अंक: 08 || 01 दिसंबर से 14 दिसंबर 2012 – 2
[समयाभाव के कारण यह पूरा अंक दो भागों में अपलोड किया गया है, असुविधा के लिये खेद है। कृपया पूरा पढें। ] निहित स्वार्थों ने कृषि निदेशालय को फुटबॉल बनाया : रीता खनका जब केन्द्र से अनुदान लेना हो तो उत्तराखण्ड के पहाड़ी राज्य होने का तर्क गिनाया जाता है, लेकिन जब कोई संस्थान या [...]
बगावत के बीच घिसटती सरकार
13 मार्च 2012 को छठे मुख्यमंत्री के रूप में उत्तराखंड की बागडोर संभालने वाले विजय बहुगुणा का कार्यकाल मजाक बन कर रह गया है। जिस तरह एक के बाद उनके दल के विधायक उनसे रूठे हैं और मंत्री आपस में लड़ रहे हैं, उससे लगता है कि प्रदेश में सरकार जैसी कोई चीज ही नहीं [...]
गन्ना किसानों को अनदेखा कर रही है सरकार
गन्ना उत्पादक किसानों का बकाया भुगतान कराने में सरकार कतई गंभीर नहीं है। शुगर लॉबी के हावी होने एवं राज्य सरकार की लाचारी ने एक बार फिर बकाया गन्ना भुगतान की लड़ाई विपक्ष के हाथों में सौंप दी है। किसानों के हितों की बात करने वाली सरकार ने गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिये [...]
वे एक बार फिर उजड़ेंगे
1978 में जब टिहरी बाँध की नींव रखे जाते समय, सबसे पहले पुरानी टिहरी के उस पार बसे खांड गाँव के 300 परिवारों को देहरादून जिले के रायवाला और भनियावाला में वन भूमि में बसाया गया था। हरिद्वार-देहरादून मार्ग पर देहरादून से करीब 35 किमी की दूरी पर रायवाला में बसाए गए 100 में से [...]
या ब्रज देश निगोड़ा
विवेक डसीला उत्तराखंड में अब कुछ जिलों का प्रशासन भी बिकने के लिए तैयार है। बस आपकी गाँठ में रोकड़ा होना चाहिए।मंत्री-नेता की सिफारिश से रियायत की कोई गारंटी नही। दरअसल इस छोटे से राज्य को अब तक के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और नेताओं से प्रेरणा लेकर ही तो प्रशासन ने यह रास्ता अख्तियार किया है। [...]
पेड़ काटो, जुर्माना दो, मकान बनाओ
कमल जगाती पेड़ काटो चालान कराओ और घर बनाओ ! यही हो रहा है नैनीताल में। वन विभाग के द्वारा लगभग साठ मामलों में अवैध निर्माण की सूचना प्राधिकरण को दी गई थी। कई मामलों में लोगों ने अपने प्लाट में से पेड़ ही गायब कर दिए। पकडे़ गये लोगों के चालान हुए, जिसे भुगत [...]
फार्मसिस्टों को तुगलकी फर्मान
लखनऊ में बंद कमरों के भीतर से हिमालयी क्षेत्र के लिए अव्यावहारिक आदेश निकलने के कारण ही उत्तराखण्ड राज्य की माँग उठी थी। मगर राज्य बनने के बाद भी यह क्रम जारी है। उत्तराखण्ड सरकार ने फार्मासिस्टों को शिड्यूल-एच की दवाइयाँ फोन द्वारा डॉक्टर से पूछने के बाद ही लिखने का जो आदेश दिया है, [...]
ग्राम प्रहरियों का सरकारी शोषण
पौड़ी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तैनात ग्राम पहरियों की सरकार कोई सुध नहीं ले रही है। वे मात्र दो सौ रुपये मासिक वेतन पर जान जोखिम में डालकर अपना कार्य कर रहे हैं। इनकी नियुक्ति 2003-04 में जिलाधिकारी द्वारा की गई थी और तब से उनके वेतन में कोई वृद्धि नहीं की गयी। इनके [...]
अच्छे प्रशासन का इनाम: 11 साल 21 ट्रांस्फर
हरीश चन्द्र इन दिनों उत्तराखंड में भ्रष्टाचार खत्म करने की भारी भरकम बातें की जा रही हैं, लेकिन प्रदेश में माफिया तंत्र किस कदर हावी है इसका अंदाजा माफियाओं पर सख्ती से रोक लगाने वाले जे. सी. कांडपाल के त्वरित स्थानान्तरणों को देख लगाया जा सकता है। इस प्रशासनिक अधिकारी को 11 वर्ष की नौकरी [...]
संस्कृति संरक्षण के सामने प्रश्नचिन्ह है मोलूदास की मौत
लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रदेश सरकार की गंभीरता का अंदाजा ढोलवादक मोलूदास की असमय मौत से लगाया जा सकता है। अपने चहेतों को यूँ ही लाखों रुपए दे देने वाली सरकार को उनके इलाज की सुध भी नहीं आई। मोलूदास को लकवा पड़ने के बाद श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती करवाया गया। [...]
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