भी हमारे लिये संकट का कारण बन गई हैं। एक ओर हमारी सरकार ‘ग्रीन बोनस’ की माँग कर रही है कि जिस तरह कुम्भ या आपदा के बहाने [...]
मानसून में कई रूप दिखते हैं हिमालय के…
मानसून में हिमालय के कई रूप दिखते हैं। जरा सा मौसम खुले तो समूचा पहाड़ पॉलिश किया सा लगता है और वहीं पल भर में मौसम ने करवट बदली और प्रकृति का दूसरा भयावह चेहरा सामने दिखता है। तूफानी बारिश के साथ ही चारों ओर फैला कोहरा अजीब सी सिहरन पैदा कर देता है। पर्वतारोहियों [...]
स्याही देवी में भी सक्रिय हैं बाघ
स्याहीदेवी, शीतलाखेत में तेंदुओं के हमले से पिछले डेढ़ वर्ष में एक युवक तथा चार मासूम बच्चों की जानें गई हैं। शासन-प्रशासन तथा वन विभाग मृतकों के परिजनों को मुआवजा देकर तथा तेंदुओं को गोली मारने या पिंजरे में बंद कर देने तक ही सीमित रह गये हैं। तेंदुओं के नरभक्षी होने के कारणों की [...]
जानवरों और मनुष्यों के बीच समरसता जरूरी है
तेदुओं और अन्य हिंसक जानवरों ने उत्तराखंड में लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। तेदुओं के आतंक से उत्तराखंड का कोई पहाड़ी गाँव अछूता नहीं है। बाघ और हाथियों के साथ ही गुलदार भी लोगों के लिए बढ़ा खतरा बन गये हैं। दस सालों में 250 लोग गुलदार का निवाला बन चुके हैं और [...]
गुस्से में हैं कार्बेट पार्क से लगे इलाकों के ग्रामीण
विश्वप्रसिद्ध कार्बेट नेशनल पार्क के जंगलों से सटे गाँवों के लोगों ने सरकार व वन विभाग के खिलाफ आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। जहाँ एक ओर ग्रामीण हिंसक हो रहे जंगली जानवरों से अपने जान-माल की सुरक्षा के प्रबंध की माँग कर रहे हैं, वहीं दशकों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन [...]
वन संरक्षण अधिनियम से बाधित पहाड़ की सड़कें
त्रिलोकमणी पाठक उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बसे गांवों के चारों ओर जंगल हैं। अनादि काल से जिन स्थानों पर जल, खेती योग्य जमीन तथा चारागाह के लिये वन की सुविधा मिली गाँवों की बसासत बैठी होगी। पशु पालन एवं कृषि इन ग्रामवासियों की मुख्य आजीविका थी। समय परिवर्तन हुआ। शिक्षा का प्रसार हुआ। लोग [...]
जलते वनों के प्रति उपेक्षा और हमारा भविष्य
गर्मियों में मन को अत्यन्त व्यथित करने वाला एक दृश्य उत्तराखण्ड हिमालय में चारों ओर दिखाई देता है। वह है, वनों को निर्दयतापूर्वक नष्ट करती हुई वनाग्नि की धधकती लाल लपलपाती लपटें और उनसे उठते धुएँ के गुबार। यहाँ की खूबसूरत वादियाँ मानो कार्बन डाइ ऑक्साइड के गैस चैम्बर्स बन जाती हैं। पर मानव का [...]
खजूरी बीट में बीते बचपन के वे दिन – 2
[ पिछ्ले भाग में आपने पढ़ा कि किस प्रकार खजूरी बीट के लोग प्रकृति को पूज्य मानते थे और हर प्राकृतिक चीज में उन्हें देवता का निवास प्रतीत होता था...आज उससे आगे] आज की तरह घर-घर रावण, घर-घर लंका वाला युग नहीं था। लोग अपनी जरूरत भर की चीजें ही प्रकृति से लेते थे। बेच [...]
खजूरी बीट में बीते बचपन के वे दिन – 1
अल्मोड़ा जनपद में मजखाली और सोमेश्वर के बीच लगभग सात हजार फीट ऊँची पर्वत श्रेणी एड़द्यो कहलाती है। इस पर्वत पर सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित जंगल वन विभाग के अभिलेखों में खजूरी बीट के नाम से अभिलिखित है। यह मनाण के समीप बमणिगाड़ से आरंभ होकर एड़द्यो के सर्वोच्च शिखर तक और पश्चिम में कैड़ा [...]
आग नहीं बुझाता वन विभाग?
हेमन्त तिवारी बागेश्वर जिले में हिमालयी बुग्यालों के साथ ही जंगलों में फैली आग के सामने वन विभाग हर वर्ष बौना साबित होता है। प्रतिवर्ष सैकड़ों हेक्टेयर जंगल जलकर स्वाहा हो जाते हैं। वन जलते रहते हैं और वन महकमा गोष्ठियाँ करने में मशगूल हो जाता है। एक अनुमान के मुताबिक अभी तक जिले में [...]
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