वाह फागुन की हवायें…… होली है !
कैसे-कैसे रंग लेकर आती हैं फागुन की हवायें ? जितने चेतन पदार्थ, उतने रंग। जितने प्राणी, उतने रंग। जितने मनुष्य, उतने रंग। कोई लम्बी नींद से जागता है, कोई लम्बी नींद सो जाता है। कोई चहकता है, कोई महकता है, कोई फुदकता है, कोई लहराता है। कोई साथियों की खोज में चल पड़ता है, तो [...]
संघर्षों की जले मशाल
[पिछ्ले अंक में आपने 17 से 22 जनवरी तक चली पदयात्रा की पहली रपट पढ़ी...आज पढ़िये उससे आगे] लोध में सम्पन्न हुई बैठक में पता चला कि इन गाँवों की जमीन बिल्कुल बिकी नहीं है, क्योंकि यहाँ सड़क भी अब जाकर आ रही है तथा हिमालय का दृश्य भी यहाँ से उतना सुन्दर नहीं दिखता। [...]
छटा अद्भुत बन आई, शंभू ने आज होली मचाई
होली आ गयी। हर साल आती है। इस बार जरा जल्दी आयी। मैं स्वभाव से घरघुस्सू किसम का हूँ। कोई भी त्यौहार, खास कर होली उत्सवप्रिय आदमी के लिए है। हर त्यौहार में पता नहीं मेरा मन क्यों बुझ सा जाता है। होली में तो सशंकित भी रहता हूँ। भला क्यों, नहीं समझ पाता। भाभी [...]
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