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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
होली की बधाई होली के अवसर पर लोक से वर्तमान तक की यह काव्य यात्रा सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश और दुनियाँ के संदर्भ में देखी -समझी जानी चाहिये इसी उम्मीद के साथ होली की बधाई….. नदी तू बहती रहना नदी तू बहती रहना पर्वत की चिट्ठी ले जाना, तू सागर की ओर, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
[बगरो बसंत में इस बार प्रस्तुत है ‘नया ज्ञानोदय’ के विशेषांक ‘बिन पानी सब सून’ में प्रकाशित अष्टभुजा शुक्ल का रम्य निबंध - पानी पर पटकथा तथा महाकवि कालीदास के मेघदूत का काव्यानुवाद का एक अंश जिसका रुपान्तर केशव प्रसाद मिश्र ने किया है। साथ ही स्व. खड़क सिंह खनी की आत्मकथा - ‘सूरज को [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
पिछले पांच सालों में जिस तेजी से स्थानीय स्तर के समाचारों का चस्का गली-मोहल्लों में लगा है, उसने अब हमारे त्यौहारों को भी समाचार बना डाला है। समाचार होना अच्छी बात है लेकिन पेज रंगीन करने वाली पत्रकारिता के हाथों त्यौहारों का संचालन निश्चित रूप से तमाशा बनकर एक दिन सबको चिढ़ायेगा। जिसकी शुरूआत हो [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
होली क्या भारत का ही त्यौहार हो सकता है ? भारत के पूर्व में अन्य देश हैं जो वसंत में इसी प्रकार का उत्सव उल्लास से मनाते हैं। इनमें हैं, म्याँमार (बर्मा), थाइलैंड, लाओस और कम्बोडिया में कहीं-कहीं। लेकिन उनमें दिन भर एक-दूसरे पर पानी की बाल्टियाँ उँडेल भिगाने को हास-परिहास के अलावा अन्य कुछ [...]
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लेखक : केशव भट्ट :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
बागेश्वर: पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत की पहल पर बागेश्वर में 3 दिन तक चले कुमाऊँ महोत्सव में कई प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिला। उत्तरायणी के बाद ही हुए इस महोत्सव के बारे में जनता का कहना था कि इस बेशकीमती क्षणों को यदि कुमाऊँ शरदोत्सव के नाम से जाडों की रामलीला में खर्च किया [...]
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लेखक : महेश पुनेठा :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 30, 2008 पर प्रकाशित
गंगोलीहाट की होली देखने का मौका पहले-पहल मुझे वर्ष 1993 में मिला जब मेरी पहली नियुक्ति इस क्षेत्र में हुई। उस वर्ष उपराड़ा में कवि गुमानी पर एक कार्यक्रम हुआ था जिसमें कुमाऊँ भर से अनेक विद्वान साहित्यकार इतिहासकार व संस्कृतिकर्मी यहाँ एकत्रित हुए थे। एक अच्छी शुरूआत थी परंतु न जाने क्यों आगे नहीं [...]
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लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 30, 2008 पर प्रकाशित
तलाऊ खेतों में गेहूँ और मसूर की अगेती फसल गदरा कर फूल रही है। जौ में पियाली आ गई है। उनके दानों में भरा हुआ दूध पुष्ट हुआ कि नहीं? झंखाड़ की आग में अधजला भूँजकर देखना ‘होरा’ कहलाता है। परन्तु स्वाद तो आग में नहीं जीभ में रख कर देखने की चीज है। दाँतों [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 30, 2008 पर प्रकाशित
बाकी साल आये न आये, होली में पंडित जी की अक्सर याद आ जाती है। न जाने कैसे होंगे ? पता नहीं जिन्दा हैं भी कि नहीं। इन तीन-चार सालों में उनसे भेंट ही नहीं हो पायी। पिछली बार ही जब भेंट हुई, वे नब्बे से ऊपर थे और बीमार चल रहे थे। अगर मर [...]
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