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लेखक : भुवन बिष्ट :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :July 31, 2011 पर प्रकाशित
हरदा ठीक ही ठहरा शहर जाकर तुम भी बदल गये तुम्हारे बदलते ही बदल गया समयचक्र समय से पहले पकने लगे हैं काफल और हिसालू और फसल सूखने के बाद बरसता है आसमान कुछ होता भी है तो चले आते हैं जंगली जानवर कहीं खो गयाी है फूलदेई और घुघुती फलों में बौर लगते ही [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 21 || 15 जून से 31 जून 2008:: वर्ष :: 34 :July 23, 2011 पर प्रकाशित
इस बार पहाड़ में प्रकृति का एक नया रूप देखने को मिल रहा है। इस साल जंगलों में धधकती आग के बदले ओलावृष्टि व विनाशकारी आँधी- तूफान की खबरें प्रमुख हैं। वैसे अप्रेल-मई में ओलावृष्टि या अंधड़ असामान्य नहीं हैं। यह ‘चल वसन्त’ कहलाता है। लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ ऐसी घटनायें कम होती चली [...]
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लेखक : डॉ. बी.आर. पंत :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
अन्तर्राष्ट्रीय भूगोलवेत्ताओं के संघ के तत्वावधान में पर्वतों एवं सीमान्त क्षेत्रों में वैश्वीकरण के स्थानीय एवं क्षेत्रीय प्रभाव विषय पर 1 से 9 मई 2011 के बीच भूगोल विभाग डी.एस.बी. परिसर कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल के प्रो. रघुवीर चन्द्र के संयोजकत्व में एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व के लगभग पन्द्रह देशों स्विटजरलैंड, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 16 || 01 अप्रेल से 14 अप्रेल 2011:: वर्ष :: 34 :May 8, 2011 पर प्रकाशित
….तो इस तरह महाराज पूरा हुआ ऋतु चक्र और बीत गया एक साल फिर से इस बीच पाने के साथ-साथ बहुत कुछ खोया भी हमने हड्डियों से मजबूती और आँखों से रोशनी कुछ और हो गई कम रिश्तों से फिसल गया थोड़ा और विश्वास और शब्दों से तक दूर हो गई शर्म मेरे पास भी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 11 || 15 जनवरी से 31 जनवरी 2011:: वर्ष :: 34 :January 28, 2011 पर प्रकाशित
प्रवीन कुमार भट्ट गंगा इन दिनों अजीब विरोधाभासों का सामना कर रही है। एक ओर पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर टिहरी में बनाये गये भीमकाय बाँध के प्रबंधकों ने अधिक पानी रोककर जलधारा को पहले से भी सीमित कर दिया है। ठंड बढ़ने के साथ ही पहाड़ों में बर्फबारी तो खूब [...]
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लेखक : गजेन्द्र पाठक :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 11, 2011 पर प्रकाशित
पिछले कई वर्षों से सूखा झेल रहे उत्तराखण्ड के लिये 2010 का साल खूब वर्षा लेकर आया। मगर एक बार जब वर्षा शुरू हुई तो उसने रुकने का नाम नहीं लिया। वर्षा के सारे कीर्तिमानों को ध्वस्त करते हुए इतना पानी बरसा कि उसे बाँधने की क्षमता जमीन, गाड़-गधेरों या नदियों में नहीं रही। मानव [...]
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लेखक : दिनेश पंत :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
जनवरी माह के शुरूआती दिनों में भी पहाड़ सूखे हैं, लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। बादल नित धोखा दे रहे हैं। नदियाँ अपने निम्न स्तर पर पहुँच चुकी हैं। जिन पहाड़ों में शीत ऋतु के प्रारंभ में ही बारिश व बर्फबारी का नजारा होता था, नदियाँ लबालब भरी रहती थीं, वहाँ के हालात [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2009:: वर्ष :: 33 :October 8, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : ग्रेन एक चिन्तित नागरिक द्वारा जनहित में प्रसारित मैक्सिको में तबाही मची हुई है। अभी तक मैक्सिको में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। और इन मौतों के पीछे है स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू का वायरस सूअर, मुर्गी और मनुष्यों में होने वाले इन्फ्लुएंजा के वायरसों के आपस में मिलने से पैदा हुआ [...]
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लेखक : भुवन जोशी :: अंक: 03 || 15 सितम्बर से 30 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 24, 2009 पर प्रकाशित
उत्तरकाशी जिले में स्थित 4,000 मीटर से लेकर 1,500 मीटर में स्थित गोमुख, भोजवासा, धराली, हर्शिल, दानपुर, रैंथल, दयारा, बड़कोट, नौगाँव, खलाड़ी, पुरोला क्षेत्रों के एक सामान्य अध्ययन से पता चला कि यहाँ का जन जीवन दिन प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। निरीह ग्रामीण विकराल होती आपदाओं के शिकार हो रहे हैं। साथ ही [...]
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लेखक : राधा बहन :: अंक: 24 || 01 अगस्त से 14 अगस्त 2009:: वर्ष :: 32 :August 1, 2009 पर प्रकाशित
मैं ऋषिकेश से व्याँसी, देवप्रयाग व श्रीनगर होते हुए बद्रीनाथ राजमार्ग से हेलंग तक व वहाँ से उर्गम घाटी के लिये जा रही थी। बसों, टैक्सियों, रेस्तराओं, पर्यटक केन्द्रों और शोरूमों पर हर जगह एक ही शब्द लिखा मिलता था ‘देवभूमि उत्तराखण्ड’। बार-बार कर उभर-उभर कर आने वाला यह वाक्य मानो जबरन सिद्ध करने का [...]
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