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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2011:: वर्ष :: 34 :May 7, 2011 पर प्रकाशित
बरस दीवाली बरसे फाग, जो नर जीवे खेले आज, हो हो होलक रे बरस दीवाली बरसे फाग, जो नर जीवे खेले आज, हो हो होलक रे नैनीताल समाचार के सुधी पाठक, विज्ञापनदाता, सहयोगी, समय से पाठकों तक नहीं पहुँचाने वाला डाक विभाग व तल्लीताल पोस्ट ऑफिस वाले जी रौं लाख सौ बरीस…हो हो होलक रे [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
शंभु ने आज होली मचाई। इत दल साज्यो शिव शंकर ने, उत दल गिरिजा लाई। रंग गुलाल चलें दोउ दल में, शोभा ललित बनाई-सखी छवि वरणि न जाई। शंभु ने आज होरी मचाई गिरिजा झपट चली सखियन ते शंकर सन्मुख आई। भर पिचकारी दृगन में मारी मुख से लख मुसकाई।। देख शिव रूप लुभाई शंभु [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
एक बार फिर होलियाँ सामने हैं। सामाजिक सद्भाव का यह एक विलक्षण पर्व है, जिसमें हास्य होता है, लेकिन कटुता नहीं होती। व्यंग्य होता है, मगर उससे कोई रंजिश नहीं जनमती। अश्लीलता होती है, लेकिन वह सहज भाव से स्वीकार कर ली जाती है। काश, होली से इतर भी हमारे समाज में ऐसी सहिष्णुता, इतनी [...]
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लेखक : राम सिंह :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
माधुर्य, प्रेम और सौन्दर्य का पर्व होली मानव और मानवेतर प्रकृति में बदलाव का नूतन संदेश लेकर आता है। वृक्षों, लताओं, बेलों में नव पल्लव, कोपलें, पुष्प और उन पर मँडराते भ्रमरों-तितलियों के झुण्ड प्रकृति को संगीतमय बना देते हैं। नीरस पतझड़ और काटने वाली वायु के झोंकों के स्थान पर प्रकृति का नव पल्लवों [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 13 || 15 फरवरी से 28 फरवरी 2010:: वर्ष :: 33 :February 24, 2010 पर प्रकाशित
(‘बगरो बसंत है’ में इस बार सुधी पाठकों के लिये प्रस्तुत है प्रख्यात व्यंग्यकार हरिशंकर परसाईं की व्यंग्य रचना ‘घायल वसन्त’ तथा उपाध्याय बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की कविता ‘होली ) घायल वसन्त कल वसन्तोत्सव था। कवि वसन्त के आगमन की सूचना पा रहा था- ‘प्रिय, फिर आया मादक वसन्त।’ मैंने सोचा, जिसे वसन्त के आने [...]
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लेखक : राजीव लोचन साह :: अंक: 13-14 || 15 फरवरी से 14 मार्च 2009:: वर्ष :: 32 :February 15, 2009 पर प्रकाशित
जी रौं लाख सौ बरीस! ‘नैनीताल समाचार’ के इस होली विशेषांक के लिये काव्य रचनायें जुटाने वाले युवा कवि शिरीष मौर्य जी रौं लाख सौ बरीस! भारत के संविधान का सच्चा चेहरा दिखाने वाले रविकिरण जैन जी रौं लाख सौ बरीस। जिनकी रचनायें इस अंक में प्रकाशित हो सकीं वे, जो वादा कर के समय [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 15 || 15 मार्च से 31 मार्च 2008:: वर्ष :: 31 :March 31, 2008 पर प्रकाशित
पिछले पांच सालों में जिस तेजी से स्थानीय स्तर के समाचारों का चस्का गली-मोहल्लों में लगा है, उसने अब हमारे त्यौहारों को भी समाचार बना डाला है। समाचार होना अच्छी बात है लेकिन पेज रंगीन करने वाली पत्रकारिता के हाथों त्यौहारों का संचालन निश्चित रूप से तमाशा बनकर एक दिन सबको चिढ़ायेगा। जिसकी शुरूआत हो [...]
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