वह ‘देवत्व’ तो अब दिखाई नहीं दे रहा है देवभूमि में
मैं ऋषिकेश से व्याँसी, देवप्रयाग व श्रीनगर होते हुए बद्रीनाथ राजमार्ग से हेलंग तक व वहाँ से उर्गम घाटी के लिये जा रही थी। बसों, टैक्सियों, रेस्तराओं, पर्यटक केन्द्रों और शोरूमों पर हर जगह एक ही शब्द लिखा मिलता था ‘देवभूमि उत्तराखण्ड’। बार-बार कर उभर-उभर कर आने वाला यह वाक्य मानो जबरन सिद्ध करने का [...]
जलवायु परिवर्तन की मार उच्च हिमालयी इलाकों पर भी पड़ रही है
जलवायु परिर्वतन के गंभीर प्रभाव हिमालय के वातावरण, तापमान, भूमि, जैव विविधता, आजीविका और संस्कृति आदि पर भी दिखने लगे हैं। बागेश्वर जिले के कपकोट विकास खण्ड में समुद्र सतह से 3,000 मीटर ऊँचाई के आसपास स्थित ग्राम खाती, बाछम, उमला, भगदानू, खलीधार(सेरा) व सूपी गाँवों के ग्रामीणों से सम्पर्क के दौरान पता चला कि [...]
आदिवासी और ग्रामीण ही राहत दिला सकते हैं ग्लोबल वार्मिंग से
प्रस्तुति : दिनेश भट्ट हाल के दिनों में भारतीय उद्योगपति ही नहीं, वैज्ञानिक भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आये हैं। पहले पर्यावरण संरक्षण के लिये डॉ. राजेन्द्र पचौरी की संस्था को अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर के साथ नोबेल पुरस्कार दिया गया और अभी हाल ही में देहरादून स्थित वाडिया इंस्ट्टियूट के वैज्ञानिक [...]
मौसम के पूर्वानुमान को लेकर बहुत गंभीर नहीं है मीडिया
ऐसी चर्चा है कि इस शताब्दी में ग्लोबल वॉर्मिंग के प्रभावों के कारण ग्लेशियर समाप्त हो जायेंगे तथा जीवनदायिनी गंगा विलुप्त हो जायेगी। समुद्रतटीय शहर समुद्र में डूब जायेंगे। ग्लोबल वॉर्मिंग एक विश्वव्यापी समस्या बनती जा रही है। एक रेडियो न्यूज के अनुसार सियाचिन में ग्लेशियर आज भी 10 वर्ष पूर्व स्थिति में हैं। उनमें [...]
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