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लेखक : उदय किरौला :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 1, 2011 पर प्रकाशित
अल्मोड़ा में आयोजित भाषा संस्थान के सरकारी कार्यक्रम में भाषा मंत्री मातबर सिंह कंडारी का रवैया बेहद आपत्तिजनक रहा। कुमाउनी भाषा सम्मेलन के हॉल में पहुँचते ही भाषा मंत्री आयोजकों पर बिफर पड़े। कार्यक्रम औपचारिक रूप से प्रारंभ हो, उससे पूर्व मंत्री जी ने संचालक से माईक लेकर अपनी बात प्रारंभ कर दी। उन्होंने कुमाउँनी [...]
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लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
तीन दिवसीय उत्तराखंड लोकभाषा सम्मेलन 16 से 18 अप्रेल 2011 तक देहरादून में सम्पन्न हुआ। ओ.एन.जी.सी. के कौलागढ़ रोड स्थित ए.एम.एन. घोष सभागार में सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने लोकभाषाओं के विकास के लिये सरकार की प्रतिबद्धता बताई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार हिमांशु जोशी ने अपने [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 18 || 01 मई से 14 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 1, 2011 पर प्रकाशित
‘चमत्कार’ नन्दकिशोर हटवाल की दस बालोपयोगी कहानियों का संग्रह है, जिसमें रोचक ढंग से बच्चों को बहुत सी महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। आग, बाढ़, भूकम्प, पहाड़ों पर यातायात, पहाड़ी औरत की जिन्दगी, आपदा प्रबन्धन आदि बेहद जरूरी बातों पर लिखी गई ये कहानियाँ बच्चों को जरूरी संस्कार और जीवन दृष्टि देने में तो सक्षम [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :March 2, 2011 पर प्रकाशित
‘नैनीताल समाचार’ के 15-31 दिसंबर अंक में आपने कुमाउनी-गढ़वाली भाषाओं को समूह ‘ग’ श्रेणी की परीक्षाओं से बाहर करने पर वाजिब चिन्ता जताई है। कुमाउनी-गढ़वाली यदि उत्तराखण्ड में महत्व नहीं पाएंगी तो और कौन सा राज्य है जो उनके विकास के लिए कदम उठाएगा। 1 से 14 जनवरी के अंक में बटरोही जी ने उससे [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2011:: वर्ष :: 34 :February 8, 2011 पर प्रकाशित
संस्कृत को किसी संरक्षण की आवश्यकता नहीं है बटरोही जी का पत्र पढ़ा। बटरोही जी ने लिखा है कि ’’जो हालत आज कुमाउनी-गढ़वाली आदि की है कभी वही संस्कृत की भी हुई थी, जब पाली (शुद्ध रूप पालि है) और प्राकृत (शुद्ध रूप प्राकृतों होना चाहिए क्योंकि प्राकृत भाषाएँ अनेक हैं) ने उसे हासिये पर [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 27, 2011 पर प्रकाशित
नैनीताल समाचार (15 से 30 नवम्बर) के अंक में कपिलेश भोज का आलेख ‘केवल कुमाउँनी कवि के रूप में देखना गिरदा को छोटा करना है’ मैं छोटा शब्द का प्रयोग हम लोक भाषा (गढ़वाली-कुमाउँनी) में काम करने वालों को ‘गाली’ जैसा लगा। श्री भोज से मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या केवल अपनी मातृभाषा कुमाउँनी [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 09 || 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 22, 2011 पर प्रकाशित
मुख्यधारा के अखबारों में प्रायः घटनायें एक सामान्य ब्यौरे के रूप में होती हैं। उनका विश्लेषण प्रायः नहीं होता। कुछ घटनाओं में उसे सचमुच चटखारे लेने का मौका मिल जाता है, जैसे देहरादून में कार्यरत इंजीनियर राजेश गुलाटी द्वारा अपनी पत्नी अनुपमा की हत्या कर उसके शव को डीप फ्रीजर में रखकर धीरे-धीरे शव के [...]
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लेखक : एल. एम. कोठियाल :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2010:: वर्ष :: 33 :August 14, 2010 पर प्रकाशित
साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित पौड़ी के संस्कृति भवन प्रेक्षागृह में सम्पन्न दो दिवसीय गढ़वाली भाषा सम्मेलन में यह निष्कर्ष उभर कर आया कि इन्डो-आर्यन के समय से चली आ रही गढ़वाली आठवीं अनुसूची में शामिल होने के लिये एकदम सक्षम भाषा है। यह बात साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष सतेन्द्रसिंह नूर ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में [...]
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लेखक : चन्द्रकला रावत :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2010:: वर्ष :: 33 :April 6, 2010 पर प्रकाशित
‘भाषा रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर’ के तत्वावधान में दिनांक 8, 9 व 10 मार्च 2010 को बड़ौदा (गुजरात) में ‘भारत भाषा संगम’ सम्पन्न हुआ। देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग 320 बोल भाषाओं के 600 प्रतिनिधि इस भाषा संगम में उपस्थित थे। सी.सी. मेहता सभागार, एम.एस. यूनिवर्सिटी कैम्पस, बड़ौदा में सात भाषाओं में स्तुति के [...]
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लेखक : भगवती प्रसाद बौटियाल :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
गढ़वाली-कुमाउँनियों की संख्या लाखों में होते हुए भी और अब उत्तराखंड राज्य बने हुए आठ वर्ष हो चुकने के बाद भी गढ़वाली-कुमाउँनी भाषा का तिरस्कार जारी है। भाषा और संस्कृति ही हमारी अस्मिता की पहचान है, मगर उत्तराखंड राज्य सरकार को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिलाने के प्रश्न पर मौन साधे हुए हैं। [...]
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