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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2011:: वर्ष :: 35 :December 17, 2011 पर प्रकाशित
इस पखवाड़े चर्चा में आयी तीन प्रमुख घटनाओं से देश का मौजूदा परिदृश्य समझने में मदद मिलती है। केन्द्र सरकार ने खुदरा व्यापार में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को अनुमति देने का निर्णय किया है। इसका न सिर्फ समाज के प्रबुद्ध लोगों और आन्दोलनकारी संगठनों ने विरोध किया है, बल्कि पक्ष-विपक्ष के सभी राजनैतिक दल, जो [...]
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लेखक : विजय जड़धारी :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 16, 2011 पर प्रकाशित
कृषि व पशु पालन सम्बन्धी विभिन्न समस्याओं को लेकर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आये किसान एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 25 अगस्त 2011 को नई टिहरी में विशाल प्रदर्शन कर एक सभा की। ‘बीज बचाओ आन्दोलन’ की अगुवाई में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि हमारी जीवन पद्धति व संस्कृति के साथ ही [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 04 || 01 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2011:: वर्ष :: 35 :October 15, 2011 पर प्रकाशित
भ्रष्टाचार की दिनोंदिन लंबी होती फेहरिस्त में अब गृह मंत्री पी. चिदम्बरम का नाम उछलने से बहतु सारे लोग भौंचक्के हो सकते हैं, लेकिन इस घटना पर आश्चर्य करने की कोई जरूरत नहीं है। 20 वर्ष पूर्व आर्थिक उदारीकरण का जो रास्ता हमने अपनाया उसने देश की पूरी तरह केन्द्रीकृत सत्ता व्यवस्था के साथ मिल [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 23 || 15 जुलाई से 31 जुलाई 2011:: वर्ष :: 34 :August 3, 2011 पर प्रकाशित
देवेश जोशी बाज़ारीकरण के इस दौर में जबकि शिक्षा एक बड़े बाज़ार में तब्दील हो चुकी है और राजकीय विद्यालयों के स्तरहीन होने और राजकीय शिक्षकों के लगभग गैर जिम्मेदार होने की चर्चाएँ अधिकतर होती रहती हैं, विश्वास करना शायद कठिन होगा कि ऐसा भी एक शिक्षक अपने प्रदेश में है, जिसने उच्च शिक्षित होने [...]
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लेखक : महेश जोशी :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
मई दिवस के अवसर पर नैनीताल में गोविन्द बल्लभ पंत पार्क में सम्पन्न एक सभा में असंगठित व बिखरे क्षेत्र के मजदूरों को संगठित करने का निर्णय लिया गया। उत्तराखंड में व्याप्त माफिया के खिलाफ मुहिम चलाने के लिये एकजुट होने की अपील की गई व तय किया गया कि एक साझा मंच बनाया जायेगा। [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 19 || 15 मई से 31 मई 2011:: वर्ष :: 34 :June 2, 2011 पर प्रकाशित
ललित पोखरिया उत्तरांचल संस्कृति युवा मंच द्वारा 1 मई को भारतेन्दु नाट्य अकादमी के बी.एम. शाह प्रेक्षागृह में नवीन जोशी के बहुचर्चित उपन्यास ‘दावानल’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘दावानल’ की पृष्ठभूमि से प्रेरित राहुल सिंह बोरा द्वारा लिखित एवं जीवन सिंह रावत द्वारा निर्देशित लघु फिल्म ‘आमा’ का प्रदर्शन भी [...]
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लेखक : गजेन्द्र पाठक :: अंक: 07 || 15 नवंबर से 30 नवंबर 2010:: वर्ष :: 34 :January 11, 2011 पर प्रकाशित
पिछले कई वर्षों से सूखा झेल रहे उत्तराखण्ड के लिये 2010 का साल खूब वर्षा लेकर आया। मगर एक बार जब वर्षा शुरू हुई तो उसने रुकने का नाम नहीं लिया। वर्षा के सारे कीर्तिमानों को ध्वस्त करते हुए इतना पानी बरसा कि उसे बाँधने की क्षमता जमीन, गाड़-गधेरों या नदियों में नहीं रही। मानव [...]
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लेखक : दिनेश पंत :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
जनवरी माह के शुरूआती दिनों में भी पहाड़ सूखे हैं, लोग आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। बादल नित धोखा दे रहे हैं। नदियाँ अपने निम्न स्तर पर पहुँच चुकी हैं। जिन पहाड़ों में शीत ऋतु के प्रारंभ में ही बारिश व बर्फबारी का नजारा होता था, नदियाँ लबालब भरी रहती थीं, वहाँ के हालात [...]
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लेखक : अरविंद मुद्गल :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
विभिन्न संस्कृतियों के अनेको रंगों से रंगे देश में रंगो का त्योहार है होली, जिसके ये रंग अब देशवासियों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का एक हिस्सा हैं। यहाँ तो साल भर होली है। कभी सीमा पार से आतंकी आकर निर्दोषों के खून से होली खेलते हैं तो कभी अपने ही अपनों का लाल रंग बेरंग [...]
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लेखक : पवन राकेश :: अंक: 12 || 01 फरवरी से 14 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 8, 2010 पर प्रकाशित
मैं तय नहीं कर पा रहा हूँ कि हम इस गणतंत्र के लायक नहीं हैं या यह गणतंत्र हमारे लायक नहीं रह गया है। गणतंत्र-लोकतंत्र की जो परिभाषा हमने पढ़ी है वह बेमानी लगने लगी है। नई परिभाषा बनाने की जरूरत है। तंत्र और लोक का रिश्ता भेड़िये और मेमने का है जो मेमने को [...]
Posted in विविध | Tagged development, globalisation, republic day |
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