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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
शंभु ने आज होली मचाई। इत दल साज्यो शिव शंकर ने, उत दल गिरिजा लाई। रंग गुलाल चलें दोउ दल में, शोभा ललित बनाई-सखी छवि वरणि न जाई। शंभु ने आज होरी मचाई गिरिजा झपट चली सखियन ते शंकर सन्मुख आई। भर पिचकारी दृगन में मारी मुख से लख मुसकाई।। देख शिव रूप लुभाई शंभु [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
एक बार फिर होलियाँ सामने हैं। सामाजिक सद्भाव का यह एक विलक्षण पर्व है, जिसमें हास्य होता है, लेकिन कटुता नहीं होती। व्यंग्य होता है, मगर उससे कोई रंजिश नहीं जनमती। अश्लीलता होती है, लेकिन वह सहज भाव से स्वीकार कर ली जाती है। काश, होली से इतर भी हमारे समाज में ऐसी सहिष्णुता, इतनी [...]
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लेखक : राम सिंह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
माधुर्य, प्रेम और सौन्दर्य का पर्व होली मानव और मानवेतर प्रकृति में बदलाव का नूतन संदेश लेकर आता है। वृक्षों, लताओं, बेलों में नव पल्लव, कोपलें, पुष्प और उन पर मँडराते भ्रमरों-तितलियों के झुण्ड प्रकृति को संगीतमय बना देते हैं। नीरस पतझड़ और काटने वाली वायु के झोंकों के स्थान पर प्रकृति का नव पल्लवों [...]
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लेखक : अरविंद मुद्गल :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
विभिन्न संस्कृतियों के अनेको रंगों से रंगे देश में रंगो का त्योहार है होली, जिसके ये रंग अब देशवासियों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का एक हिस्सा हैं। यहाँ तो साल भर होली है। कभी सीमा पार से आतंकी आकर निर्दोषों के खून से होली खेलते हैं तो कभी अपने ही अपनों का लाल रंग बेरंग [...]
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लेखक : रमेश परगाई :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
होली गाने व मनाने के तरीकों में जो अंतर कुमाऊँ में अलग-अलग जिलों में व इलाकों में है वही अंतर नंधौर घाटी में भी है। यहाँ पुरुष ही होली गाते हैं। वसंत ऋतु अपने साथ अनेक रंगों को भी लाती है। किसानों को खेती के काम से भी इसी समय अधिकतर राहत रहती है, इसलिये [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
(‘बगरो बसंत है’ में इस बार सुधी पाठकों के लिये प्रस्तुत है प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाईं की व्यंग्य रचना ‘घायल वसन्त’ तथा उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की कविता ‘होली ) घायल वसन्त कल वसन्तोत्सव था। कवि वसन्त के आगमन की सूचना पा रहा था- ‘प्रिय, फिर आया मादक वसन्त।’ मैंने सोचा, जिसे वसन्त के आने [...]
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लेखक : भगत दा :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
बीसवीं सदी का आखिरी दशक लोकल कमान से लेकर हाई कमान तक हुक्काराम के संघर्ष की कहानी अब हमारे लिये कम रोचक नहीं रही। एक बार अनजाने में हमने उन्हें अनसुना कर दिया तो उन्होंने हमें विरोधी गुट वालों की सूची में शामिल कर हमारी छलड़ी कर दी। तब से हमारी मेजबानी का तरीका ही [...]
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लेखक : कौस्तुभानन्द पंत :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
मेरे गाँव में वसन्त हर्षोल्लास और त्यौहार समारोह लेकर आता था। सरसों का फूलना, पादपों में नये कोंपल आना, फूलों का खिलना, पक्षियों का कूजन कुमाऊँ में ऊँचाई और निचाई के अनुसार आगे-पीछे होता रहता है, किन्तु प्रकृति के सँवरने-सजने में देर सबेर भले ही हो जाये, हमारे गाँव के दो कदीमी ऋतु रैंण गाने [...]
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लेखक : प्रयाग जोशी :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
हमारे यहाँ कौन होली किस दिन गानी है, इस तरह का चुनाव परम्परा-परिपाटी से ही देखने में आता है। देशाचार के अनुसार दशमी बेध एकादशी को देवी-देवताओं की होलियाँ होती हैं। आँवला एकादशी और द्वादशी को भगवान की बाल-लीलाओं, विनय और स्तुतियों की होलियाँ सुनने को मिलती हैं। त्रयोदशी से रस की होलियों के साथ-साथ [...]
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लेखक : हरीश चन्द्र चंदोला :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
पहाड़ में ऐसा कोई त्यौहार नहीं होता, जिसमें उड़द दाल की पकौड़ियाँ न बनती हों। अब होली आ रही है और उसके लिए सभी पहाड़ी परिवार पकौड़ियाँ बनाना चाहेंगे। लेकिन यह कमरतोड़ महंगाई का साल है और गरीब किसानों के लिये पकौड़ियाँ बनाना संभव हो भी पायेगा कि नहीं, कहा नहीं जा सकता। दाल का [...]
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