हम इस गणतंत्र के काबिल नहीं
मैं तय नहीं कर पा रहा हूँ कि हम इस गणतंत्र के लायक नहीं हैं या यह गणतंत्र हमारे लायक नहीं रह गया है। गणतंत्र-लोकतंत्र की जो परिभाषा हमने पढ़ी है वह बेमानी लगने लगी है। नई परिभाषा बनाने की जरूरत है। तंत्र और लोक का रिश्ता भेड़िये और मेमने का है जो मेमने को [...]
चलो, पता तो करें, हम कहाँ जा रहे हैं
प्रस्तुति : गजेन्द्र नौटियाल उत्तराखंड में विकास दर 9 फीसदी से ज्यादा हो गई है और राज्य के जंगल विश्व की 11 फीसदी से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन को सोखने में सक्षम हैं। ये दो बातें हैं जिस पर हमारे प्रदेश के मुखिया और नौकरशाह खूब इतरा रहे हैं। दोनों का यहाँ की जनता से कोई [...]
संघर्षों की जले मशाल
महिला जागृति महासंघ धारी और रामगढ़ (जिला नैनीताल) ने अपने क्षेत्र की समस्याओं के प्रति जनता का ध्यान खींचने तथा उनको जोड़ने के उद्देश्य से 17 से 22 जनवरी तक पदयात्रा की। लगभग 5 सालों से ये संगठन इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। महिला उत्पीड़न के मामलों से शुरू होकर अब ये जल, [...]
खेती किसानी की लूट का असली चेहरा
डॉ. ब्रह्मदेव शर्मा* हमारे देश में जमीन धीरे-धीरे बाजार की वस्तु बनती गई है। यह साफ है कि आगे-पीछे जमीन किसान के हाथ से निकल जायेगी और पुलपुले हाथों वाले पैसे वालों के पास चली जायेगी। अपने चारों ओर हो रही घटनाओं के आधार पर तो हम यह कही रहे थे कि जिसमें बाजार की [...]
स्वाइन फ्लू तो वैश्वीकरण का उपहार है
प्रस्तुति : ग्रेन एक चिन्तित नागरिक द्वारा जनहित में प्रसारित मैक्सिको में तबाही मची हुई है। अभी तक मैक्सिको में सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं। और इन मौतों के पीछे है स्वाइन फ्लू। स्वाइन फ्लू का वायरस सूअर, मुर्गी और मनुष्यों में होने वाले इन्फ्लुएंजा के वायरसों के आपस में मिलने से पैदा हुआ [...]
अब व्यापारी समझे मॉल की हकीकत
प्रस्तुति : रुपेश कुमार सिंह 1991-92 में जब भारत को विश्व व्यापार संगठन के दायरे में लाया जा रहा था, और जानकार लोग इसके दुष्परिणामों के बारे में चेता रहे थे, तब व्यापारी वैश्वीकरण में अपना फायदा देख रहे थे। एन.डी.ए. सरकार द्वारा आयात पर से मात्रात्मक प्रतिबंध समाप्त किये जाने पर व्यापारियों ने विरोध [...]
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