Browse: Home / girsih chandra tewari
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
वरिष्ठ होलियार चन्द्रशेखर कपिल ने अपने लटके-झटकों के साथ होली के बीच ‘अपने मजे का मजा’ किस्से को सुनाया तो नैनीताल समाचार के पटांगण में बैठे सभी रसिक श्रोता व होल्यार खिल उठे। सचमुच होली अपने मजे का मजा है। चाहे वह सत्ता प्रतिष्ठानों की हो या भूखे, नंगे, असहाय लोगों की या माफिया गठजोड़ [...]
Posted in विविध, सांस्कृतिक गतिविधियां | Tagged cultural activities, gajendra tripathi, girsih chandra tewari, holi festival, nainital samachar, nainital samachar holi |
लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2010:: वर्ष :: 33 :January 9, 2010 पर प्रकाशित
वक्त का सिलसिला यों ही चलता रहा और करता रहा बागियों को सलाम ! यों गुजरता रहा रात-दिन जुल्म से हर बगावत से पाता नया इक मुकाम। अपने–अपने समय के मेरे बागियो इस समय का तुम्हारे समय को सलाम ! हर बगावत ने जो भी नया कुछ रचा- गीत, नग्मा, रुबाई, गजल को सलाम [...]
Posted in कविताऐं-छंद-शेर | Tagged girda, girsih chandra tewari, new year poems, कविताऐं-छंद-शेर |
लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :February 15, 2009 पर प्रकाशित
होली 2008 में उत्तराखंड निकाय चुनावों की मारामार से गुजर रहा था। तब हमने होलियाना अभिव्यक्ति दी – मेरि बारी, मेरि बारी, मेरी बारी, अलिबेर होलिनैकि रङतै न्यारी काटी में मूताणा का लै काम नि ए जो, भोट माङण हुँणी भै ठाड़ी।। अलिबेर….. फिर 1 सितम्बर, ऐन खटीमा काण्डा 1994 का दिन, 5 सितम्बर और [...]
Posted in कविताऐं-छंद-शेर, विशेषांक, होली अंक | Tagged gaurda, gauri dutt pandey, girda, girsih chandra tewari, holi related poems |
लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2008:: वर्ष :: 32 :August 15, 2008 पर प्रकाशित
(इस गीत की प्रेरणा-नाल और तर्ज बहुप्रचलित पारम्परिक होली-‘नदी यमुना के तीर कदम चढ़ि कान्हा बजै गयो बाँसुरिया’ से सीधे-सीधे जुड़ी है।) नदी वार, तट पार चलो रे करें यात्रा नदियों की। हाँ! करें यात्रा नदियों की। कहाँ से उपजी कहाँ समाई कहाँ भई जलधार चलो रे करें यात्रा नदियों की। ‘ताल’ से उपजी, ‘गौला’ [...]
Posted in कविताऐं-छंद-शेर, जनमवार अंक, विशेषांक | Tagged girda, girsih chandra tewari, river edition, नदी अंक |
लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2008:: वर्ष :: 31 :April 14, 2008 पर प्रकाशित
मेरि बारी, मेरि बारी, मेरि बारी, हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी। हाई रे! अलिबेर यो देखौ मजेदारी।। धो-धो कै तो सीट जरनल भै छौ, धो-धो कै ठाड़ हूँणै ऐ बारी। हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी।। फिर बीस बरसै की छुट्टी भै कूँनी, फिरी काँ आली हमरी बारी। हाई रे! अलिबेर होलिनै रंगतै न्यारी।। [...]
Posted in कविताऐं-छंद-शेर | Tagged election, girsih chandra tewari, holi poems, local elections, हास्य-व्यंग्य |
लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
होली की बधाई होली के अवसर पर लोक से वर्तमान तक की यह काव्य यात्रा सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनियाँ के संदर्भ में देखी -समझी जानी चाहिये इसी उम्मीद के साथ होली की बधाई….. नदी तू बहती रहना नदी तू बहती रहना पर्वत की चिट्ठी ले जाना, तू सागर की ओर, [...]
Posted in कविताऐं-छंद-शेर | Tagged girsih chandra tewari, holi edition 2008, holi poems, holi related poems, umesh dobhal |
लेखक : विशेष प्रतिनिधि :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 31, 2008 पर प्रकाशित
महिला समाख्या, नैनीताल द्वारा आयोजित दो दिवसीय शिक्षा उत्सव में धारी, बेतालघाट, रामगढ़ एवं ओखलकांडा की सैकड़ों महिलाओं द्वारा भागीदारी की गई। जिला कार्यक्रम समन्वयक डॉ. बसंती पाठक द्वारा बताया गया कि महिला समाख्या भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परियोजना है, जो अस्सी के दशक में आई नई शिक्षा नीति के तहत [...]
Posted in विविध, सांस्कृतिक गतिविधियां | Tagged girsih chandra tewari, woman condition, women, women empowerment |
लेखक : गिरीश तिवाड़ी 'गिर्दा' :: अंक: 10 || 01 जनवरी से 14 जनवरी 2008:: वर्ष :: 31 :January 16, 2008 पर प्रकाशित
(धुन-नदी जमुना के तीर कदम चढ़ी) चलो नदी तट वार चलो रे चलो नदी तट पार चलो रे,करें यात्रा नदियों की नदी वार तट पार चलो रे,करें यात्रा नदियों की इन नदियों के अगल-बगल ही जीवन का विस्तार,चलो रे करें यात्रा नदियों की आज इन्हीं नदियों के ऊपर पड़ी है मारामार, चलो रे करें यात्रा [...]
Posted in कविताऐं-छंद-शेर | Tagged girda, girsih chandra tewari, poem, river, river poem |
पृष्ठ 1 कुल 1 पृष्ठों में..पृष्ठ : 1
आपकी टिप्पणीयाँ