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लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
मैं महाविद्यालय प्रांगण में घूम ही रहा था कि एक छात्र ने मुझसे पूछा, ‘‘सर पोल साइंस के फर्स्ट पेपर का नाम क्या है ?’’ मैंने पूछा-‘‘अरे परसों तो इक्जाम है, तुम अब पूछ रहे हो ?’’ तो उसने कहा, ‘‘तो क्या गुरुजी, ‘लक्ष्मी’ जिन्दाबाद। वन नाइट फाइट.. …….।’’ मैने कहा मतलब ? तो वह [...]
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लेखक : रमदा :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
उच्च शिक्षा (आशय बारहवीं के बाद की शिक्षा से है) के दो रूप हैं- ज्ञानमूलक एवं क्षमतामूलक। दोनों के बीच एक स्पष्ट विभाजक रेखा खींच पाना कठिन है किन्तु ‘बुद्धि के लिये बुद्धि का प्रशिक्षण’ एवं ‘क्रियात्मक शिक्षा या रोजगार के लिये दक्षता का प्रशिक्षण’ जैसी मोटी रेखा खींची जा सकती है। पहले प्रकार में [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति : नाजिश़ तमन्ना ‘‘कहाँ चली गयी थी तू, मेरे को बताया भी नहीं, मेरे से मिल कर क्यूँ नहीं गई, मुझे अच्छा नहीं लगा।’’ भरी दोपहरी में ऐसे ही अनगिनत सवालों कि बौछार में भींग रही थी मैं और इस बरसने वाली बदली का नाम था ‘गंगा’। अल्मोड़ा बाजार के सबसे व्यस्त चौराहों में [...]
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लेखक : मनोहर चमोली :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
26/11/2005 राजकीय हाई स्कूल में आज मेरा पहला दिन था। पहाड़ के स्कूल बहुत दूर-दूर हैं। यह स्कूल दुर्गम है। बच्चे उचक-उचक कर देख रहे थे। प्रिंसिपल मुझे कक्षाओं में ले गये। उन्होंने बच्चों को बताया कि अब मैं भी उन्हें पढ़ाउँगा। स्कूल ढेर सारे बच्चों का घर है। कई गाँव से आने वाले बच्चे, [...]
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लेखक : नैनीताल समाचार :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
प्रस्तुति: आशा पाण्डे इतिहास इस बात का साक्षी है कि मानव विकास की कहानी ज्ञान की लेखनी से ही लिखी गई है। आज प्रगति के शिखर को स्पर्श करने वाला मानव, शिक्षा के विविध आयामों के माध्यम से अपनी महत्वाकांक्षी परिकल्पनाओं को साकार करने में सक्षम है। तथापि यह भी एक कटु सत्य है कि [...]
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लेखक : दिनेश कर्नाटक :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
आज से बीस साल पहले जब हम लोग पढ़ रहे थे तो स्कूलों के रूप में सरकारी, अशासकीय, संस्कृत विद्यालय, मदरसे और हम को दूर से ही भयभीत करने वाले सैनिक स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय और कुछ नामी-गिरामी पब्लिक स्कूल थे। आज हर ओर फैल चुके कॉन्वेंट स्कूलों की तब शुरूआत हो रही थी। हमारे साथ [...]
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लेखक : महेश पुनेठा :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
मनुष्य की सृजनशीलता की शुरूआत बचपन से हो जाती है। बच्चा तमाम चीजों के संपर्क में आता है। उन्हें देखता-सुनता है। उनके बीच समानता या अंतर स्थापित करता है। दूसरों के साथ अपने संबंध बनाता है। वह भाषा सीखता है और अपने तौर पर उसका प्रयोग करता है। यह उसकी पहली सृजनात्मक क्रिया है। यह [...]
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लेखक : प्रभात उप्रेती :: अंक: 01-02 || 15 अगस्त से 14 सितम्बर 2009:: वर्ष :: 33 :September 14, 2009 पर प्रकाशित
शिक्षा का स्वरूप राजनैतिक शक्ति तय करती है। भारत में पूँजीवाद और सामंतवाद के फ्यूजन के बीच शिक्षा बेपेंदी का लोटा है इसे टिकाया जाये तो कहाँ ? वर्तमान उच्च शिक्षा का पिता मैकाले है। गुलामी की वही छायाएँ हमारी उच्च शिक्षाओं में छायी हैं। हम आत्मविहीन युग में जी रहे हैं। शिक्षा में तीन [...]
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