लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 1, 2011 पर प्रकाशित
नैनीताल फिल्म फेस्टिवल के तीसरे संस्करण के बाद यह उम्मीद की जानी चाहिये कि नैनीताल स्थायी रूप से वैकल्पिक फिल्मों के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण केन्द्र बन कर उभरेगा और समानान्तर सिनेमा के सभी महत्वपूर्ण व्यक्ति यहाँ के फिल्म समारोह में शामिल होकर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करेंगे। यह आसान काम नहीं है। समारोह [...]
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लेखक : विनीता यशस्वी :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 1, 2011 पर प्रकाशित
‘युगमंच’ और ‘जन संस्कृति मंच’ द्वारा नैनीताल में 30 अक्टूबर से 1 नवम्बर तक ‘प्रतिरोध का सिनेमा 3’ का आयोजन किया गया। इस बार का फिल्म महोत्सव फिल्म निर्देशक मणि कौल, नाट्यकर्मी गुरुशरण सिंह तथा कवि कुबेरदत्त की याद में था। फिल्मोत्सव का उद्घाटन करते हुए कवि मंगलेश डबराल ने कहा कि भूमंडलीकरण के दौर [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2011:: वर्ष :: 35 :September 14, 2011 पर प्रकाशित
इस अंक के साथ ‘नैनीताल समाचार’ अपने 34 वर्ष पूरे कर 35वें वर्ष में प्रविष्ट हो रहा है। हमारा यह जनमबार अंक ‘आपदा का एक वर्ष’ के रूप में प्रस्तुत है। इस एक साल में दो बड़ी आपदाओं से हमारा सामना हुआ। पहली आपदा जो ‘समाचार’ के लिये एकदम निजी तरह की थी, वह थी [...]
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लेखक : भगत दा :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 3, 2011 पर प्रकाशित
‘गुल हुई जाती है अफसुर्दा सुलगती हुई शाम। धुल के निकलेगी अभी चश्म ए महताब से रात . . .’ नैनीताल क्लब चौराहा, पाँगर के विशाल पेड़ों के ठीक नीचे बहते गधेरे से सटे व्यावसायिक भवन के अंदरुनी हिस्से का एक छोटा सा कमरा, जिसकी विशालकाय खिड़की से बहते नाले का स्वर रात के सुनसान [...]
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लेखक : जगमोहन रौतेला :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2011:: वर्ष :: 34 :September 3, 2011 पर प्रकाशित
जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ का नाम आते ही जेहन में एक फक्कड़ और बेपरवाह से आदमी की छवि घूम जाती है। गिर्दा से हालांकि मेरी ज्यादा मुलाकातें नहीं हो पाई थीं, लेकिन आठ-दस जो भी मुलाकातें हुई, उसमें हर बार उनको कुछ अलग ही देखा और पाया। आज के चाटुकारिता और चरण वंदना वाले भीषण [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 2, 2011 पर प्रकाशित
15-30 जून अंक में ‘ये समस्यायें सुनने वाले’ के जरिये लेखक ने जगह-जगह उग आए तथाकथित नेताओं (जिन्हें लेखक ने लगुआ-भगुवा कहा) की अच्छी खबर ली है। आम चुनाव नजदीक हैं तो ऐसे छद्म नेताओं ने भी जनता के साथ नजदीकियाँ गाँठ ली हैं। हताश-परेशान जनता इनकी छाँह तले थोड़ा सुकून (कोरे आश्वासन) पाकर धन्य-धन्य [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 22 || 01 जुलाई से 14 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 28, 2011 पर प्रकाशित
पूरन चन्द्र तिवारी मैं इंटर में पढ़ता था और मेरे रूम पार्टनर रमेश जोशी व भाष्करानन्द जोशी एम.ए. में। उनसे बातचीत में मालूम पड़ा कि छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट वर्तमान छात्रसंघ के खिलाफ भूख हड़ताल पर बैठे हैं। छात्र संघ स्टार पेपर मिल से अनुदान लेना चाहता था। जबकि बिष्ट पहाड़ [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 25, 2011 पर प्रकाशित
ज़हूर आलम (गिरदा के व्यक्तित्व के अनेक आयाम थे। एक कलाकार, एक आन्दोलनकारी या एक रंगकर्मी। उत्तराखण्ड में नाट्य परम्परा को बनाए रखने में तन, मन और धन से समर्पित वरिष्ठ रंगकर्मी और युगमंच के आधार स्तम्भ जहूर आलम ने गिरदा को अपने ढंग से महसूस करने की जो कोशिश की है, उसे यहाँ हम [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 21 || 15 जून से 30 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 25, 2011 पर प्रकाशित
कुलीन जोशी विश्वास नहीं होता कि गिर्दा नहीं रहे। अपनी तमाम स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और डॉक्टरों की हिदायतों को नजरंदाज कर जोशोखरोश से लबरेज कविता पाठ करते या गीत गाते गिर्दा को जिन लोगों ने भी देखा और सुना, उन सभी के लिये गिर्दा की मृत्यु की खबर पर विश्वास कर पाना बहुत मुश्किल है। [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 20 || 01 जून से 14 जून 2011:: वर्ष :: 34 :July 18, 2011 पर प्रकाशित
विजय जड़धारी गिरदा से मेरा मिलना जुलना भले ही कम हुआ, किन्तु कुछ मुलाकातों में ही ऐसा लगता है जैसे हम वर्षों एक साथ कार्य करते रहे हैं। उनके हाल-चाल के लिये जब मैंने शेखर पाठक से फोन पर जानकारी चाही तो तब तक वे उन्हें अलविदा कह कर आ रहे थे। गिरदा के अलविदा [...]
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