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लेखक : महेश पुनेठा :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
विद्यालय जाते जीप में स्टाफ के बीच रोज किसी न किसी विषय पर कोई न कोई चर्चा शुरू हो ही जाती है। विद्यालय की पढ़ाई-लिखाई, प्रबंधन से लेकर देश-दुनिया की राजनीति, समाज, संस्कृति चर्चा के विषय बन जाते हैं। आज की चर्चा कुमाउनी होली को लेकर चल पड़ी। हमारे एक शिक्षक साथी गिरजा शंकर जोशी [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
नन्द किशोर भगत उन्नीस सौ पचास-साठ के दशक में एक समय रहा जब ग्राम फरसौली, भवाली में होलियारों/ र्कीतनकारों की एक टीम होती थी जिसे हम/हमारे हम उम्र उक्त अवधि तक देखते रह, उनके साथ होली खेलते रहे। वह होली अब उन्हीं होलियारों के साथ विदा हो गई है। ग्राम लेख (फरसौली) के पं. जय [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
भैरव लखचौरा सल्ट क्षेत्र में प्राचीन समय से ही होली का त्यौहार उल्लास पूर्वक मनाने की परम्परा रही है। यह क्षेत्र हालांकि कुमाऊँ का सीमान्त क्षेत्र है यहाँ से गढ़वाल की सीमा प्रारम्भ होती है। सामाजिक रूप से सल्ट का गढ़वाल से प्रगाढ़ व रोटी-बेटी के रिश्ते रहे हैं परंतु सांस्कृतिक दृष्टि से देखा जाये [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :April 14, 2011 पर प्रकाशित
अब तो राजनीति भी होली जैसी हो गयी है। होली में शायद उतने रंग न होते हों, जितने राजनीति में होने लगे हैं। लेकिन इन सारे रंगों का बुनियादी रंग एक ही है भ्रष्टाचार। मगर समझने की बात यह है कि यह भ्रष्टाचार होता क्यों है कई रंगों के झण्डे लेकर कई तरह के लोक-लुभावने [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 21, 2010 पर प्रकाशित
होली अंक में शम्भू जी की तरंग कुछ ज्यादा ही वल्गर हो गयी। ऐसा लगा पढ़कर कि वे उत्तराखंड के सोद्देश्य पाक्षिक में न लिखकर अपने चौकड़ी के चार यारों को अपने दिनों का किस्सा सुना रहे हों। चलो, फिर लिखने वाले ने लिख दिया। मगर समाचार का एक सम्पादक भी तो है। उसकी भूमिका [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 14 || 01 मार्च से 14 मार्च 2010:: वर्ष :: 33 :March 5, 2010 पर प्रकाशित
वरिष्ठ होलियार चन्द्रशेखर कपिल ने अपने लटके-झटकों के साथ होली के बीच ‘अपने मजे का मजा’ किस्से को सुनाया तो नैनीताल समाचार के पटांगण में बैठे सभी रसिक श्रोता व होल्यार खिल उठे। सचमुच होली अपने मजे का मजा है। चाहे वह सत्ता प्रतिष्ठानों की हो या भूखे, नंगे, असहाय लोगों की या माफिया गठजोड़ [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
शंभु ने आज होली मचाई। इत दल साज्यो शिव शंकर ने, उत दल गिरिजा लाई। रंग गुलाल चलें दोउ दल में, शोभा ललित बनाई-सखी छवि वरणि न जाई। शंभु ने आज होरी मचाई गिरिजा झपट चली सखियन ते शंकर सन्मुख आई। भर पिचकारी दृगन में मारी मुख से लख मुसकाई।। देख शिव रूप लुभाई शंभु [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
एक बार फिर होलियाँ सामने हैं। सामाजिक सद्भाव का यह एक विलक्षण पर्व है, जिसमें हास्य होता है, लेकिन कटुता नहीं होती। व्यंग्य होता है, मगर उससे कोई रंजिश नहीं जनमती। अश्लीलता होती है, लेकिन वह सहज भाव से स्वीकार कर ली जाती है। काश, होली से इतर भी हमारे समाज में ऐसी सहिष्णुता, इतनी [...]
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लेखक : राम सिंह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
माधुर्य, प्रेम और सौन्दर्य का पर्व होली मानव और मानवेतर प्रकृति में बदलाव का नूतन संदेश लेकर आता है। वृक्षों, लताओं, बेलों में नव पल्लव, कोपलें, पुष्प और उन पर मँडराते भ्रमरों-तितलियों के झुण्ड प्रकृति को संगीतमय बना देते हैं। नीरस पतझड़ और काटने वाली वायु के झोंकों के स्थान पर प्रकृति का नव पल्लवों [...]
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लेखक : अरविंद मुद्गल :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
विभिन्न संस्कृतियों के अनेको रंगों से रंगे देश में रंगो का त्योहार है होली, जिसके ये रंग अब देशवासियों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी का एक हिस्सा हैं। यहाँ तो साल भर होली है। कभी सीमा पार से आतंकी आकर निर्दोषों के खून से होली खेलते हैं तो कभी अपने ही अपनों का लाल रंग बेरंग [...]
Posted in विविध, होली अंक | Tagged development, globalisation, holi, holi edition 2010, holi festival, price rise |
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