मुख्यमंत्री अब करने लगे हैं लोक लुभावन घोषणायें….
मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी अब लोक लुभावन घोषणाओं पर उतर आये हैं। किसानों को बिजली की पेनाल्टी की माफी, सचिवालय में संविलयन की मांग कर रहे संबद्ध कर्मचारियों को तोहफा, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण और उनके कल्याण का फैसला, जमीन की कीमतों में इजाफा रोकने के लिये इमारतों की ऊँचाई को बढ़ाने की मंजूरी [...]
थैंग गाँव में असंतोष है
चमोली जिले के जोशीमठ सीमान्त ब्लॉक मुख्यालय से 25 किमी. की दूरी पर बसा है थैंग गाँव। मोटर मार्ग मारवाड़ी से 12 किमी. पैदल दूरी पर है। इस क्षेत्र की जनता ने 13 अक्टूबर 2007 से 14 दिनों तक क्षेत्रीय विकास की माँग को लेकर क्रमिक धरना प्रदर्शन किया, लेकिन शासन-प्रशासन ने कोई सुध नहीं [...]
मुख्यमंत्री जी, बतायें तो कि हमारी हैसियत क्या है ?
सेवा में, श्री भुवन चन्द्र खंडूरी, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड, देहरादून महोदय, एक मुख्यमंत्री के रूप में आप इतने व्यस्त होंगे कि यदि यह मेरे लिये अपमान और आक्रोश का मामला न होता और सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग का प्रभार आपके पास नहीं होता तो शायद यह पत्र लिखने की मूर्खता मैं न करता। लेकिन इस [...]
आंदोलनकारियों का कोई ग्वाल-गुसैं नहीं
उत्तराखण्ड राज्य स्थापना के सात वर्षों के भीतर खटीमा, मसूरी, मुजफ्फरनगर, श्रीयंत्र टापू, देहरादून, नैनीताल व कोटद्वार में हुई शहादतों का स्मरण औपचारिकता मात्र रह गया है। आन्दोलनकारियों की शहादत को ‘बलिदान दिवस’ के रूप में मनाने वालों की संख्या अब अंगुलियों पर गिनी जाने लगी है। शहीदों को याद करने के लिए आयोजित कार्यक्रम [...]
बिना रीडिंग के बिजली बिल
उत्तराखंड विद्युत बोर्ड लिमिटेड के दोहरे व्यवहार से मंदाकिनी घाटी की आम जनता बेहाल है। जहाँ एक ओर आसमान छूती बिजली दरें लोगों के जीवन में जहर घोल रही हैं, वहीं दूसरी ओर विद्युत आपूर्ति में निरन्तरता का कायम न रहना भी लोगों की परेशानी का सबब बन रहा है। जहाँ तक मुझे याद है, [...]
समस्या का समाधान नहीं है भू अध्यादेश
कांग्रेस सरकार द्वारा दो बार, पहला 12 सितम्बर 2003 को और दूसरा 15 जनवरी 2004 को, भू अध्यादेश लाये जाने के बाद भाजपा की खंडूरी सरकार भी 2 मई 2007 को एक नया भू अध्यादेश ले आई। क्या माना जाये कि राज्य की राजनीति में जमीन का सवाल सचमुच प्राथमिकता में आ गया है ? [...]
ग्रामीण कहाँ होता है ग्राम विकास की योजनाओं में
सरकार गाँवों में सब्सिडी वाली वित्तपोषित योजनाऐं ला रही है। यदि गाँव वाले उन योजनाओं पर अपना पैसा लगा कर या बैंक इत्यादि से कर्जा ले एक रकम खर्च करते हैं तो सरकार उन्हें उस पर लगभग 25 प्रतिशत अनुदान दे रही है। हाल में यहाँ एक सार्वभूम नाम की योजना आई, जिसमें बागवानी, ऊन [...]
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