लेखक : शमशेर सिंह बिष्ट :: अंक: 05 || 15 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 31, 2011 पर प्रकाशित
कुछ समय पूर्व जागेश्वर क्षेत्र में 350 देवदार के पेड़ कटने का मामला कुछ दैनिक समाचार पत्रों द्वारा किये गये भंडाफोड़ और उत्तराखंड लोक वाहिनी द्वारा 13 सितम्बर को गुरड़ाबाँज में किये धरने के बाद (देखें नैनीताल समाचार, 15 से 30 सितम्बर 2011) अल्मोड़ा जनपद में एक चर्चित मुद्दा बन गया। परन्तु इसके बावजूद वन [...]
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लेखक : तरुण जोशी :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 16, 2011 पर प्रकाशित
खण्डूरी सरकार द्वारा वर्ष 1893 की अधिसूचना के निरस्तीकरण से कृषि भूमि का विस्तार हो सकेगा और सरकारी योजनाओं के लिये काश्तकरों की नाप जमीन का उपयोग बन्द हो जायेगा। मगर अड़चनें बहुत सारी हैं। इस मुद्दे को समझने के लिये संक्षेप में पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है। औपनिवेशिक अग्रेज सरकार ने उत्तराखंड में निजी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 16, 2011 पर प्रकाशित
विनोद अरविन्द अपनी जादू की छड़ी से फटाफट शासन-प्रशासन केा दुरुस्त करने में जुटे खंडूरी ने बेनाप संबधी ब्रिटिश कालीन आदेश को निरस्त कर दिया है। अब बेनाप जमीन फिर चर्चा में है। यह मामला पहले चर्चा में तब आया था, जब 1996 में गोंडाबर्मन बनाम भारत सरकार मामले में उच्चतम न्यायालय में इस संबध [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 1, 2011 पर प्रकाशित
अल्मोड़ा जनपद के जागेश्वर और सल्ट क्षेत्र से देवदार और बाँज के वृक्षों के कटान की जो खबरें मिल रही हैं, वे बेहद चिन्ताजनक हैं। सत्तर के दशक में जब चिपको आन्दोलन पूरी दुनिया में गूँजा था, तब लगता था कि वृक्षों के अंधाधुंध कटान की बीमारी भारत से चेचक की तरह खत्म हो जायेगी। [...]
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लेखक : शमशेर सिंह बिष्ट :: अंक: 03 || 15 सितंबर से 30 सितंबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 1, 2011 पर प्रकाशित
पुराणों के अनुसार जागेश्वर शिव की तपस्या का स्थान है। दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विध्वंस कर सती की राख लपेटकर झाँकरसैम में शिव ने तपस्या की थी। उस समय झाँकरसैम व जागेश्वर देवदारु वृक्षों से आच्छादित थे। वशिष्ठ मुनि अपनी पत्नियों के साथ जागेश्वर में रहते थे। कहा जाता है कि यहाँ शिव मंदिर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 3, 2011 पर प्रकाशित
प्रीति थपलियाल 23 मार्च 2011 को आत्मरक्षा में एक गुलदार को मारने के प्रकरण में पौड़ी जनपद के रिखणीखाल विकासखण्ड का धामदार गाँव के 5 पुरुष व दो महिलाओं को जेल हुई। [देखें नैनीताल समाचार रिपोर्ट एक , रिपोर्ट दो] । उस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कोटद्वार के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने ‘जन अधिकार संयुक्त [...]
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लेखक : लक्ष्मण सिंह नेगी :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 15, 2011 पर प्रकाशित
थराली विकास खंड जनपद चमोली के सीमान्त गाँव सणकोट में बंजर भूमि में जंगल उगाकर पर्यावरण संरक्षण के लिये विशेष कार्य करने वाले नारायण सिंह नेगी गढ़वाल के गौरव नाम से भी जाने जाते हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव पर भी प्रकृति प्रेम उन्हें नहीं छोड़ता। सुभाष चन्द्र बोस के साथ एक वर्ष तक द्वितीय [...]
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लेखक : इंद्रेश मैखुरी :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 19, 2011 पर प्रकाशित
उत्तराखंड के तराई-भाबर के वनग्रामों तथा खत्तों में रहने वाले वन गूजरों और पर्वतीय मूल के लोगों को देश की आजादी के 65 वर्ष बाद भी बुनियादी नागरिक अधिकार तक हासिल नहीं हैं। पंचायतीराज व्यवस्था इनके लिये दूर की कौड़ी है और मनरेगा जैसी योजनायें भी लगता है कि इनके लिये नहीं बनी है। वनाधिकार [...]
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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
‘‘सुनो-सुनो। सभी राज्यवासियों को सूचना दी जाती है कि राज्य में बाघों की संख्या बढ़ाये जाने का विधेयक पास हो गया है। बाघों को मारने पर पाबंदी लगा दी गई है। इसलिए जो भी बाघों पर अत्याचार करेगा या फिर ‘इंक्वायरी टीम’ जिसके खिलाफ भी सबूत पेश करेगी, उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। बाघ हमारा [...]
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